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क्या वित्त वर्ष 2021-25 के दौरान भारत का वास्तविक निवेश औसतन 6.9 प्रतिशत बढ़ा?

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क्या वित्त वर्ष 2021-25 के दौरान भारत का वास्तविक निवेश औसतन 6.9 प्रतिशत बढ़ा?

सारांश

वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच भारत का वास्तविक निवेश औसत 6.9 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ा, जो जीडीपी की वृद्धि दर से अधिक है। यह रिपोर्ट क्रिसिल द्वारा जारी की गई है, जिसमें सरकारी और घरेलू खर्च का योगदान भी बताया गया है। जानिए और क्या कहती है यह रिपोर्ट।

मुख्य बातें

वास्तविक निवेश में औसतन 6.9 प्रतिशत की वृद्धि।
सरकारी और घरेलू खर्च का महत्वपूर्ण योगदान ।
निजी कॉर्पोरेट पूंजीगत व्यय की वृद्धि दर 8.7 प्रतिशत ।
राजकोषीय समेकन के कारण निवेश में कमी का संकेत।
वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत है।

नई दिल्ली, 25 अगस्त (राष्ट्र प्रेस) । वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच भारत का वास्तविक निवेश औसतन 6.9 प्रतिशत वार्षिक दर से बढ़ा, जो इसी अवधि में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की 5.4 प्रतिशत वृद्धि दर से अधिक है।

क्रिसिल की 'द रोड अहेड फॉर इंवेस्टमेंट' शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025 में भारत की निवेश दर दशकीय औसत से अधिक रही, जिसे मुख्य रूप से सरकारी और घरेलू खर्च का समर्थन प्राप्त था।

रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है, "वित्त वर्ष 2021-25 के दौरान भारत का वास्तविक निवेश 6.9 प्रतिशत प्रति वर्ष (औसत वास्तविक वृद्धि) बढ़ा, जो 5.4 प्रतिशत सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर से अधिक है।"

सकल स्थिर पूंजी निर्माण के रूप में मापा गया निवेश, वित्त वर्ष 2016 और 2025 के बीच औसत की तुलना में नॉमिनल और रियल दोनों ही रूपों में मजबूत रहा।

सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) ने इस गति को काफी हद तक आगे बढ़ाया, जिनकी संयुक्त वास्तविक निवेश वृद्धि वित्त वर्ष 2022-24 में औसतन 13.9 प्रतिशत रही।

सबसे बड़े योगदानकर्ता, परिवारों ने भी मजबूत निवेश गतिविधि देखी, मुख्यतः रियल एस्टेट में, जिसकी वृद्धि दर इसी अवधि में 13.4 प्रतिशत रही।

हालांकि, निजी कॉर्पोरेट पूंजीगत व्यय कमजोर कड़ी बना रहा, जिसने वित्त वर्ष 2022-24 में वास्तविक रूप से केवल 8.7 प्रतिशत की वृद्धि दिखाई।

क्रिसिल ने कहा कि जहां कॉर्पोरेट बैलेंस शीट मज़बूत हैं और बैंक ऋण देने की बेहतर स्थिति में हैं, वहीं अमेरिकी टैरिफ और ग्लोबल ट्रेड फ्रिक्शन जैसी बाहरी चुनौतियों ने बिजनेस सेंटीमेंट को कमजोर कर दिया है।

भविष्य को देखते हुए, क्रिसिल ने आगाह किया कि राजकोषीय समेकन के कारण मध्यम अवधि में सरकार के नेतृत्व वाले निवेश में कमी आ सकती है।

गति बनाए रखने के लिए, रिपोर्ट में नियामक बाधाओं को कम करने, भूमि और बिजली को अधिक किफायती बनाने, अनुबंध प्रवर्तन को मजबूत करने और टैरिफ बाधाओं को कम करने तथा निवेशकों के लिए स्थिरता प्रदान करने हेतु मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) को तेज करने की सिफारिश की गई है।

रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, भारत की घरेलू परिस्थितियां जैसे - स्वस्थ बैंक बैलेंस शीट, मजबूत उपभोग और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोत्साहन दीर्घकालिक निवेश वृद्धि के लिए सहायक बनी हुई हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

मैं यह कहना चाहूंगा कि भारत की आर्थिक वृद्धि में निवेश एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सरकार की नीतियों और घरेलू खर्चों के साथ, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि निवेश की गति बनी रहे। हमें बाहरी चुनौतियों का सामना करते हुए, अपने आर्थिक आधार को और मजबूत करना चाहिए।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का वास्तविक निवेश औसतन कितना बढ़ा?
वित्त वर्ष 2021-25 के बीच भारत का वास्तविक निवेश औसतन 6.9 प्रतिशत बढ़ा।
इस रिपोर्ट में क्या प्रमुख कारक बताए गए हैं?
रिपोर्ट में सरकारी और घरेलू खर्च का योगदान महत्वपूर्ण बताया गया है।
निजी कॉर्पोरेट पूंजीगत व्यय की वृद्धि दर क्या है?
निजी कॉर्पोरेट पूंजीगत व्यय की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2022-24 में केवल 8.7 प्रतिशत रही।
आने वाले समय में निवेश की गति पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
राजकोषीय समेकन के कारण मध्यम अवधि में सरकार के नेतृत्व वाले निवेश में कमी आ सकती है।
क्रिसिल की रिपोर्ट में कौन सी सिफारिशें की गई हैं?
नियामक बाधाओं को कम करने, भूमि और बिजली को अधिक किफायती बनाने, और एफटीए को तेज करने की सिफारिश की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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