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सीपीआई (एम) में सामूहिक नेतृत्व पर सवाल: बेबी की फुटबॉल टिप्पणी और पार्टी का आंतरिक संकट

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सीपीआई (एम) में सामूहिक नेतृत्व पर सवाल: बेबी की फुटबॉल टिप्पणी और पार्टी का आंतरिक संकट

सारांश

सीपीआई (एम) महासचिव एम.ए. बेबी ने केंद्रीय समिति में फुटबॉल का रूपक देकर सामूहिकता की याद दिलाई — लेकिन यही रूपक पार्टी के भीतर उठ रहे उस सवाल को और तेज़ कर गया कि क्या पार्टी खुद अपने सामूहिक सिद्धांतों पर खरी उतर रही है।

मुख्य बातें

बेबी ने 13 जुलाई को नई दिल्ली में सीपीआई (एम) की केंद्रीय समिति बैठक में फुटबॉल का उदाहरण देकर सामूहिक प्रयास की अहमियत पर जोर दिया।
बेबी ने 'बेंड इट लाइक बेकहम' का रूपक इस्तेमाल कर कहा कि नियमों में महारत हासिल करना और नियम तोड़ना अलग-अलग बात है।
रिपोर्टों के अनुसार, बैठक में कई नेताओं ने चुनावी हारों के लिए नेतृत्व की कठोर और केंद्रीकृत शैली को जिम्मेदार ठहराया।
बेबी स्वयं फुटबॉल प्रेमी हैं और कोलकाता में लियोनेल मेसी का मैच देख चुके हैं, जिससे उनका रूपक और अधिक प्रतीकात्मक बन गया।
पार्टी के भीतर यह सवाल उठ रहा है कि क्या सामूहिक नेतृत्व के नियम सभी नेताओं पर समान रूप से लागू होते हैं।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीआई (एम) के महासचिव एम.ए. बेबी ने सोमवार, 13 जुलाई को नई दिल्ली में पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक के दौरान फुटबॉल का एक विचारोत्तेजक उदाहरण दिया — कि जीत अकेले प्रतिभा से नहीं, बल्कि टीम के सामूहिक प्रयास से हासिल होती है। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब पार्टी के भीतर नेतृत्व शैली, निर्णयों के केंद्रीकरण और सामूहिक कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर आंतरिक बहस चल रही है।

बेबी की टिप्पणी और उसका संदर्भ

एम.ए. बेबी ने केंद्रीय समिति के साथियों को याद दिलाया कि फुटबॉल में कोई भी खिलाड़ी, चाहे वह कितना भी प्रतिभाशाली क्यों न हो, अकेले मैच नहीं जीत सकता। उन्होंने कहा कि जीत के लिए पूरी टीम के बीच भरोसा, तालमेल और साझा लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता अनिवार्य है।

गौरतलब है कि बेबी स्वयं फुटबॉल के प्रबल प्रशंसक रहे हैं। वह कुछ वर्ष पूर्व कोलकाता जाकर स्टार फुटबॉलर लियोनेल मेसी को खेलते हुए देख चुके हैं। ऐसे में उनकी यह टिप्पणी केवल एक खेल-रूपक नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर चल रही बहस पर एक सुचिंतित राजनीतिक संकेत के रूप में देखी जा रही है।

बेकहम का रूपक और पार्टी का असली सवाल

बेबी ने फुटबॉल की प्रसिद्ध कहावत 'बेंड इट लाइक बेकहम' का भी उल्लेख किया — जो इंग्लैंड के पूर्व कप्तान डेविड बेकहम की उस असाधारण क्षमता को दर्शाती है, जिसमें वह गेंद को घुमाकर शानदार शॉट लगाते थे, लेकिन हमेशा खेल के नियमों की सीमा के भीतर रहते हुए। यह मुहावरा नियमों को तोड़ने का नहीं, बल्कि उन्हें गहराई से समझकर उनमें महारत हासिल करने का प्रतीक है।

लेकिन इसी रूपक ने एक तीखा सवाल भी खड़ा कर दिया है — क्या सीपीआई (एम) अपने ही बनाए नियमों को किसी एक वरिष्ठ नेता के लिए लचीला बना रही है? यह सवाल पार्टी के भीतर और बाहर, दोनों जगह चर्चा का विषय बन गया है।

