शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर में 2037 तक ₹80 लाख करोड़ निवेश की दरकार, ब्रिकवर्क रेटिंग्स की रिपोर्ट में खुलासा

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शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर में 2037 तक ₹80 लाख करोड़ निवेश की दरकार, ब्रिकवर्क रेटिंग्स की रिपोर्ट में खुलासा

सारांश

ब्रिकवर्क रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार भारत को 2037 तक शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर में ₹80 लाख करोड़ चाहिए — और सरकार का ₹1 लाख करोड़ का UCF इस खाई को पाटने की कोशिश है। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या छोटे शहर बाज़ार से पैसा जुटाने में सक्षम होंगे।

मुख्य बातें

भारत को 2037 तक शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर में ₹80 लाख करोड़ के निवेश की आवश्यकता: ब्रिकवर्क रेटिंग्स रिपोर्ट।
2036 तक भारत की जीडीपी में शहरी क्षेत्रों का योगदान लगभग 70 प्रतिशत होने का अनुमान।
केंद्र सरकार का ₹1 लाख करोड़ का अर्बन चैलेंज फंड (UCF) पाँच वर्षों में ₹4 लाख करोड़ निवेश जुटाने का लक्ष्य रखता है।
ULB को केंद्रीय सहायता से पहले परियोजना वित्त का 50% बांड, ऋण या PPP से जुटाना होगा।
वित्त वर्ष 2018 से अब तक केवल 17 शहरों ने ₹4,540 करोड़ के नगरपालिका बांड जारी किए।
UCF की ₹5,000 करोड़ की क्रेडिट रिपेमेंट गारंटी योजना छोटे ULB के लिए निवेशक विश्वास बढ़ाने में सहायक होगी।

भारत को तेज़ रफ़्तार शहरीकरण और आर्थिक विस्तार को संभालने के लिए 2037 तक शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर में ₹80 लाख करोड़ के निवेश की आवश्यकता होगी। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ब्रिकवर्क रेटिंग्स (BWR) की 15 मई 2026 को जारी रिपोर्ट में यह अनुमान सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2036 तक भारत की जीडीपी में शहरी क्षेत्रों का योगदान लगभग 70 प्रतिशत तक पहुँचने की संभावना है, जो सतत शहरी वित्तपोषण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाता है।

अर्बन चैलेंज फंड: वित्तपोषण मॉडल में बड़ा बदलाव

रिपोर्ट में केंद्र सरकार के ₹1 लाख करोड़ के अर्बन चैलेंज फंड (UCF) को भारत के शहरी विकास वित्तपोषण में एक निर्णायक मोड़ बताया गया है। यह योजना परंपरागत अनुदान-आधारित कार्यक्रम से हटकर बाज़ार-आधारित ढाँचे की ओर बढ़ रही है। इसका लक्ष्य पाँच वर्षों में लगभग ₹4 लाख करोड़ का कुल शहरी निवेश जुटाना है।

इस मॉडल के तहत, शहरी स्थानीय निकायों (ULB) को केंद्रीय सहायता प्राप्त करने से पहले नगरपालिका बांड, बैंक ऋण या सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के ज़रिये परियोजना वित्तपोषण का कम से कम 50 प्रतिशत स्वयं जुटाना होगा। सरकार परियोजना लागत का 25 प्रतिशत वहन करेगी, जबकि शेष राशि राज्यों और ULB द्वारा वित्तपोषित की जाएगी।

क्रेडिट रेटिंग और जोखिम: BWR की चेतावनी

ब्रिकवर्क रेटिंग्स ने UCF के कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण जोखिमों की ओर ध्यान दिलाया है। रिपोर्ट में बाज़ार वित्तपोषण प्राप्त करने के लिए ULB की क्रेडिट रेटिंग की अहमियत पर ज़ोर दिया गया है। यद्यपि बैंक ऋणों के लिए औपचारिक रेटिंग अनिवार्य नहीं है, तथापि रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि केवल संस्थागत ऋण पर निर्भरता शहरों को राज्य की गारंटी पर आश्रित रखती है और वित्तपोषण विविधीकरण को सीमित करती है।

नगरपालिका बांड बाज़ार: अप्रयुक्त अवसर

ब्रिकवर्क रेटिंग्स के सीईओ मनु सहगल ने कहा, 'UCF भारत के नगरपालिका वित्त पारिस्थितिकी तंत्र को काफी मजबूत कर सकता है, विशेष रूप से नगरपालिका बांड बाज़ार में भागीदारी बढ़ाकर।' उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2018 से अब तक केवल 17 शहरों ने ₹4,540 करोड़ के नगरपालिका बांड जारी किए हैं, जो इस क्षेत्र में मौजूद विशाल अप्रयुक्त वित्तपोषण अवसर को रेखांकित करता है।

