राजकोट एयरपोर्ट पर सीआईएसएफ की एंटी-हाईजैकिंग मॉक ड्रिल, विमान अपहरण से निपटने की तैयारी परखी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने 8 जुलाई 2026 को राजकोट हवाई अड्डे पर वार्षिक एंटी-हाईजैकिंग मॉक एक्सरसाइज (एएचएमई) का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य विमान अपहरण जैसी गंभीर आपात स्थिति में सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया क्षमता, परिचालन तैयारी और आपसी समन्वय को कसौटी पर परखना था।
मॉक ड्रिल का नेतृत्व और भागीदारी
इस अभ्यास की अध्यक्षता राजकोट के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (आईपीएस) चैतन्य मंडलिक ने की। ड्रिल में सीआईएसएफ, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई), जिला प्रशासन, इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी), विभिन्न एयरलाइंस और विमानन क्षेत्र से जुड़े अनेक हितधारकों के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मी शामिल हुए। इस बहु-एजेंसी भागीदारी ने अभ्यास को व्यापक और वास्तविकता के करीब बनाया।
अभ्यास में क्या परखा गया
ड्रिल के दौरान विमान अपहरण की काल्पनिक लेकिन यथार्थवादी परिस्थितियाँ तैयार की गईं। इनके ज़रिए यह जाँचा गया कि सीआईएसएफ, स्थानीय पुलिस और ज़रूरत पड़ने पर राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) जैसे विशेष बल किसी खतरे को कितनी तेज़ी और प्रभावशीलता से नियंत्रित कर सकते हैं। इसके साथ ही एयरपोर्ट प्रबंधन, एयरलाइंस और सरकारी खुफिया एजेंसियों के बीच संचार प्रणाली एवं समन्वय की भी समीक्षा की गई।
मानक प्रक्रियाओं की समीक्षा
इस मॉक ड्रिल का एक अहम पहलू मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) में किसी भी कमी या खामी की पहचान करना था। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के अभ्यास समय रहते कमज़ोरियाँ उजागर करते हैं, जिन्हें दूर कर वास्तविक संकट के समय बेहतर प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सकती है। सुरक्षा व्यवस्था, आपातकालीन संचार और विभागीय तालमेल — तीनों स्तरों पर परीक्षण किया गया।
एंटी-हाईजैकिंग अभ्यास का महत्व
गौरतलब है कि देश के हवाई अड्डों पर इस तरह की पूर्ण-स्तरीय सुरक्षा कवायद नियमित रूप से अनिवार्य रूप से आयोजित की जाती है। बदलती वैश्विक विमानन सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनज़र ये अभ्यास सुरक्षा एजेंसियों की परिचालन क्षमता को अद्यतन रखने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने हवाई अड्डों पर यात्री यातायात में तेज़ी से वृद्धि देख रहा है, जिससे विमानन सुरक्षा की ज़िम्मेदारी और बढ़ जाती है।
आगे की राह
अभ्यास के दौरान उजागर हुई कमियों और सफलताओं के आधार पर संबंधित एजेंसियाँ अपनी आपदा एवं सुरक्षा योजनाओं को और परिष्कृत करेंगी। राजकोट हवाई अड्डे पर इस तरह की नियमित ड्रिल यह सुनिश्चित करती है कि किसी भी वास्तविक आपात स्थिति में सभी हितधारक एकजुट और प्रभावी प्रतिक्रिया देने में सक्षम हों।