13 जुलाई 2026
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यूएन के रुख पर तेहरान का पलटवार: ईरान ने बहरीन-कुवैत हमलों को बताया कानूनी आत्मरक्षा

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यूएन के रुख पर तेहरान का पलटवार: ईरान ने बहरीन-कुवैत हमलों को बताया कानूनी आत्मरक्षा

सारांश

ईरान ने संयुक्त राष्ट्र के बयान को एकतरफा बताते हुए खारिज किया — बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर कार्रवाई को वैध आत्मरक्षा बताया और हमलावरों को जवाबदेह ठहराने की माँग की। यह तनाव 28 फरवरी के उन हमलों के बाद से जारी है जिनमें पूर्व सुप्रीम लीडर खामेनेई की मृत्यु हुई थी।

मुख्य बातें

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने 13 जुलाई को संयुक्त राष्ट्र के बयान को गैर-जिम्मेदाराना करार दिया।
ईरान ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत वैध आत्मरक्षा बताया।
तेहरान ने 28 फरवरी को अमेरिका-इज़रायल द्वारा शुरू किए गए हमलों को संघर्ष की जड़ बताया, जिनमें पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु हुई।
ईरान ने खाड़ी देशों पर अमेरिका को लॉन्चपैड देने का आरोप लगाया और यूएन से हमलावरों को जवाबदेह ठहराने की माँग की।
यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सभी पक्षों से संयम बरतने और तत्काल वार्ता फिर से शुरू करने की अपील की।
बाघेई ने 1994 और 1999 के यूएन निर्देशों का हवाला देते हुए 'पर्सियन गल्फ' शब्द के इस्तेमाल पर ज़ोर दिया।

ईरान के विदेश मंत्रालय ने 13 जुलाई को खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव पर संयुक्त राष्ट्र के बयान को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरानी कार्रवाई कोई हमला नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत वैध आत्मरक्षा है। तेहरान ने 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल द्वारा शुरू किए गए हमलों को इस पूरे घटनाक्रम की जड़ बताया, जिनमें पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु हो गई थी।

ईरान का तर्क: हमलावर नहीं, आत्मरक्षा में जवाब देने वाला

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में स्पष्ट किया, "यह कोई 'सैन्य टकराव' नहीं है। यह 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल द्वारा शुरू किए गए खुलेआम और बिना उकसावे के हमले का सिलसिला है। ईरान 'हमला' नहीं करता है। दक्षिणी फारस की खाड़ी में मौजूद अमेरिकी सैन्य बेस और एसेट्स पर ईरान के हमले, अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सेल्फ-डिफेंस के उसके अंदरूनी अधिकार का एक सही और कानूनी इस्तेमाल है।"

बाघेई ने संयुक्त राष्ट्र पर एकतरफा रुख अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि ईरान पर संप्रभुता की रक्षा का इल्ज़ाम लगाना और हमलावरों को जवाबदेह न ठहराना बिल्कुल भी उचित नहीं है।

खाड़ी देशों पर आरोप: अमेरिका को लॉन्चपैड देने की इजाज़त

तेहरान ने अमेरिका पर खाड़ी देशों के क्षेत्रों को ईरान के विरुद्ध हमलों के लिए लॉन्चपैड के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। बाघेई ने यूएन को सीधे संबोधित करते हुए कहा, "आपको उन देशों से कहना चाहिए कि वे तुरंत अमेरिका को ईरान के खिलाफ हमले के लिए अपने इलाकों का इस्तेमाल लॉन्चपैड के तौर पर करने की इजाज़त देना बंद कर दें। ईरान पर अपनी संप्रभुता बचाने का इल्ज़ाम लगाना और हमलावरों को अंतरराष्ट्रीय कानून के उनके बड़े उल्लंघन के लिए जिम्मेदार न ठहराना, बिल्कुल भी सही नहीं है।"

