21 सितंबर 2026
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तिरुचिरापल्ली एयरपोर्ट पर सीआईएसएफ का बम-धमकी मॉक ड्रिल 2026, 6 एजेंसियों ने संयुक्त अभ्यास किया

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तिरुचिरापल्ली एयरपोर्ट पर सीआईएसएफ का बम-धमकी मॉक ड्रिल 2026, 6 एजेंसियों ने संयुक्त अभ्यास किया

सारांश

तिरुचिरापल्ली एयरपोर्ट पर सीआईएसएफ ने 21 सितंबर को वार्षिक बम-धमकी मॉक ड्रिल-2026 आयोजित किया, जिसमें AAI, ARFF, BDDS, स्थानीय पुलिस और एयरलाइंस सहित छह से अधिक एजेंसियों ने संयुक्त रूप से टर्मिनल निकासी और आपातकालीन प्रतिक्रिया का अभ्यास किया।

मुख्य बातें

सीआईएसएफ ने 21 सितंबर 2026 को तिरुचिरापल्ली एयरपोर्ट पर 'वार्षिक बम-धमकी मॉक ड्रिल-2026' आयोजित किया।
अभ्यास में सीआईएसएफ, AAI, ARFF, स्थानीय पुलिस, BDDS और एयरलाइंस सहित 6 से अधिक एजेंसियाँ शामिल रहीं।
टर्मिनल बिल्डिंग की त्वरित एवं सुरक्षित निकासी, संदिग्ध वस्तु प्रबंधन और अंतर-एजेंसी समन्वय को व्यावहारिक रूप से परखा गया।
सीआईएसएफ ने अभ्यास के दौरान उत्कृष्ट तालमेल और तेज़ प्रतिक्रिया दर्ज की।
इस तरह के मॉक ड्रिल नियमित रूप से आयोजित होते हैं ताकि हवाई अड्डों की सुरक्षा सुदृढ़ रहे और वास्तविक खतरे में नुकसान कम से कम हो।

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के एयरपोर्ट सेक्टर ने 21 सितंबर 2026 को तिरुचिरापल्ली एयरपोर्ट पर 'वार्षिक बम-धमकी मॉक ड्रिल-2026' और 'टर्मिनल बिल्डिंग खाली करने का अभ्यास' आयोजित किया। इस संयुक्त अभ्यास में छह से अधिक एजेंसियों ने भाग लिया और आपातकालीन तैयारियों, निकासी प्रक्रियाओं तथा अंतर-एजेंसी समन्वय की कसौटी पर सुरक्षा तंत्र को परखा गया।

मॉक ड्रिल का उद्देश्य और स्वरूप

अभ्यास का मुख्य लक्ष्य यह जाँचना था कि बम की धमकी मिलने की स्थिति में एयरपोर्ट का समूचा सुरक्षा तंत्र कितनी तेज़ी और दक्षता से सक्रिय हो सकता है। इसमें टर्मिनल को सुरक्षित एवं त्वरित ढंग से खाली कराने की प्रक्रिया, संदिग्ध वस्तुओं की पहचान और विभिन्न एजेंसियों के बीच तत्काल समन्वय — तीनों पहलुओं को व्यावहारिक रूप से परखा गया।

सीआईएसएफ के एयरपोर्ट सेक्टर के आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर इस अभ्यास की जानकारी साझा की गई, जिसमें बताया गया कि यह ड्रिल निर्धारित वार्षिक कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित की गई।

भाग लेने वाली एजेंसियाँ

इस व्यापक अभ्यास में सीआईएसएफ, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI), एयरक्राफ्ट रेस्क्यू एंड फायर फाइटिंग (ARFF), स्थानीय पुलिस, बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वॉड (BDDS) तथा संबंधित एयरलाइंस के कर्मियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। सभी एजेंसियों ने तय प्रोटोकॉल के अनुसार त्वरित कार्रवाई और बेहतर तालमेल का प्रदर्शन किया।

गौरतलब है कि बहु-एजेंसी भागीदारी वाले इस तरह के संयुक्त अभ्यास का उद्देश्य असली खतरे की स्थिति में किसी भी 'कोऑर्डिनेशन गैप' को पहले ही पहचान कर दूर करना होता है — केवल व्यक्तिगत इकाइयों की तैयारी जाँचना नहीं।

