दिल्ली IGI हवाई अड्डे पर 'अग्नि चक्र' मॉक ड्रिल: विमान हादसे की बचाव तैयारियां परखी गईं
सारांश
मुख्य बातें
इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 12 मई 2026 को विमान दुर्घटना परिदृश्य पर आधारित मॉक ड्रिल 'अग्नि चक्र' का आयोजन किया गया, जिसमें सीआईएसएफ, एआरएफएफ, दिल्ली पुलिस, बीडीडीएस, चिकित्सा दल, एयरलाइंस और जमीनी एजेंसियों के कर्मियों ने हिस्सा लिया। इस अभ्यास का उद्देश्य वास्तविक आपात स्थिति में बहु-एजेंसी समन्वय और बचाव क्षमता का मूल्यांकन करना था।
मॉक ड्रिल में क्या हुआ
विमान दुर्घटना की सूचना मिलते ही सीआईएसएफ कर्मियों ने तत्काल दुर्घटना स्थल की घेराबंदी की और आवागमन को नियंत्रित करते हुए बचाव एवं निकासी अभियान में सक्रिय सहयोग दिया। अभ्यास के दौरान अंतर-एजेंसी संचार, आपातकालीन प्रतिक्रिया, हताहतों के प्रबंधन और संकट प्रबंधन प्रोटोकॉल का व्यापक मूल्यांकन किया गया।
इस ड्रिल से सीआईएसएफ और सहयोगी एजेंसियों की तैयारियों का जायजा लिया गया और संभावित कमज़ोरियों की पहचान की गई, ताकि वास्तविक संकट में त्वरित और समन्वित प्रतिक्रिया सुनिश्चित हो सके।
पिछले मॉक ड्रिल का क्रम
गौरतलब है कि आईजीआई हवाई अड्डे पर यह पहली बड़ी ड्रिल नहीं है। 6 अप्रैल को यहाँ हाई-इंटेंसिटी एंटी-हाइजैकिंग मॉक ड्रिल आयोजित की गई थी, जिसमें सीआईएसएफ, एनएसजी, दिल्ली पुलिस, बीसीएएस, डीजीसीए और डीआईएएल के अधिकारी शामिल हुए थे। इससे पहले 30 मार्च को ज्वाइंट काउंटर-टेरर मॉक ड्रिल का भी आयोजन हुआ था, जिसमें सीआईएसएफ, क्यूआरटी, बीडीडीएस, डॉग स्क्वाड, दिल्ली पुलिस और एनएसजी ने भाग लिया था और आतंकवादी हमले के सिमुलेशन पर फोकस किया गया था।
देशभर के हवाई अड्डों पर सतर्कता
यह ऐसे समय में आया है जब देश के अन्य प्रमुख हवाई अड्डों पर भी बहु-एजेंसी अभ्यास का सिलसिला जारी है। अयोध्या के महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बीते महीने आतंकवादी हमले के सिमुलेशन पर आधारित मल्टी-एजेंसी मॉक ड्रिल हुई, जिसमें सीआईएसएफ, यूपी एटीएस और पुलिस ने हिस्सा लिया।
तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मार्च में एंटी-हाइजैकिंग एक्सरसाइज़ आयोजित की गई, जबकि अप्रैल में भुवनेश्वर के बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी एंटी-हाईजैक मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इन सभी अभ्यासों में कई एजेंसियों की संयुक्त भागीदारी रही।
आगे क्या
इस श्रृंखलाबद्ध अभ्यासों से स्पष्ट है कि विमानन सुरक्षा एजेंसियाँ आपात परिदृश्यों के लिए अपनी प्रतिक्रिया क्षमता को नियमित रूप से परखती और मज़बूत करती रहेंगी। आने वाले महीनों में देश के अन्य प्रमुख हवाई अड्डों पर भी ऐसे संयुक्त अभ्यासों के आयोजन की संभावना बनी रहती है।