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कोयंबटूर हवाईअड्डे पर सीआईएसएफ की एंटी-हाइजैकिंग मॉक ड्रिल, 189 कर्मियों ने परखी तैयारी

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कोयंबटूर हवाईअड्डे पर सीआईएसएफ की एंटी-हाइजैकिंग मॉक ड्रिल, 189 कर्मियों ने परखी तैयारी

सारांश

कोयंबटूर हवाईअड्डे पर सीआईएसएफ ने 189 कर्मियों के साथ एंटी-हाइजैकिंग मॉक ड्रिल की। पुलिस, बीडीडीएस, अग्निशमन और एयरलाइन प्रतिनिधियों ने मिलकर हाइजैक परिदृश्य में SOP और एजेंसी-समन्वय परखा — एविएशन सुरक्षा पर केंद्रित यह अभ्यास सीआईएसएफ के लिए एक नई दिशा है।

मुख्य बातें

सीआईएसएफ ने 23 जून 2026 को कोयंबटूर हवाईअड्डे पर एंटी-हाइजैकिंग मॉक एक्सरसाइज़ आयोजित की।
अभ्यास में 189 कर्मी शामिल रहे — सीआईएसएफ, स्थानीय पुलिस, जिला प्रशासन, बीडीडीएस , अग्निशमन सेवा और एयरलाइन प्रतिनिधि।
मुख्य उद्देश्य: स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के तहत सभी एजेंसियों के बीच समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया को परखना।
यह ड्रिल विशेष रूप से एविएशन सुरक्षा पर केंद्रित थी, जो पिछले आपदा-प्रबंधन केंद्रित अभ्यासों से अलग है।
विमानन क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनज़र इस प्रकार की नियमित ड्रिल को आवश्यक माना जा रहा है।

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने 23 जून 2026 को कोयंबटूर हवाईअड्डे, तमिलनाडु पर एक व्यापक एंटी-हाइजैकिंग मॉक एक्सरसाइज़ का आयोजन किया, जिसका उद्देश्य विमान-अपहरण जैसी आपातकालीन स्थिति में सभी सुरक्षा एजेंसियों की त्वरित प्रतिक्रिया और आपसी तालमेल को परखना था। इस अभ्यास में 189 कर्मियों ने सक्रिय भाग लिया।

मॉक ड्रिल का उद्देश्य और रूपरेखा

इस अभ्यास का केंद्रीय लक्ष्य यह आकलन करना था कि वास्तविक हाइजैकिंग की स्थिति में सीआईएसएफ और संबद्ध एजेंसियाँ स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के अनुसार कितनी कुशलता और समन्वय के साथ कार्य कर सकती हैं। ड्रिल से पूर्व ही पूरी कार्ययोजना निर्धारित कर ली गई थी, ताकि प्रत्येक एजेंसी अपनी भूमिका के बारे में स्पष्ट रहे।

अभ्यास में मुख्य रूप से सीआईएसएफ, हवाईअड्डा संचालक, जिला प्रशासन, स्थानीय पुलिस, बम निरोधक एवं खोजी दस्ता (बीडीडीएस), अग्निशमन सेवा और एयरलाइन प्रतिनिधियों के कुल 189 कर्मी शामिल रहे।

एजेंसियों के बीच तालमेल पर विशेष जोर

विशेषज्ञों के अनुसार, आपातकालीन स्थितियों में विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी अक्सर संकट को और गहरा बना देती है। इसी कमज़ोरी को दूर करने के लिए इस मॉक ड्रिल में सभी भागीदार संस्थाओं के बीच सुचारू संचार और संयुक्त निर्णय-प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया गया। यह सुनिश्चित किया गया कि संकट की घड़ी में प्रत्येक एजेंसी बिना देरी के अपनी ज़िम्मेदारी निभाए।

एविएशन सुरक्षा की बढ़ती चुनौतियाँ

गौरतलब है कि वर्तमान में विमानन क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी चुनौतियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। इसी पृष्ठभूमि में इस प्रकार की नियमित मॉक ड्रिल न केवल सुरक्षाकर्मियों की कुशलता को परखती हैं, बल्कि उन्हें वास्तविक परिस्थितियों के लिए और अधिक सक्षम भी बनाती हैं। यह अभ्यास एविएशन सुरक्षा पर केंद्रित था, जो पिछले आपदा-प्रबंधन केंद्रित ड्रिलों से एक महत्त्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है।

