तिरुचिरापल्ली एयरपोर्ट पर सीआईएसएफ का बम-धमकी मॉक ड्रिल 2026, 6 एजेंसियों ने संयुक्त अभ्यास किया
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के एयरपोर्ट सेक्टर ने 21 सितंबर 2026 को तिरुचिरापल्ली एयरपोर्ट पर 'वार्षिक बम-धमकी मॉक ड्रिल-2026' और 'टर्मिनल बिल्डिंग खाली करने का अभ्यास' आयोजित किया। इस संयुक्त अभ्यास में छह से अधिक एजेंसियों ने भाग लिया और आपातकालीन तैयारियों, निकासी प्रक्रियाओं तथा अंतर-एजेंसी समन्वय की कसौटी पर सुरक्षा तंत्र को परखा गया।
मॉक ड्रिल का उद्देश्य और स्वरूप
अभ्यास का मुख्य लक्ष्य यह जाँचना था कि बम की धमकी मिलने की स्थिति में एयरपोर्ट का समूचा सुरक्षा तंत्र कितनी तेज़ी और दक्षता से सक्रिय हो सकता है। इसमें टर्मिनल को सुरक्षित एवं त्वरित ढंग से खाली कराने की प्रक्रिया, संदिग्ध वस्तुओं की पहचान और विभिन्न एजेंसियों के बीच तत्काल समन्वय — तीनों पहलुओं को व्यावहारिक रूप से परखा गया।
सीआईएसएफ के एयरपोर्ट सेक्टर के आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर इस अभ्यास की जानकारी साझा की गई, जिसमें बताया गया कि यह ड्रिल निर्धारित वार्षिक कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित की गई।
भाग लेने वाली एजेंसियाँ
इस व्यापक अभ्यास में सीआईएसएफ, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI), एयरक्राफ्ट रेस्क्यू एंड फायर फाइटिंग (ARFF), स्थानीय पुलिस, बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वॉड (BDDS) तथा संबंधित एयरलाइंस के कर्मियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। सभी एजेंसियों ने तय प्रोटोकॉल के अनुसार त्वरित कार्रवाई और बेहतर तालमेल का प्रदर्शन किया।
गौरतलब है कि बहु-एजेंसी भागीदारी वाले इस तरह के संयुक्त अभ्यास का उद्देश्य असली खतरे की स्थिति में किसी भी 'कोऑर्डिनेशन गैप' को पहले ही पहचान कर दूर करना होता है — केवल व्यक्तिगत इकाइयों की तैयारी जाँचना नहीं।
अभ्यास के नतीजे
सीआईएसएफ ने बताया कि इस ड्रिल के दौरान आपातकालीन स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया, यात्रियों की सुरक्षित निकासी और भाग लेने वाली एजेंसियों के बीच उत्कृष्ट समन्वय देखने को मिला। अभ्यास में उभरी कमियों और सुधार के बिंदुओं को आगामी समीक्षा बैठक में संबोधित किया जाएगा।
नियमित अभ्यास क्यों ज़रूरी
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के हवाई अड्डों पर बम की धमकियों के फर्जी कॉल की घटनाएँ बीते कुछ वर्षों में बढ़ी हैं, जिनसे उड़ान संचालन और यात्री सुरक्षा पर गंभीर दबाव पड़ता है। सीआईएसएफ के अनुसार, ऐसे मॉक ड्रिल नियमित अंतराल पर आयोजित किए जाते हैं ताकि हवाई अड्डों की सुरक्षा को और सुदृढ़ बनाया जा सके और वास्तविक खतरे की स्थिति में जान-माल की हानि न्यूनतम रखी जा सके।
आगे चलकर इस अभ्यास की समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर सुरक्षा प्रोटोकॉल में आवश्यक सुधार किए जाने की उम्मीद है।