डिजिटल पेमेंट्स कॉन्क्लेव 2026: विशेषज्ञों ने कहा — डिजिटल अर्थव्यवस्था भारत की प्रगति की रीढ़
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 8 जुलाई 2026 को आयोजित एक उच्चस्तरीय डिजिटल पेमेंट्स कॉन्क्लेव में देश के प्रमुख आर्थिक विशेषज्ञों ने एकमत से कहा कि डिजिटल अर्थव्यवस्था अब भारत की भावी आर्थिक और सामाजिक प्रगति की मज़बूत नींव बन चुकी है। चिंतन रिसर्च फाउंडेशन (CRF), इकिगाई लॉ और कोआन एडवाइजरी ग्रुप के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में नीति, तकनीक और वित्त क्षेत्र की शीर्ष हस्तियों ने भाग लिया।
मुख्य घटनाक्रम
CRF के सदस्य संजीव अहलूवालिया ने उद्घाटन भाषण में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और डिजिटल पेमेंट को वित्तीय समावेशन तथा आर्थिक दक्षता का सबसे प्रभावी साधन बताया। उनके अनुसार, DPI ने उन वर्गों तक बैंकिंग और भुगतान सेवाएँ पहुँचाई हैं जो पहले इनसे वंचित थे।
इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस (ICRIER) के विज़िटिंग प्रोफेसर दीपक मिश्रा ने स्पष्ट किया कि डिजिटलाइज़ेशन को बाहर से आयातित नहीं किया जा सकता — इसे मानव पूंजी, संस्थागत विश्वास और सतत निवेश की ठोस बुनियाद पर खड़ा करना होगा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को आज अपनाने वाले ही कल के इनोवेटर होंगे।
विशेषज्ञों की राय
शिव नादर यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज़ एंड सोशल साइंसेज़ के डीन रजत कथुरिया ने कहा कि भारत का DPI भरोसे पर टिका है और रिसर्च, डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर तथा हाई-वैल्यू डिजिटल सेवाओं के ज़रिये उत्पादकता बढ़ाने की इसमें अपार क्षमता है। हालाँकि, उन्होंने आगाह किया कि तकनीकी प्रगति समावेशी होनी चाहिए और पहचान की सुरक्षा, सहमति तथा सुलभता से कोई समझौता स्वीकार्य नहीं है।
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के पूर्व मुख्य परिचालन अधिकारी बालाकृष्णन महादेवन ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के अगले चरण की रूपरेखा रखी। उनके अनुसार, UPI के पहले दशक में इंटरऑपरेबिलिटी और व्यापक विस्तार पर ध्यान केंद्रित रहा, जबकि आगे की प्राथमिकता मज़बूत बैकअप सिस्टम और AI-आधारित धोखाधड़ी पहचान तकनीक को अपनाने की होनी चाहिए।
सीमा-पार भुगतान और कानूनी ढाँचा
पूर्व वित्त सचिव अशोक लवासा ने भारत के पेमेंट सिस्टम को वैश्विक स्तर पर ले जाने की ज़रूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षित क्रॉस-बॉर्डर ट्रांज़ैक्शन के लिए एकीकृत इंफ्रास्ट्रक्चर, समान मानक और स्पष्ट कानूनी ढाँचे अनिवार्य हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत के UPI को कई देशों में स्वीकृति मिल रही है और सरकार इसे और अधिक देशों तक विस्तारित करने की कोशिश में है।
साइबर सुरक्षा और भरोसे की चुनौती
कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों ने डिजिटल धोखाधड़ी और साइबर अपराध के बढ़ते खतरे को प्रमुख चिंता के रूप में उठाया। उनके अनुसार, देश के तेज़ी से विस्तार पा रहे डिजिटल वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र में भरोसा बनाए रखने के लिए मज़बूत संस्थागत समन्वय, उपभोक्ता जागरूकता और सक्रिय साइबर सुरक्षा उपाय ज़रूरी हैं।
आगे की राह
विशेषज्ञों ने कहा कि इस कॉन्क्लेव से निकले सुझाव 'विकसित भारत 2047' के विज़न के अनुरूप एक सुरक्षित, समावेशी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी डिजिटल पेमेंट पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की नीतिगत चर्चा में योगदान देंगे। गौरतलब है कि भारत पहले से ही UPI लेनदेन की मात्रा के मामले में विश्व में अग्रणी स्थान रखता है, और यह कॉन्क्लेव उस यात्रा को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।