भारत की 2047 की ₹30-35 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था में मैन्युफैक्चरिंग हब की 25%25 की भूमिका

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भारत की 2047 की ₹30-35 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था में मैन्युफैक्चरिंग हब की 25%25 की भूमिका

सारांश

भारत का निर्माण महत्वाकांक्षा 2047 तक ₹30-35 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लिए एक नई रणनीति ले रहा है। एकीकृत औद्योगिक केंद्रों, ₹12.2 लाख करोड़ के बुनियादी ढाँचे निवेश और 25%25 GDP हिस्सेदारी के साथ, सरकार वैश्विक निर्माण नेतृत्व की ओर एक संरचनात्मक बदलाव ला रही है।

Key Takeaways

  • भारत 2047 तक ₹30-35 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखता है, जिसमें GDP का 25%25 मैन्युफैक्चरिंग से आएगा।
  • केंद्रीय पूंजीगत व्यय FY 2014-15 में ₹2 लाख करोड़ से बढ़कर FY 2026-27 में ₹12.2 लाख करोड़ हो गया है।
  • 7.47 करोड़ MSME मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन का 35.4%25 योगदान देते हैं और रोज़गार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • मध्यम और उच्च प्रौद्योगिकी गतिविधियाँ कुल मैन्युफैक्चरिंग मूल्य-संवर्धन का 46.3%25 हैं।
  • 2026-27 बजट में तीन रासायनिक पार्क, सात PM MITRA पार्क और ₹10,000 करोड़ की बायोफार्मा शक्ति पहल शामिल है।

भारत को 2047 तक ₹30-35 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में रूपांतरित करने के लिए मैन्युफैक्चरिंग हब एक केंद्रीय भूमिका निभाएंगे। केंद्र सरकार की एक आधिकारिक फैक्ट-शीट के अनुसार, इस अवधि में देश की GDP में मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी वर्तमान 16-17%25 से बढ़कर कम से कम 25%25 हो जाएगी। यह लक्ष्य एकीकृत औद्योगिक केंद्रों, बेहतर कनेक्टिविटी और प्रणाली-स्तरीय बुनियादी ढाँचे के विकास पर निर्भर है।

एकीकृत मैन्युफैक्चरिंग केंद्र: रणनीति का मूल

सरकार की नई दृष्टि एकीकृत मैन्युफैक्चरिंग केंद्रों के विकास पर केंद्रित है, जो भौतिक बुनियादी ढाँचा, नियामक सहायता, साझा सुविधाएँ और कनेक्टिविटी को एक ही स्थान पर संयोजित करते हैं। ये क्षेत्रीय पारिस्थितिकी तंत्र लेन-देन लागत को कम करने, बड़े पैमाने पर उत्पादन को सुविधाजनक बनाने और दीर्घकालिक औद्योगिक गतिविधियों को सुदृढ़ करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। यह परिवर्तन व्यक्तिगत परियोजनाओं से हटकर समग्र प्रणाली-स्तरीय नियोजन की ओर एक संरचनात्मक बदलाव दर्शाता है।

बुनियादी ढाँचे में निवेश का तेज़ होना

केंद्रीय पूंजीगत व्यय में नाटकीय वृद्धि इस प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। वित्त वर्ष 2014-15 में ₹2 लाख करोड़ से शुरू होकर, यह वित्त वर्ष 2026-27 में ₹12.2 लाख करोड़ तक पहुँच गया है — छह गुना से अधिक की वृद्धि। यह निवेश दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा (DMIC), चेन्नई-बेंगलुरु औद्योगिक गलियारा (CBIC), अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारा (AKIC) और विशाखापत्तनम-चेन्नई औद्योगिक गलियारा (VCIC) जैसी परियोजनाओं को समर्थन देता है, जो क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और एकीकृत योजना को सुविधाजनक बनाते हैं।

वैश्विक निर्माण गंतव्य के रूप में भारत का उदय

वैश्विक निवेश प्रवाह भारत को एक प्राथमिक मैन्युफैक्चरिंग केंद्र के रूप में पुष्टि कर रहे हैं। भारत वर्तमान में विश्व स्तर पर तीसरा सबसे अधिक मांग वाला मैन्युफैक्चरिंग गंतव्य है। इसके अतिरिक्त, मध्यम और उच्च प्रौद्योगिकी गतिविधियाँ कुल मैन्युफैक्चरिंग मूल्य-संवर्धन का 46.3%25 प्रतिनिधित्व करती हैं, जो अधिक परिष्कृत औद्योगिक संरचनाओं की ओर एक क्रमिक संक्रमण को दर्शाता है। यह संरचनात्मक उन्नयन भारत की निर्माण प्रोफ़ाइल को सरल श्रम-गहन कार्यों से दूर ले जा रहा है।

