8 जुलाई 2026
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यूएन एआई गवर्नेंस डायलॉग में भारत का विजन: कीर्ति वर्धन सिंह ने जिनेवा में रखा समावेशी एआई का एजेंडा

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यूएन एआई गवर्नेंस डायलॉग में भारत का विजन: कीर्ति वर्धन सिंह ने जिनेवा में रखा समावेशी एआई का एजेंडा

सारांश

जिनेवा में यूएन के एआई गवर्नेंस डायलॉग में भारत ने स्पष्ट संदेश दिया — एआई का भविष्य मानव-केंद्रित, समावेशी और जवाबदेह होना चाहिए। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने ग्लोबल साउथ की भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।

मुख्य बातें

केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने 6-7 जुलाई 2026 को जिनेवा में यूएन के ग्लोबल डायलॉग ऑन एआई गवर्नेंस में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।
भारत ने सुरक्षित, भरोसेमंद, जिम्मेदार और समावेशी एआई व्यवस्था की वकालत की, जिसमें मानव निगरानी और मानव अधिकारों का सम्मान अनिवार्य हो।
मंत्री ने ग्लोबल साउथ के देशों की तकनीकी और संसाधन खाई पाटने की आवश्यकता पर जोर दिया।
यह मंच संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव 79/325 और सितंबर 2024 के ग्लोबल डिजिटल कॉम्पैक्ट के तहत स्थापित है।
IISPA पैनल एआई की वैज्ञानिक पारदर्शिता और विकासशील देशों की क्षमता निर्माण पर काम कर रहा है।
फरवरी 2026 में नई दिल्ली में हुए एआई इम्पैक्ट समिट में भी भारत ने इस प्रक्रिया में भूमिका निभाई थी।

केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने 6 और 7 जुलाई 2026 को जिनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र के ग्लोबल डायलॉग ऑन एआई गवर्नेंस के उच्च स्तरीय सत्र में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। इस मंच पर उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई की वैश्विक व्यवस्था सुरक्षित, भरोसेमंद और समावेशी होनी चाहिए — जिसमें मानव निगरानी और मानव अधिकारों का सम्मान केंद्रीय भूमिका में हो।

मंत्री का संबोधन और मुख्य संदेश

कीर्ति वर्धन सिंह ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में लिखा कि एआई के नियम और प्रबंधन ऐसे होने चाहिए जो 'इंसानों को केंद्र में रखें, सभी को साथ लेकर चलें और भरोसे पर आधारित हों।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि तकनीकी और संसाधनों की कमी को दूर किए बिना ग्लोबल साउथ के देश एआई के भविष्य को आकार देने में सार्थक भूमिका नहीं निभा सकते। मंत्री ने कहा कि भारत एक ऐसे एआई भविष्य के लिए प्रतिबद्ध है जो 'सुरक्षित, जिम्मेदार और सभी के लिए समावेशी' हो।

मंच की पृष्ठभूमि और संरचना

विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, यह ग्लोबल डायलॉग ऑन एआई गवर्नेंस संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव 79/325 के तहत स्थापित एक सार्वभौमिक और बहु-हितधारक मंच है। यह सितंबर 2024 में अपनाए गए ग्लोबल डिजिटल कॉम्पैक्ट और पैक्ट ऑफ द फ्यूचर के बाद अस्तित्व में आया है। इस संवाद का उद्देश्य विभिन्न देशों, क्षेत्रीय और बहु-हितधारक प्रयासों को आपस में जोड़कर अंतरराष्ट्रीय एआई गवर्नेंस को आगे बढ़ाना है।

स्वतंत्र वैज्ञानिक पैनल की भूमिका

इस प्रक्रिया के समानांतर इंडिपेंडेंट इंटरनेशनल साइंटिफिक पैनल ऑन एआई (IISPA) भी सक्रिय है, जो एआई की वैज्ञानिक समझ, पारदर्शिता, जवाबदेही और मानव निगरानी को मजबूत करने पर केंद्रित है। यह पैनल विशेष रूप से विकासशील देशों की क्षमता निर्माण में सहयोग करेगा ताकि एआई को सतत विकास के लक्ष्यों की दिशा में प्रभावी रूप से इस्तेमाल किया जा सके।