'पर्सियन गल्फ' नामकरण पर ज़ोर

बाघेई ने इस मौके पर एक और मुद्दा उठाया — खाड़ी के नामकरण का। उन्होंने 18 अगस्त 1994 और 14 मई 1999 के यूएन निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि सभी संयुक्त राष्ट्र दस्तावेज़ों में इस जलक्षेत्र को 'पर्सियन गल्फ' ही लिखा जाना चाहिए। यह मुद्दा ईरान और कुछ अरब देशों के बीच दशकों पुराने विवाद से जुड़ा है।

संयुक्त राष्ट्र की अपील: तत्काल संयम और वार्ता

यह सारा घटनाक्रम तब सामने आया जब संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने खाड़ी में बढ़ते सैन्य टकराव पर गहरी चिंता व्यक्त की। इसमें होर्मुज़ स्ट्रेट में जहाज़ों पर ईरानी हमले, ईरान पर अमेरिकी हमले और पड़ोसी देशों में ईरानी कार्रवाइयाँ शामिल हैं।

यूएन महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने बयान में कहा, "यूएन चीफ ने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने, तनाव बढ़ाने वाली कार्रवाइयों से बचने और तनाव घटाने के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की है। ये सभी हमले बंद होने चाहिए। महासचिव ईरान और अमेरिका से अपील करते हैं कि वे तुरंत बातचीत फिर से शुरू करें और कूटनीति के ज़रिए बाकी मुद्दों को सुलझाएं।"

गौरतलब है कि यह संकट उस समय और गहरा हो गया है जब खाड़ी क्षेत्र में पहले से ही कई मोर्चों पर तनाव चरम पर है। आने वाले दिनों में कूटनीतिक पहलों की सफलता या विफलता इस टकराव की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिन पर बाघेई के बयान में कोई विस्तार नहीं है। यूएन की अपील भी उतनी ही कमज़ोर दिखती है जितनी पहले की संघर्षों में रही है — जब तक सुरक्षा परिषद में एकमत नहीं, महासचिव की अपील महज़ नैतिक दबाव बनकर रह जाती है। असली सवाल यह है कि क्या खाड़ी देश अमेरिकी उपस्थिति को सीमित करने का राजनीतिक जोखिम उठाएंगे — और इसका जवाब तेहरान के बयानों से नहीं, रियाद और अबू धाबी की चुप्पी से मिलेगा।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर हमलों को क्या बताया?
ईरान ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत वैध आत्मरक्षा बताया, न कि आक्रामकता। तेहरान का तर्क है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल ने पहले हमला किया, जिसमें पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु हुई, और ईरान की कार्रवाई उसी का जवाब है।
संयुक्त राष्ट्र ने खाड़ी संकट पर क्या कहा?
यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और तनाव बढ़ाने वाली कार्रवाइयों से बचने की अपील की। उन्होंने ईरान और अमेरिका दोनों से तत्काल वार्ता फिर से शुरू करने और कूटनीति के ज़रिए मुद्दे सुलझाने का आग्रह किया।
ईरान ने यूएन के रुख को गैर-जिम्मेदाराना क्यों बताया?
ईरान के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई के अनुसार, ईरान पर आरोप लगाना और साथ ही हमलावरों — अमेरिका और इज़रायल — को अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के लिए जवाबदेह न ठहराना एकतरफा और अनुचित रवैया है। उन्होंने यूएन से खाड़ी देशों को अमेरिकी लॉन्चपैड बनने से रोकने को कहा।
28 फरवरी की घटना क्या थी जिसका ईरान बार-बार हवाला दे रहा है?
ईरान के अनुसार 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल ने ईरान पर हमला किया, जिसमें पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु हुई। तेहरान इसी घटना को मौजूदा सैन्य टकराव का मूल कारण बताता है और इसे 'बिना उकसावे का हमला' कहता है।
'पर्सियन गल्फ' नामकरण विवाद क्या है और ईरान ने इसे क्यों उठाया?
ईरान इस जलक्षेत्र को 'पर्सियन गल्फ' कहता है, जबकि कुछ अरब देश इसे अलग नाम से पुकारते हैं। बाघेई ने 18 अगस्त 1994 और 14 मई 1999 के यूएन निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि सभी यूएन दस्तावेज़ों में 'पर्सियन गल्फ' शब्द का ही प्रयोग अनिवार्य है।
राष्ट्र प्रेस
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