कैबिनेट ने पश्चिम बंगाल और झारखंड के लिए 4,474 करोड़ रुपए के दो मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी
सारांश
Key Takeaways
- 4,474 करोड़ रुपए की लागत से दो मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएं स्वीकृत।
- पश्चिम बंगाल और झारखंड के 5 जिलों को लाभ होगा।
- 2030-31 तक परियोजनाओं का पूरा होना।
- क्षेत्र के 5,652 गांवों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।
- परियोजनाएं प्रधानमंत्री-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत।
नई दिल्ली, 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। रेलवे कनेक्टिविटी को मजबूती प्रदान करने हेतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (सीसीईए) ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल और झारखंड में 4,474 करोड़ रुपए की लागत वाले दो मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी है।
इन परियोजनाओं में सैंथिया-पाकुर चौथी लाइन और संतरागाछी-खड़गपुर चौथी लाइन शामिल हैं, जो पश्चिम बंगाल और झारखंड के 5 जिलों को कवर करेंगी, जिससे भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में 192 किलोमीटर की वृद्धि होगी।
2030-31 तक पूरा होने वाली इन स्वीकृत परियोजनाओं से लगभग 5,652 गांवों को बेहतर कनेक्टिविटी प्राप्त होगी, जिनकी कुल आबादी लगभग 1.47 करोड़ है।
इन परियोजनाओं से देश के विभिन्न प्रमुख पर्यटन स्थलों, जैसे कि बोलपुर-शांतिनिकेतन, नंदिकेश्वरी मंदिर (शक्तिपीठ), तारापीठ (शक्तिपीठ), पटाचित्र ग्राम, धडिका वन, भीमबंध वन्यजीव अभ्यारण्य, रामेश्वर कुंड आदि के लिए रेल संपर्क में सुधार होगा।
बढ़ी हुई रेल क्षमता से आवागमन में वृद्धि होगी, जिससे भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में सुधार होगा। ये मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएं परिचालन को सुगम बनाने और भीड़भाड़ को कम करने के लिए तैयार की गई हैं।
सीसीईए के अनुसार, "ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री मोदी के 'नए भारत' के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं, जो क्षेत्र के लोगों को व्यापक विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाएंगी और उनके रोजगार/स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ाएंगी।"
बयान में यह भी कहा गया है कि स्वीकृत परियोजनाएं कोयला, पत्थर, डोलोमाइट, सीमेंट, स्लैग, जिप्सम, लोहा, इस्पात, खाद्यान्न, पीओएल, कंटेनर आदि की वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्यक मार्ग हैं।
इससे जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी और देश की लॉजिस्टिक्स लागत को कम किया जा सकेगा।
ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत बनाई गई हैं, जिसमें एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श से बहु-मोडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ाने पर जोर दिया गया है।