11 जुलाई 2026
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कन्नूर एयरपोर्ट पर मल्टी-एजेंसी एंटी-हाइजैकिंग मॉक ड्रिल, CISF-NSG समेत दर्जनभर एजेंसियों ने परखी तैयारी

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कन्नूर एयरपोर्ट पर मल्टी-एजेंसी एंटी-हाइजैकिंग मॉक ड्रिल, CISF-NSG समेत दर्जनभर एजेंसियों ने परखी तैयारी

सारांश

कन्नूर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 11 जुलाई को आयोजित मल्टी-एजेंसी एंटी-हाइजैकिंग मॉक ड्रिल में CISF, NSG, IB, स्थानीय पुलिस समेत एक दर्जन से अधिक एजेंसियों ने हिस्सा लिया। विमान अपहरण के काल्पनिक परिदृश्य में एजेंसियों की तैयारी और समन्वय क्षमता को परखा गया।

मुख्य बातें

कन्नूर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 11 जुलाई को व्यापक मल्टी-एजेंसी एंटी-हाइजैकिंग मॉक एक्सरसाइज (AHME) आयोजित की गई।
CISF, NSG, IB, BDDS, AAI, KIAL, BPCL, BOI सहित एक दर्जन से अधिक एजेंसियों ने भाग लिया।
अभ्यास में यात्री सुरक्षा, विमान घेराबंदी, संदिग्धों से निपटना, चिकित्सा सहायता और आपातकालीन निकासी का अभ्यास किया गया।
समापन पर ADM एमपी पुरुषोत्तमन की अध्यक्षता में डीब्रीफिंग बैठक हुई, जिसमें CASO नितिन कुमार त्यागी और AIG शिव कुमार पांडे शामिल रहे।
CISF के अनुसार, ऐसी ड्रिल का उद्देश्य सुरक्षा परीक्षण के साथ-साथ एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल विकसित करना है।

कन्नूर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 11 जुलाई को एक व्यापक मल्टी-एजेंसी एंटी-हाइजैकिंग मॉक एक्सरसाइज (AHME) आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य विमान अपहरण जैसी गंभीर आपात स्थिति में सुरक्षा एजेंसियों की तैयारी, आपसी समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को परखना था। यह अभ्यास देश के प्रमुख हवाई अड्डों पर नियमित रूप से आयोजित होने वाली सुरक्षा समीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा है।

मुख्य घटनाक्रम

अभ्यास के दौरान विमान अपहरण की एक काल्पनिक परिदृश्य तैयार की गई, जिसमें यात्रियों की सुरक्षा, विमान को सुरक्षित घेरना, संदिग्धों से निपटने की रणनीति, घायलों को चिकित्सा सहायता और आपातकालीन निकासी जैसी प्रक्रियाओं का वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप अभ्यास किया गया। सभी एजेंसियों ने तय प्रोटोकॉल के अनुसार अपनी-अपनी जिम्मेदारियाँ निभाते हुए संयुक्त अभियान का संचालन किया।

भाग लेने वाली एजेंसियाँ

इस मॉक एक्सरसाइज में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG), स्थानीय पुलिस, राज्य बम निरोधक एवं विस्फोटक निष्क्रियकरण दस्ता (BDDS), कन्नूर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (KIAL), अग्निशमन एवं बचाव सेवाएं, इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), एयरलाइंस, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI), BPCL, PARCO मेडिकल स्टाफ, जिला प्रशासन और ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन (BOI) सहित कई अन्य संबंधित एजेंसियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। गौरतलब है कि इतनी बड़ी संख्या में एजेंसियों की एकसाथ भागीदारी इस अभ्यास को असाधारण रूप से व्यापक बनाती है।

