एआई और डिजिटल पेमेंट पर विशेषज्ञों की बड़ी राय: फायदे भी, सतर्कता भी जरूरी
सारांश
Key Takeaways
- FICCI के 6वें पीआईसीयू फिनटेक कॉन्फ्रेंस 2025 में बैंकिंग और फिनटेक विशेषज्ञों ने एआई व डिजिटल पेमेंट पर विचार साझा किए।
- IBA सीनियर एडवाइजर सुरिंदर कुमार थापर ने कहा — एआई पर 'गार्डरेल्स' मौजूद हैं, बड़े खतरे फिलहाल नियंत्रण में।
- मार्च 2025 में यूपीआई के जरिए 14 अरब से अधिक ट्रांजैक्शन हुए, जो एक रिकॉर्ड है।
- बिजनेसनेक्स्ट सीईओ निशांत सिंह ने कहा — एआई ने साइबर खतरों का दायरा बढ़ाया, 2024 में 11 लाख+ साइबर शिकायतें दर्ज।
- यूपीआई की नई 'फैमिली लिंकिंग' सुविधा बुजुर्गों को साइबर ठगी से बचाने में कारगर साबित हो सकती है।
- RBI और NPCI जल्द एआई बैंकिंग सेवाओं के लिए नए दिशानिर्देश जारी कर सकते हैं।
नई दिल्ली, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। एफआईसीसीआई द्वारा आयोजित 6वें पीआईसीयू फिनटेक कॉन्फ्रेंस 2025 में भारतीय बैंकिंग और फिनटेक जगत के शीर्ष विशेषज्ञों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), यूपीआई और डिजिटल पेमेंट सिस्टम की संभावनाओं एवं जोखिमों पर खुलकर अपनी राय रखी। विशेषज्ञों का एकमत था कि नई तकनीकें भारत को कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से ले जा रही हैं, लेकिन साइबर सुरक्षा को लेकर सतर्कता बरतना उतना ही जरूरी है।
एआई तकनीक: जोखिम है, लेकिन 'गार्डरेल्स' भी मौजूद
इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) के सीनियर एडवाइजर सुरिंदर कुमार थापर ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में स्पष्ट किया कि हर नई तकनीक के साथ कुछ न कुछ जोखिम आते हैं, लेकिन इनसे निपटने के लिए मजबूत सुरक्षा तंत्र — जिसे उन्होंने 'गार्डरेल्स' कहा — पहले से तैयार किए जाते हैं।
उन्होंने कहा, "किसी भी तकनीक को व्यापक स्तर पर लागू करने से पहले उसका कठोर परीक्षण होता है और आवश्यक सुरक्षा प्रणालियां स्थापित की जाती हैं।" थापर के अनुसार, एआई और एजेंटिक टेक्नोलॉजी से जुड़े बड़े खतरे फिलहाल नियंत्रण में हैं क्योंकि इन पर निरंतर निगरानी और सुधार की प्रक्रिया जारी है।
यह बयान ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत में 2024-25 के दौरान साइबर फ्रॉड के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों को एआई आधारित प्रणालियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
यूपीआई ने बदली भारत की आर्थिक तस्वीर
सुरिंदर कुमार थापर ने यूपीआई (Unified Payments Interface) को भारत की डिजिटल क्रांति का सबसे बड़ा स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि यूपीआई ने देश को तेजी से कैशलेस इकोनॉमी की दिशा में आगे बढ़ाया है और ट्रांजैक्शन की संख्या व कुल राशि दोनों में कई गुना वृद्धि हुई है।
उल्लेखनीय है कि नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2025 में यूपीआई के जरिए 14 अरब से अधिक ट्रांजैक्शन हुए, जो एक रिकॉर्ड है। थापर ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि अब छोटे दुकानदार, रेहड़ी-पटरी वाले और ग्रामीण व्यापारी भी यूपीआई से भुगतान स्वीकार कर रहे हैं — यह डिजिटल समावेश की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
साइबर सुरक्षा: एआई ने बढ़ाया खतरे का दायरा
बिजनेसनेक्स्ट के सीईओ निशांत सिंह ने साइबर सुरक्षा के मुद्दे पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि साइबर खतरे पहले से मौजूद थे, लेकिन एआई के आगमन के बाद इनका दायरा और प्रभाव दोनों कई गुना बढ़ गए हैं।
निशांत सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार नागरिकों को डिजिटल फ्रॉड और साइबर खतरों से बचाने के लिए जागरूकता अभियान चला रही है। उन्होंने कहा, "सरकार के प्रयास सराहनीय हैं, लेकिन आम नागरिक की डिजिटल साक्षरता बढ़ाना अभी भी सबसे बड़ी चुनौती है।"
यह चिंता तब और प्रासंगिक हो जाती है जब गृह मंत्रालय की साइबर क्राइम रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में भारत में 11 लाख से अधिक साइबर शिकायतें दर्ज हुईं और डिजिटल फ्रॉड में करोड़ों रुपये की ठगी हुई।
यूपीआई की नई सुविधा: परिवार को जोड़ना, लेनदेन सुरक्षित बनाना
निशांत सिंह ने यूपीआई प्लेटफॉर्म की एक नई और उपयोगी विशेषता की ओर ध्यान दिलाया — अब यह प्लेटफॉर्म उपयोगकर्ताओं को अपने परिवार के अन्य सदस्यों को भी जोड़ने की सुविधा दे रहा है। इससे घर के युवा और तकनीक-कुशल सदस्य अपने बुजुर्ग माता-पिता के डिजिटल लेनदेन में सहायता कर सकते हैं।
यह कदम न केवल डिजिटल लेनदेन को अधिक सुरक्षित बनाता है, बल्कि बुजुर्गों को साइबर ठगी से बचाने में भी कारगर साबित हो सकता है — क्योंकि आंकड़े बताते हैं कि साइबर फ्रॉड के सबसे अधिक शिकार 60 वर्ष से अधिक आयु के नागरिक होते हैं।
आगे की राह: तकनीक और सतर्कता साथ-साथ
विशेषज्ञों की राय का सार यही है कि एआई, फिनटेक और डिजिटल पेमेंट भारत की आर्थिक प्रगति के अपरिहार्य हिस्से बन चुके हैं। लेकिन इनका लाभ तभी मिलेगा जब नागरिक जागरूक हों, नीति-निर्माता सतर्क हों और उद्योग जगत जवाबदेह हो।
आने वाले महीनों में RBI और NPCI की ओर से एआई आधारित बैंकिंग सेवाओं के लिए नए दिशानिर्देश जारी होने की संभावना है, जो इस क्षेत्र की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।