केंद्रीय समिति में उठे आंतरिक सवाल

रिपोर्टों के अनुसार, केंद्रीय समिति की इस बैठक में कई नेताओं ने हाल की चुनावी हारों के कारणों पर खुलकर चर्चा की। कथित तौर पर नेतृत्व की कठोर और केंद्रीकृत शैली, कार्यकर्ताओं के साथ संवाद की कमी और फैसलों में सामूहिकता के अभाव को प्रमुख कारणों के रूप में रेखांकित किया गया।

यह ऐसे समय में आया है जब कम्युनिस्ट राजनीति में सामूहिक नेतृत्व को वैचारिक आधारशिला माना जाता रहा है। पार्टी के अपने संविधान और परंपरा में व्यक्तिगत वर्चस्व के विरुद्ध स्पष्ट दिशानिर्देश हैं।

पार्टी के सामने खड़ी चुनौती

सीपीआई (एम) के सामने अब यह परीक्षा है कि वह अपने दशकों पुराने सामूहिक मूल्यों को व्यवहार में भी लागू कर पाती है या नहीं। क्या पार्टी के नियम सभी नेताओं के लिए एक समान रहेंगे, या वरिष्ठ नेताओं के लिए अलग मानदंड अपनाए जाएंगे — यह सवाल आने वाले समय में पार्टी की दिशा और विश्वसनीयता दोनों को प्रभावित कर सकता है।

बेबी की फुटबॉल टिप्पणी चाहे जितनी भी सहज लगे, पार्टी के भीतर उसकी गूंज लंबे समय तक सुनाई देती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस विरोधाभास को और उजागर करता है जिसे पार्टी टालना चाहती है। सीपीआई (एम) दशकों से सामूहिक नेतृत्व को अपनी वैचारिक पहचान बताती रही है, लेकिन केंद्रीय समिति की इस बैठक में जो आंतरिक आलोचनाएँ सामने आई हैं, वे बताती हैं कि सिद्धांत और व्यवहार के बीच की खाई चौड़ी होती जा रही है। किसी पार्टी के लिए सबसे बड़ा संकट वह नहीं होता जब विरोधी उस पर सवाल उठाएँ, बल्कि वह होता है जब उसके अपने नेता भीतर से यही सवाल पूछने लगें।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एम.ए. बेबी ने केंद्रीय समिति बैठक में फुटबॉल का उदाहरण क्यों दिया?
बेबी ने फुटबॉल का उदाहरण देकर यह संदेश दिया कि राजनीतिक सफलता भी व्यक्तिगत प्रतिभा से नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास और अनुशासन से मिलती है। यह टिप्पणी पार्टी के भीतर नेतृत्व की केंद्रीकृत शैली पर चल रही बहस के संदर्भ में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
'बेंड इट लाइक बेकहम' का सीपीआई (एम) की राजनीति से क्या संबंध है?
बेबी ने इस मुहावरे का उपयोग यह समझाने के लिए किया कि नियमों में दक्षता हासिल करना और नियमों को तोड़ना दो अलग-अलग बातें हैं। इसके ज़रिए उन्होंने परोक्ष रूप से यह सवाल उठाया कि क्या पार्टी अपने ही सामूहिक नियमों को किसी एक नेता के लिए मोड़ रही है।
सीपीआई (एम) की केंद्रीय समिति बैठक में क्या प्रमुख मुद्दे उठे?
रिपोर्टों के अनुसार, बैठक में कई नेताओं ने हाल की चुनावी हारों के लिए नेतृत्व की कठोर शैली, कार्यकर्ताओं से संवाद की कमी और फैसलों के अत्यधिक केंद्रीकरण को जिम्मेदार ठहराया। सामूहिक कार्यप्रणाली को फिर से मजबूत करने पर चर्चा हुई।
क्या सीपीआई (एम) में सामूहिक नेतृत्व का संकट नया है?
कम्युनिस्ट पार्टियों में सामूहिक नेतृत्व की परंपरा वैचारिक रूप से केंद्रीय रही है, लेकिन व्यवहार में व्यक्तिगत वर्चस्व बनाम सामूहिक निर्णय का तनाव समय-समय पर उभरता रहा है। मौजूदा बहस इस पुराने तनाव का नया अध्याय है।
इस विवाद का सीपीआई (एम) के भविष्य पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि पार्टी अपने सामूहिक मूल्यों और व्यावहारिक कार्यप्रणाली के बीच की खाई को नहीं पाट पाई, तो इसका असर कार्यकर्ताओं के मनोबल और चुनावी प्रदर्शन दोनों पर पड़ सकता है। आने वाले समय में पार्टी की दिशा इसी सवाल के जवाब पर निर्भर करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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