सरकार और अधिकारियों की प्रतिक्रिया

CISF के अनुसार, इस तरह की संयुक्त मॉक ड्रिल का उद्देश्य केवल सुरक्षा व्यवस्था का परीक्षण करना ही नहीं, बल्कि विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल विकसित करना भी है। एयरपोर्ट पर सुरक्षा से जुड़ी बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए समय-समय पर ऐसे अभ्यास आयोजित किए जाते हैं, ताकि सभी संबंधित विभाग आधुनिक सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार रहें।

समीक्षा बैठक

मॉक एक्सरसाइज के समापन पर अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (ADM) एमपी पुरुषोत्तमन की अध्यक्षता में एक संयुक्त समीक्षा (डीब्रीफिंग) बैठक आयोजित की गई। बैठक में वरिष्ठ कमांडेंट एवं मुख्य विमानन सुरक्षा अधिकारी (CASO) नितिन कुमार त्यागी, AIG/APSZ चेन्नई शिव कुमार पांडे और सभी सहभागी एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में अभ्यास के दौरान अपनाई गई प्रक्रियाओं, विभिन्न एजेंसियों के प्रदर्शन और समन्वय की विस्तार से समीक्षा की गई। अधिकारियों ने भविष्य में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक सुझाव भी साझा किए।

आगे की राह

यह अभ्यास ऐसे समय में आया है जब देशभर के प्रमुख हवाई अड्डों पर सुरक्षा मानकों को और सुदृढ़ करने पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित मल्टी-एजेंसी ड्रिल से वास्तविक संकट में समन्वित और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित होती है, जो यात्री सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ऐसे अभ्यासों की आवृत्ति और परिणामों की सार्वजनिक जवाबदेही कितनी है। एक दर्जन से अधिक एजेंसियों की भागीदारी समन्वय की जटिलता को रेखांकित करती है — वास्तविक संकट में यही जटिलता सबसे बड़ी चुनौती बनती है। नियमित डीब्रीफिंग और सुझावों को लागू करने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना ज़रूरी है, ताकि ये अभ्यास महज औपचारिकता न बनें।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कन्नूर एयरपोर्ट पर एंटी-हाइजैकिंग मॉक ड्रिल क्या है?
यह 11 जुलाई को कन्नूर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर आयोजित एक मल्टी-एजेंसी सुरक्षा अभ्यास है, जिसमें विमान अपहरण के काल्पनिक परिदृश्य में विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों की तैयारी और समन्वय क्षमता को परखा गया। इसका उद्देश्य वास्तविक संकट में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है।
इस मॉक ड्रिल में कौन-कौन सी एजेंसियाँ शामिल थीं?
अभ्यास में CISF, NSG, स्थानीय पुलिस, BDDS, KIAL, अग्निशमन सेवाएं, IB, AAI, BPCL, PARCO मेडिकल स्टाफ, जिला प्रशासन और BOI सहित एक दर्जन से अधिक एजेंसियों ने भाग लिया।
मॉक ड्रिल में किन परिस्थितियों का अभ्यास किया गया?
अभ्यास में यात्रियों की सुरक्षा, विमान को सुरक्षित घेरना, संदिग्धों से निपटने की रणनीति, घायलों को चिकित्सा सहायता और आपातकालीन निकासी जैसी प्रक्रियाओं का वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप अभ्यास किया गया।
अभ्यास के बाद समीक्षा बैठक में कौन शामिल हुए?
मॉक एक्सरसाइज के बाद ADM एमपी पुरुषोत्तमन की अध्यक्षता में डीब्रीफिंग बैठक हुई। इसमें CASO नितिन कुमार त्यागी , AIG/APSZ चेन्नई शिव कुमार पांडे और सभी सहभागी एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
एयरपोर्ट पर इस तरह की मॉक ड्रिल क्यों ज़रूरी है?
CISF के अनुसार, ऐसी संयुक्त ड्रिल का उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था का परीक्षण करने के साथ-साथ विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल विकसित करना है। आधुनिक सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयारी बनाए रखने के लिए समय-समय पर ऐसे अभ्यास आवश्यक हैं।
राष्ट्र प्रेस
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