भारत की पूर्व भूमिका और संदर्भ

गौरतलब है कि इस प्रक्रिया के तहत सह-अध्यक्षों ने कई हितधारक परामर्श आयोजित किए थे, जिनमें फरवरी 2026 में नई दिल्ली में हुए एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान एक इन-पर्सन बैठक भी शामिल थी। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर एआई विनियमन को लेकर अमेरिका, यूरोपीय संघ और चीन के बीच प्रतिस्पर्धी दृष्टिकोण उभर रहे हैं — और भारत अपनी 'मानव-केंद्रित' स्थिति के साथ एक अलग आवाज़ बनाने की कोशिश कर रहा है।

आगे की राह

जिनेवा संवाद के निष्कर्ष अंतरराष्ट्रीय एआई गवर्नेंस ढाँचे को आकार देने में अहम भूमिका निभाएंगे। भारत की सक्रिय भागीदारी यह संकेत देती है कि नई दिल्ली इस वैश्विक नीति-निर्माण प्रक्रिया में एक प्रमुख आवाज़ के रूप में खुद को स्थापित करना चाहता है, खासकर विकासशील देशों के हितों का प्रतिनिधित्व करते हुए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह स्थिति ठोस नीति प्रस्तावों में तब्दील होती है या केवल बयानबाजी तक सीमित रहती है। ग्लोबल साउथ की पैरवी करना तब विश्वसनीय बनता है जब घरेलू स्तर पर एआई विनियमन का ढाँचा भी उतना ही मजबूत हो — जो अभी भारत में प्रारंभिक अवस्था में है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि अमेरिका, यूरोपीय संघ और चीन पहले से ही अपने-अपने एआई मानक थोपने की होड़ में हैं; ऐसे में भारत की 'बहु-हितधारक और समावेशी' अपील एक रणनीतिक स्थान भरती है, पर उसे वास्तविक प्रभाव में बदलने के लिए ठोस तकनीकी क्षमता और गठबंधन-निर्माण दोनों की ज़रूरत होगी।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूएन का ग्लोबल डायलॉग ऑन एआई गवर्नेंस क्या है?
यह संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव 79/325 के तहत स्थापित एक सार्वभौमिक और बहु-हितधारक मंच है, जो सितंबर 2024 में अपनाए गए ग्लोबल डिजिटल कॉम्पैक्ट और पैक्ट ऑफ द फ्यूचर के बाद अस्तित्व में आया। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय एआई गवर्नेंस को आगे बढ़ाना और विभिन्न देशों के प्रयासों को आपस में जोड़ना है।
जिनेवा सत्र में भारत ने क्या रुख अपनाया?
भारत ने एआई व्यवस्था के लिए मानव-केंद्रित, समावेशी और भरोसेमंद दृष्टिकोण की वकालत की। केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने जोर दिया कि मानव निगरानी और मानव अधिकारों का सम्मान एआई नीति की बुनियाद होनी चाहिए।
ग्लोबल साउथ के लिए भारत ने क्या माँग रखी?
भारत ने तकनीकी और संसाधनों की कमी दूर करने की माँग रखी ताकि विकासशील देश एआई के भविष्य को आकार देने में सार्थक भूमिका निभा सकें। IISPA पैनल विशेष रूप से इन देशों की क्षमता निर्माण में सहयोग करेगा।
IISPA पैनल क्या है और इसका क्या काम है?
IISPA यानी इंडिपेंडेंट इंटरनेशनल साइंटिफिक पैनल ऑन एआई एक अंतरराष्ट्रीय निकाय है जो एआई की वैज्ञानिक समझ, पारदर्शिता, जवाबदेही और मानव निगरानी को मजबूत करने पर काम करता है। यह विकासशील देशों को एआई को सतत विकास के लक्ष्यों में इस्तेमाल करने के लिए सक्षम बनाने में भी मदद करेगा।
इस प्रक्रिया में भारत की पूर्व भागीदारी क्या रही है?
फरवरी 2026 में नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान इस संवाद प्रक्रिया की एक इन-पर्सन बैठक भी हुई थी जिसमें भारत ने सह-आयोजक की भूमिका निभाई। जिनेवा सत्र इसी निरंतरता का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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