सहगल ने आगे कहा कि UCF के तहत शुरू की गई ₹5,000 करोड़ की क्रेडिट रिपेमेंट गारंटी योजना छोटे ULB को पहली बार लिए गए ऋणों पर गारंटी देकर निवेशकों का विश्वास बढ़ा सकती है, जिससे उधारदाताओं और निवेशकों के लिए निवेश-योग्य क्षेत्र का विस्तार होगा।

आम जनता और शहरों पर असर

यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब भारत के शहरों पर जनसंख्या दबाव लगातार बढ़ रहा है और बुनियादी ढाँचे की कमियाँ — परिवहन, जल आपूर्ति, सीवेज और आवास — नागरिकों के जीवन स्तर को प्रभावित कर रही हैं। गौरतलब है कि यह मॉडल अनुशासन, पारदर्शिता और साख को मज़बूत करने का लक्ष्य रखता है, लेकिन छोटे और वित्तीय रूप से कमज़ोर ULB के लिए बाज़ार से धन जुटाना एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, UCF की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि राज्य सरकारें ULB को वित्तीय स्वायत्तता और क्षमता विकास में कितना सहयोग देती हैं। क्रियान्वयन की गति और पारदर्शिता इस महत्वाकांक्षी शहरी वित्तपोषण प्रयोग की असली कसौटी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन छोटे शहरों को यह ढाँचा और हाशिये पर धकेल सकता है। वित्त वर्ष 2018 से केवल 17 शहरों का नगरपालिका बांड जारी करना यही बताता है कि बाज़ार-आधारित शहरी वित्त अभी भी एक विशिष्ट वर्ग का खेल है। जब तक ULB की राजस्व क्षमता और स्वायत्तता नहीं बढ़ती, UCF एक और महत्वाकांक्षी नीतिगत दस्तावेज़ बनकर रह सकता है।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत को 2037 तक शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर में कितने निवेश की ज़रूरत है?
ब्रिकवर्क रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार भारत को 2037 तक शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर में ₹80 लाख करोड़ के निवेश की आवश्यकता होगी। यह अनुमान तेज़ शहरीकरण और इस तथ्य पर आधारित है कि 2036 तक शहरी क्षेत्र जीडीपी में लगभग 70% योगदान देंगे।
अर्बन चैलेंज फंड (UCF) क्या है और यह कैसे काम करता है?
UCF केंद्र सरकार का ₹1 लाख करोड़ का शहरी वित्तपोषण कार्यक्रम है, जिसका लक्ष्य पाँच वर्षों में ₹4 लाख करोड़ का कुल शहरी निवेश जुटाना है। इसके तहत ULB को केंद्रीय सहायता से पहले परियोजना लागत का 50% बांड, बैंक ऋण या PPP से जुटाना होगा, जबकि सरकार 25% वहन करेगी।
नगरपालिका बांड बाज़ार की स्थिति भारत में क्या है?
वित्त वर्ष 2018 से अब तक केवल 17 भारतीय शहरों ने ₹4,540 करोड़ के नगरपालिका बांड जारी किए हैं। ब्रिकवर्क रेटिंग्स के अनुसार यह आँकड़ा इस क्षेत्र में मौजूद विशाल अप्रयुक्त वित्तपोषण अवसर को दर्शाता है।
छोटे शहरी स्थानीय निकायों (ULB) के लिए UCF में क्या प्रावधान है?
UCF के तहत ₹5,000 करोड़ की क्रेडिट रिपेमेंट गारंटी योजना शुरू की गई है, जो छोटे ULB को पहली बार लिए गए ऋणों पर गारंटी देकर निवेशकों का विश्वास बढ़ाएगी। हालाँकि, ब्रिकवर्क रेटिंग्स ने चेतावनी दी है कि केवल संस्थागत ऋण पर निर्भरता शहरों को राज्य की गारंटी पर आश्रित रखती है।
UCF के कार्यान्वयन में क्या प्रमुख जोखिम हैं?
ब्रिकवर्क रेटिंग्स ने UCF के कार्यान्वयन में कई महत्वपूर्ण जोखिम चिह्नित किए हैं। बाज़ार वित्तपोषण के लिए ULB की क्रेडिट रेटिंग अनिवार्य नहीं है, जिससे वित्तपोषण विविधीकरण सीमित रह सकता है और छोटे शहर राज्य गारंटी पर निर्भर बने रह सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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