चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर आतंकी हमले की मॉक ड्रिल: सेना, सीआईएसएफ और पंजाब पुलिस ने परखी तैयारी
सारांश
मुख्य बातें
चंडीगढ़ हवाई अड्डे पर 13 जुलाई को भारतीय सेना, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ), पंजाब पुलिस, कस्टम विभाग और एपीएचओ ने मिलकर आतंकवादी हमले की परिस्थिति में संयुक्त मॉक ड्रिल का आयोजन किया। इस बहु-एजेंसी अभ्यास में विभिन्न सुरक्षा बलों के बीच समन्वय, संचार और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता की गहन जाँच की गई।
मॉक ड्रिल का उद्देश्य और स्वरूप
इस संयुक्त अभ्यास का प्राथमिक लक्ष्य आतंकी हमले जैसी गंभीर स्थिति में शामिल सभी एजेंसियों की परिचालन तत्परता को परखना था। अभ्यास के दौरान एजेंसियों के बीच तालमेल, आपसी संवाद, ऑपरेशनल तैयारी और संकट प्रबंधन के तरीकों का बारीकी से मूल्यांकन किया गया। सीआईएसएफ के अनुसार, इस ड्रिल से विषम परिस्थितियों में एकजुट होकर कार्रवाई करने की क्षमता को और अधिक मज़बूती मिली।
एविएशन सिक्योरिटी को मज़बूत करने की दिशा में कदम
सीआईएसएफ के अनुसार, नियमित रूप से आयोजित किए जाने वाले ऐसे संयुक्त अभ्यास देश की एविएशन सिक्योरिटी व्यवस्था की रीढ़ हैं। इनके ज़रिए न केवल मौजूदा सुरक्षा तंत्र का परीक्षण होता है, बल्कि एजेंसियों के बीच कार्यात्मक समन्वय को भी परिष्कृत किया जाता है। आधुनिक सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयारी बनाए रखना इन अभ्यासों का केंद्रीय उद्देश्य है।
कन्नूर में एंटी-हाइजैकिंग अभ्यास
गौरतलब है कि इससे महज दो दिन पहले, 11 जुलाई को कन्नूर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर विमान अपहरण की आपात स्थिति से निपटने के लिए एक व्यापक 'मल्टी-एजेंसी एंटी-हाइजैकिंग मॉक एक्सरसाइज (एएचएमई)' आयोजित की गई थी। इस अभ्यास में सीआईएसएफ, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी), स्थानीय पुलिस, राज्य बम निरोधक एवं विस्फोटक निष्क्रियकरण दस्ता (बीडीडीएस), कन्नूर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (केआईएएल), अग्निशमन एवं बचाव सेवाएं, इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी), एयरलाइंस, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई), बीपीसीएल, पार्को मेडिकल स्टाफ, जिला प्रशासन और ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन (बीओआई) सहित दर्जनों एजेंसियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह ऐसे समय में आया है जब भारत के प्रमुख हवाई अड्डों पर सुरक्षा खतरों के मद्देनज़र बहु-स्तरीय तैयारी अनिवार्य हो गई है। ऐसे अभ्यासों से न केवल कमज़ोरियाँ उजागर होती हैं, बल्कि वास्तविक संकट के दौरान एजेंसियों की प्रतिक्रिया समय में भी उल्लेखनीय सुधार आता है।
आगे की राह
सीआईएसएफ ने स्पष्ट किया है कि देश के विभिन्न हवाई अड्डों पर इस तरह के संयुक्त अभ्यास समय-समय पर आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि सभी संबंधित विभाग आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए सदैव तत्पर रहें। यह पहल भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र की सुरक्षा को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाए रखने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।