MSME क्षेत्र का महत्व

लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र, जिसमें 7.47 करोड़ उद्यम हैं, मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन का 35.4%25 का योगदान देते हैं और देशव्यापी औद्योगिक केंद्रों की रीढ़ हैं। यह श्रम-प्रधान क्षेत्र रोज़गार सृजन और आर्थिक गतिविधि में एक महत्वपूर्ण चालक है, विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में।

2026-27 बजट में नई पहल

केंद्रीय बजट 2026-27 में विकास को त्वरित करने के लिए कई नई पहलें शामिल की गई हैं: तीन रासायनिक पार्क, सात PM MITRA पार्क, MSME क्लस्टर विकास और ₹10,000 करोड़ की बायोफार्मा शक्ति पहल। ये निवेश विशेष रूप से उच्च-मूल्य, उच्च-कौशल वाली गतिविधियों को आकर्षित करने के लिए लक्षित हैं।

आगे की राह

गौरतलब है कि यह रणनीति 2014 के बाद से भारत की औद्योगिक नीति में एक महत्वपूर्ण विकास दर्शाती है। व्यक्तिगत प्रोत्साहन से दूर जाकर, सरकार अब क्षेत्रीय पारिस्थितिकी तंत्र, सीमा पार कनेक्टिविटी और दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता पर ध्यान केंद्रित कर रही है। यह परिवर्तन यदि प्रभावी ढंग से कार्यान्वित किया जाए, तो भारत को 2047 तक एक वैश्विक निर्माण शक्ति के रूप में स्थापित करने की संभावना रखता है।

Point of View

लेकिन कार्यान्वयन की गति और प्रभावशीलता अभी तक अनुमानित है। गौरतलब है कि भारत की मैन्युफैक्चरिंग हिस्सेदारी एक दशक से 16-17%25 पर रुकी है, जो संरचनात्मक बाधाओं का संकेत देती है। नई रणनीति MSME क्षेत्र पर निर्भर करती है, जो 35.4%25 का योगदान देता है, लेकिन यदि बड़े निगमों को आकर्षित नहीं किया जा सके तो 25%25 का लक्ष्य दूर रह सकता है। औद्योगिक गलियारे और पार्कों का विकास सही दिशा है, परंतु बिना कुशल श्रम, विद्युत स्थिरता और नियामक गति के, ये बुनियादी ढाँचे अधूरे पड़ सकते हैं।
NationPress
29/04/2026

Frequently Asked Questions

भारत 2047 तक अपनी अर्थव्यवस्था में मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी कितनी बढ़ाना चाहता है?
भारत मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी को वर्तमान 16-17%25 से बढ़ाकर कम से कम 25%25 करना चाहता है। यह परिवर्तन 2047 तक ₹30-35 ट्रिलियन डॉलर की कुल अर्थव्यवस्था प्राप्त करने की रणनीति का हिस्सा है।
एकीकृत मैन्युफैक्चरिंग केंद्र क्या हैं और वे कैसे काम करते हैं?
ये क्षेत्रीय पारिस्थितिकी तंत्र हैं जो भौतिक बुनियादी ढाँचा, नियामक सहायता, साझा सुविधाएँ और कनेक्टिविटी को एक ही स्थान पर संयोजित करते हैं। ये लेन-देन लागत को कम करने, बड़े पैमाने पर उत्पादन को सुविधाजनक बनाने और दीर्घकालिक औद्योगिक गतिविधियों को सुदृढ़ करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
2026-27 के बजट में मैन्युफैक्चरिंग के लिए क्या नई पहलें शामिल की गई हैं?
2026-27 के बजट में तीन रासायनिक पार्क, सात PM MITRA पार्क, MSME क्लस्टर विकास और ₹10,000 करोड़ की बायोफार्मा शक्ति पहल शामिल की गई है। ये पहलें विशेष रूप से उच्च-मूल्य, उच्च-कौशल वाली गतिविधियों को आकर्षित करने के लिए लक्षित हैं।
MSME क्षेत्र मैन्युफैक्चरिंग में कितना महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है?
MSME क्षेत्र, जिसमें 7.47 करोड़ उद्यम हैं, मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन का 35.4%25 का योगदान देते हैं और देशव्यापी औद्योगिक केंद्रों की रीढ़ हैं। यह श्रम-प्रधान क्षेत्र रोज़गार सृजन और आर्थिक गतिविधि में एक महत्वपूर्ण चालक है।
भारत विश्व में मैन्युफैक्चरिंग के मामले में कहाँ खड़ा है?
भारत वर्तमान में विश्व स्तर पर तीसरा सबसे अधिक मांग वाला मैन्युफैक्चरिंग गंतव्य है। इसके अतिरिक्त, मध्यम और उच्च प्रौद्योगिकी गतिविधियाँ कुल मैन्युफैक्चरिंग मूल्य-संवर्धन का 46.3%25 प्रतिनिधित्व करती हैं, जो अधिक परिष्कृत औद्योगिक संरचनाओं की ओर एक क्रमिक संक्रमण को दर्शाता है।
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