सीआईएसएफ का पूर्व अनुभव

सीआईएसएफ इससे पहले भी देशभर के हवाईअड्डों पर कई मॉक ड्रिल आयोजित कर चुकी है, जो मुख्यतः आपदा प्रबंधन और आपातकालीन निकासी पर केंद्रित रहे हैं। हालाँकि, कोयंबटूर में आयोजित यह एंटी-हाइजैकिंग अभ्यास विशेष रूप से एविएशन सुरक्षा की जटिल चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था, जो इसे पिछले अभ्यासों से अलग बनाता है।

आने वाले समय में इस प्रकार के अभ्यासों की आवृत्ति बढ़ाए जाने की संभावना है, ताकि देश के प्रमुख हवाईअड्डों पर सुरक्षा तंत्र को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इस अभ्यास के निष्कर्ष कितनी जल्दी नीतिगत सुधारों में बदलते हैं। भारत के व्यस्त हवाईअड्डों पर यात्री संख्या तेज़ी से बढ़ रही है, फिर भी एविएशन-विशिष्ट सुरक्षा अभ्यासों की आवृत्ति अपेक्षाकृत कम रही है। एजेंसी-समन्वय की जो कमज़ोरी इस ड्रिल ने उजागर करने की कोशिश की, वह केवल कोयंबटूर की नहीं — बल्कि देशभर के टियर-2 हवाईअड्डों की साझा चुनौती है। बिना नियमित मूल्यांकन और सार्वजनिक जवाबदेही के, ये ड्रिल महज़ औपचारिकता बनकर रह जाती हैं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोयंबटूर में सीआईएसएफ की एंटी-हाइजैकिंग मॉक ड्रिल क्या थी?
यह 23 जून 2026 को कोयंबटूर हवाईअड्डे पर आयोजित एक सुरक्षा अभ्यास था, जिसमें विमान-अपहरण की काल्पनिक परिस्थिति में सीआईएसएफ और अन्य एजेंसियों की प्रतिक्रिया क्षमता को परखा गया। इसमें कुल 189 कर्मियों ने भाग लिया।
इस मॉक ड्रिल में कौन-कौन सी एजेंसियाँ शामिल थीं?
अभ्यास में सीआईएसएफ, हवाईअड्डा संचालक, जिला प्रशासन, स्थानीय पुलिस, बम निरोधक एवं खोजी दस्ता (बीडीडीएस), अग्निशमन सेवा और एयरलाइन प्रतिनिधि शामिल थे। सभी एजेंसियों के बीच समन्वय इस ड्रिल का केंद्रीय बिंदु था।
इस तरह की एंटी-हाइजैकिंग ड्रिल क्यों ज़रूरी है?
एविएशन क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों और विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी को देखते हुए ऐसी ड्रिल आवश्यक हो जाती हैं। ये अभ्यास सुरक्षाकर्मियों की कुशलता परखने के साथ-साथ उन्हें वास्तविक आपात स्थितियों के लिए तैयार भी करते हैं।
यह ड्रिल पिछले सीआईएसएफ अभ्यासों से कैसे अलग थी?
सीआईएसएफ के पिछले अधिकांश मॉक ड्रिल आपदा प्रबंधन और आपातकालीन निकासी पर केंद्रित रहे हैं। कोयंबटूर का यह अभ्यास विशेष रूप से एविएशन सुरक्षा और हाइजैकिंग-रोधी प्रतिक्रिया पर केंद्रित था, जो इसे एक नई दिशा में ले जाता है।
इस ड्रिल में SOP की क्या भूमिका थी?
स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के तहत ड्रिल से पहले ही पूरी कार्ययोजना निर्धारित की गई थी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि वास्तविक संकट में प्रत्येक एजेंसी तय प्रक्रिया के अनुसार बिना भ्रम के कार्य करे।
राष्ट्र प्रेस
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