महाराष्ट्र राज्यपाल ने जेजीयू की एआई गवर्नेंस रिपोर्ट 2026 जारी की, शिक्षा में नैतिक नवाचार पर जोर
सारांश
राज्यपाल वर्मा का संदेश स्पष्ट था: एआई तकनीक से अधिक मानवीय मूल्य है। जेजीयू की नई रिपोर्ट शिक्षा संस्थानों को दिखाती है कि कैसे करुणा, पारदर्शिता और भारतीय सांस्कृतिक विचारधारा के साथ डिजिटल परिवर्तन को आगे बढ़ाया जाए — न कि केवल तकनीकी क्षमता के लिए, बल्कि सामाजिक कल्याण के लिए।
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने 27 अप्रैल 2026 को ओ.पी.
जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी की एआई गवर्नेंस रिपोर्ट 2026 जारी की।
राज्यपाल ने एआई के उपयोग को करुणा, सहानुभूति और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के साथ जोड़ने पर जोर दिया।
जेजीयू के संस्थापक कुलपति प्रो.
राज कुमार ने एआई को संस्थागत शासन में बौद्धिक नेतृत्व के रूप में देखने की बात की।
रिपोर्ट में उच्च शिक्षा में अगमेंटेड रियलिटी, वर्चुअल रियलिटी और डिजिटल ट्विन्स जैसी इमर्सिव तकनीकों के चरणबद्ध एकीकरण की सिफारिश की गई।
पैनल चर्चा में सिरिल श्रॉफ, रॉनी स्क्रूवाला और प्रमुख कानून व प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ शामिल रहे।
मुंबई, 27 अप्रैल 2026। महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी (जेजीयू) की एआई गवर्नेंस रिपोर्ट 2026 को राष्ट्रीय संगोष्ठी में जारी किया, जिसमें उच्च शिक्षा संस्थानों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दायित्वपूर्ण एकीकरण पर बल दिया गया। वर्मा ने संस्थागत शासन में एआई के उपयोग को मानवीय मूल्यों और सामाजिक सहानुभूति के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।
राज्यपाल का दृष्टिकोण
अपने संबोधन में राज्यपाल वर्मा ने कहा,
संपादकीय दृष्टिकोण
बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों के वाहक के रूप में देख रही है। राज्यपाल के जोर पर गौर करें: 'उद्देश्यहीन तकनीक खतरनाक होती है।' यह भारतीय संदर्भ में विशेष रूप से प्रासंगिक है, जहाँ शिक्षा केवल कौशल नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण की परंपरा रही है। हालांकि, रिपोर्ट का असली परीक्षण क्रियान्वयन में होगा — क्या संस्थान वास्तव में एआई-सक्षम सिमुलेशन और इमर्सिव सीखने को चरणबद्ध तरीके से अपनाएंगे, या यह घोषणा अन्य शिक्षा सुधार पहलों की तरह कागजों तक सीमित रहेगी? भारत के शीर्ष विश्वविद्यालयों में डिजिटल परिवर्तन की गति अभी तक धीमी रही है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जेजीयू की एआई गवर्नेंस रिपोर्ट 2026 क्या है?
यह ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी द्वारा तैयार एक व्यापक ढांचा है जो उच्च शिक्षा संस्थानों को दिखाता है कि कैसे एआई को शिक्षा, शोध और संस्थागत प्रबंधन में नैतिकता और सांस्कृतिक मूल्यों के साथ एकीकृत किया जाए। रिपोर्ट सीखने के अनुभव के केंद्र में मानवीय निर्णय क्षमता, रचनात्मकता और स्वतंत्रता को बनाए रखने पर जोर देती है।
राज्यपाल वर्मा ने एआई के उपयोग के बारे में क्या कहा?
राज्यपाल ने कहा कि एआई का उपयोग करुणा, सहानुभूति और सामाजिक कल्याण के साथ किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि 'उद्देश्यहीन तकनीक खतरनाक होती है' और भारतीय कला, संस्कृति तथा विचारधारा को सुरक्षित रखना राष्ट्रीय पहचान के लिए महत्वपूर्ण है।
रिपोर्ट में शिक्षा में कौन-सी नई तकनीकें सुझाई गई हैं?
रिपोर्ट में अगमेंटेड रियलिटी (AR), वर्चुअल रियलिटी (VR), डिजिटल ट्विन्स और एआई-सक्षम ट्यूटरिंग सिस्टम जैसी इमर्सिव तकनीकों को उच्च शिक्षा का अगला बड़ा चरण बताया गया है। इन्हें चुनिंदा कार्यक्रमों में चरणबद्ध तरीके से लागू करने की सिफारिश की गई है, जहाँ अनुभवात्मक शिक्षा अधिक महत्वपूर्ण है।
प्रो. सी. राज कुमार ने एआई गवर्नेंस के बारे में क्या कहा?
संस्थापक कुलपति ने कहा कि जेजीयू के लिए एआई से जुड़ना केवल तकनीकी अनुकूलन नहीं, बल्कि बौद्धिक नेतृत्व और नैतिक जिम्मेदारी का विषय है। उन्होंने शिक्षा में अनुभवात्मक शिक्षण, संरचित सिमुलेशन और अंतर्विषयक परियोजनाओं को शामिल करने पर जोर दिया।
पैनल चर्चा में कौन-से मुख्य विशेषज्ञ शामिल रहे?
'गवर्निंग एआई: लॉ, टेक्नोलॉजी एंड सोसाइटी इन द डिजिटल एज' विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में सिरिल श्रॉफ (सिरिल अमरचंद मंगलदास के मैनेजिंग पार्टनर), गौरव बंसल (इक्विलिब्रिया लॉ चैंबर्स के संस्थापक), अधीश नरगोलकर (खेतान एंड कंपनी के पार्टनर) और रॉनी स्क्रूवाला (अपग्रेड के सह-संस्थापक) जैसे प्रमुख विशेषज्ञ शामिल रहे।