इनविट्स के ज़रिए ₹40,000 करोड़ की एसेट मोनेटाइजेशन की राह पर रोड इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियाँ, FY27 में 10,000 km हाईवे आवंटन का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
भारत की प्रमुख रोड इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियाँ वित्त वर्ष 2026-27 में इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvITs) के माध्यम से लगभग ₹40,000 करोड़ की परिसंपत्ति मोनेटाइजेशन करने की तैयारी में हैं। ब्रिकवर्क रेटिंग्स की 13 जुलाई को जारी रिपोर्ट के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य पूँजी जुटाना, कर्ज का बोझ घटाना और आगामी परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन सुनिश्चित करना है।
मुख्य घटनाक्रम
रिपोर्ट के मुताबिक, इस वित्त वर्ष में सरकार के निरंतर निवेश के बल पर 10,000 किलोमीटर नए हाईवे, एक्सप्रेसवे और हाई-स्पीड कॉरिडोर परियोजनाओं के आवंटन का लक्ष्य भी रखा गया है। सड़क अवसंरचना क्षेत्र की कंपनियाँ पहले से संचालित (ऑपरेशनल) सड़क परिसंपत्तियों को InvITs के ज़रिए मोनेटाइज़ करके नकदी प्रवाह (लिक्विडिटी) बढ़ाने, पुराना कर्ज चुकाने और नई परियोजनाओं में पूँजी लगाने की रणनीति अपना रही हैं।
गौरतलब है कि InvITs एक ऐसा वित्तीय ढाँचा है जो कंपनियों को अपनी परिपक्व परिसंपत्तियाँ निवेशकों को हस्तांतरित कर नई परियोजनाओं के लिए पूँजी मुक्त करने की सुविधा देता है — यह मॉडल पिछले कुछ वर्षों में भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में तेज़ी से लोकप्रिय हुआ है।
वित्तीय प्रदर्शन का अनुमान
ब्रिकवर्क रेटिंग्स के आकलन के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में इस क्षेत्र की राजस्व वृद्धि 8.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2026 में यह 7.3 प्रतिशत रहने की संभावना है। ऑपरेटिंग मार्जिन 24.3 प्रतिशत से बढ़कर 25.1 प्रतिशत तक पहुँच सकता है।
इस सुधार के पीछे मुख्य कारण परियोजनाओं का तेज़ क्रियान्वयन और स्टील व बिटुमेन की कीमतों में आई गिरावट बताई जा रही है। इसके साथ ही, चालू हाईवे पर यातायात (ट्रैफिक) बढ़ने से टोल राजस्व में वृद्धि होगी, जिससे निश्चित लागत (फिक्स्ड कॉस्ट) अधिक राजस्व पर वितरित होगी और परिचालन दक्षता में सुधार आएगा।
क्रेडिट प्रोफाइल और चुनौतियाँ
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में इस क्षेत्र की क्रेडिट प्रोफाइल स्थिर बनी रहने की उम्मीद है। इसकी वजह मज़बूत टोल कलेक्शन, परियोजनाओं की स्वस्थ पाइपलाइन और नए वित्तपोषण मॉडलों को तेज़ी से अपनाया जाना है।
हालाँकि, रिपोर्ट ने यह भी रेखांकित किया है कि डेट सर्विस कवरेज रेशियो वित्त वर्ष 2026 और 2027 दोनों में लगभग 0.5 गुना रहने का अनुमान है, जो कर्ज चुकाने की क्षमता पर दबाव दर्शाता है। वहीं, इंटरेस्ट कवरेज रेशियो 1.3 गुना से बढ़कर 1.5 गुना तक पहुँच सकता है।
क्षेत्र के सामने बड़े जोखिम
रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि राज्य सरकारों की परियोजनाओं में भुगतान में देरी, लंबा रिसीवेबल साइकिल और आक्रामक बोली (एग्रेसिव बिडिंग) जैसी चुनौतियाँ अब भी इस क्षेत्र के सामने बनी हुई हैं। बेहतर कमाई के बावजूद, ये कारक डेट सर्विसिंग को एक बड़ी चुनौती बनाए रख सकते हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) के तहत सड़क निर्माण को प्राथमिकता दे रही है। आगामी तिमाहियों में InvITs बाज़ार की प्रतिक्रिया और परियोजनाओं के क्रियान्वयन की गति इस क्षेत्र की दीर्घकालिक वित्तीय सेहत तय करेगी।