अभ्यास के नतीजे

सीआईएसएफ ने बताया कि इस ड्रिल के दौरान आपातकालीन स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया, यात्रियों की सुरक्षित निकासी और भाग लेने वाली एजेंसियों के बीच उत्कृष्ट समन्वय देखने को मिला। अभ्यास में उभरी कमियों और सुधार के बिंदुओं को आगामी समीक्षा बैठक में संबोधित किया जाएगा।

नियमित अभ्यास क्यों ज़रूरी

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के हवाई अड्डों पर बम की धमकियों के फर्जी कॉल की घटनाएँ बीते कुछ वर्षों में बढ़ी हैं, जिनसे उड़ान संचालन और यात्री सुरक्षा पर गंभीर दबाव पड़ता है। सीआईएसएफ के अनुसार, ऐसे मॉक ड्रिल नियमित अंतराल पर आयोजित किए जाते हैं ताकि हवाई अड्डों की सुरक्षा को और सुदृढ़ बनाया जा सके और वास्तविक खतरे की स्थिति में जान-माल की हानि न्यूनतम रखी जा सके।

आगे चलकर इस अभ्यास की समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर सुरक्षा प्रोटोकॉल में आवश्यक सुधार किए जाने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इन अभ्यासों में सामने आई कमियों को व्यवस्थित रूप से दर्ज कर सुधारा जाता है या नहीं। देश के प्रमुख हवाई अड्डों पर बीते दो वर्षों में फर्जी बम-धमकियों की संख्या उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है, फिर भी इन ड्रिल की समीक्षा रिपोर्टें सार्वजनिक नहीं होतीं। पारदर्शिता बढ़ाना — कम से कम सुधार बिंदुओं के स्तर पर — न केवल जवाबदेही सुनिश्चित करेगा, बल्कि यात्रियों का भरोसा भी मज़बूत करेगा।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तिरुचिरापल्ली एयरपोर्ट पर सीआईएसएफ का मॉक ड्रिल क्या था?
यह 21 सितंबर 2026 को आयोजित 'वार्षिक बम-धमकी मॉक ड्रिल-2026' था, जिसमें बम की धमकी मिलने की काल्पनिक परिस्थिति में टर्मिनल खाली कराने और बहु-एजेंसी समन्वय का अभ्यास किया गया। यह सीआईएसएफ की नियमित वार्षिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
इस अभ्यास में कौन-कौन सी एजेंसियाँ शामिल थीं?
अभ्यास में सीआईएसएफ, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI), एयरक्राफ्ट रेस्क्यू एंड फायर फाइटिंग (ARFF), स्थानीय पुलिस, बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वॉड (BDDS) और संबंधित एयरलाइंस के कर्मी शामिल रहे।
यह मॉक ड्रिल क्यों ज़रूरी है?
ऐसे अभ्यास हवाई अड्डों पर सुरक्षा तंत्र की वास्तविक खतरे से पहले परीक्षा लेते हैं — निकासी प्रक्रिया, संदिग्ध वस्तु प्रबंधन और एजेंसियों के बीच समन्वय की कमियाँ उजागर कर उन्हें दूर करने का अवसर देते हैं। सीआईएसएफ के अनुसार इनका उद्देश्य जान-माल की हानि को न्यूनतम रखना है।
क्या इस तरह के ड्रिल नियमित रूप से होते हैं?
हाँ, सीआईएसएफ के अनुसार देश के विभिन्न हवाई अड्डों पर ऐसे मॉक ड्रिल वार्षिक कार्यक्रम के तहत नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं। तिरुचिरापल्ली का यह अभ्यास उसी सिलसिले की कड़ी है।
इस ड्रिल के नतीजे क्या रहे?
सीआईएसएफ ने बताया कि अभ्यास के दौरान आपातकालीन प्रतिक्रिया, सुरक्षित निकासी और सभी एजेंसियों के बीच उत्कृष्ट तालमेल देखने को मिला। अभ्यास से मिले फीडबैक के आधार पर सुरक्षा प्रोटोकॉल में आवश्यक सुधार किए जाएंगे।
राष्ट्र प्रेस
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