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भारत-ईयू 12वां मानवाधिकार संवाद नई दिल्ली में संपन्न, एआई सहयोग और लोकतंत्र पर बनी सहमति

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भारत-ईयू 12वां मानवाधिकार संवाद नई दिल्ली में संपन्न, एआई सहयोग और लोकतंत्र पर बनी सहमति

सारांश

नई दिल्ली में 12वें भारत-ईयू मानवाधिकार संवाद में लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ-साथ मानव-केंद्रित एआई सहयोग को एजेंडे में शामिल किया गया — यह संकेत है कि दोनों पक्ष पारंपरिक अधिकार-चर्चा से आगे बढ़कर तकनीकी शासन को भी साझा मूल्यों की कसौटी पर परख रहे हैं।

मुख्य बातें

भारत और ईयू का 12वां मानवाधिकार संवाद 24 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुआ।
सह-अध्यक्षता अतिरिक्त सचिव पीयूष श्रीवास्तव और ईयू राजदूत हर्वे डेल्फिन ने की।
दोनों पक्षों ने मानव-केंद्रित एआई विकसित करने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
ईयू ने बिना अपवाद मृत्युदंड के विरोध की स्थिति दोहराई; भारत ने विकास के अधिकार को मौलिक अधिकार बताया।
अगला संवाद 2027 में आयोजित होने की उम्मीद जताई गई।

भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच 12वां मानवाधिकार संवाद बुधवार, 24 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुआ, जिसमें लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मानव-केंद्रित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे अहम विषयों पर सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। इस संवाद की सह-अध्यक्षता अतिरिक्त सचिव (यूरोप पश्चिम) पीयूष श्रीवास्तव और भारत में ईयू के राजदूत हर्वे डेल्फिन ने की।

मुख्य घटनाक्रम

दोनों पक्षों ने बैठक में खुली और सार्थक चर्चा का स्वागत किया। उन्होंने जनवरी 2025 में हुए पिछले संवाद के बाद भारत, ईयू, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों से जुड़े घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। गौरतलब है कि यह संवाद जनवरी 2026 में नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के बाद हो रहा है, जिसमें दोनों पक्षों के नेताओं ने रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने का संकल्प लिया था।

यह साझेदारी लोकतंत्र, मानवाधिकार, बहुलवाद, कानून के शासन और संयुक्त राष्ट्र-केंद्रित नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था जैसे साझा मूल्यों पर टिकी है।

किन मुद्दों पर हुई चर्चा

बैठक में नागरिक और राजनीतिक अधिकार, सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक अधिकार, भेदभाव उन्मूलन, प्रवासियों के अधिकार, धर्म या आस्था की स्वतंत्रता, ऑनलाइन और ऑफलाइन अभिव्यक्ति की आजादी, लैंगिक समानता और बच्चों के अधिकार जैसे विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। दोनों पक्षों ने माना कि सभी मानवाधिकार परस्पर जुड़े हुए हैं और हर जगह समान रूप से लागू होते हैं।

एआई और मानवाधिकार: नया साझा एजेंडा

दोनों पक्षों ने भारत की ओर से आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान व्यक्त प्रतिबद्धता को दोहराते हुए भरोसेमंद, टिकाऊ और मानव-केंद्रित एआई के विकास के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर एआई के नैतिक उपयोग को लेकर बहस तेज हो रही है।

इसके अलावा, मानवीय सहायता और आपदा राहत में सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने व्यवसाय और मानवाधिकारों से जुड़े संयुक्त राष्ट्र के दिशा-निर्देशों को लागू करने की दिशा में अपने-अपने कदमों की जानकारी साझा की।

मतभेद के बिंदु भी स्पष्ट

ईयू ने हर परिस्थिति में और बिना किसी अपवाद के मृत्युदंड का विरोध दोहराया। वहीं भारत ने विकास के अधिकार को मौलिक मानव अधिकार के रूप में मान्यता देने की अपनी परंपरागत स्थिति दोहराई। ये दोनों बिंदु भारत-ईयू संवाद में दीर्घकालिक वैचारिक अंतर को रेखांकित करते हैं।

दोनों पक्षों ने नागरिक समाज संगठनों, पत्रकारों और अन्य संबंधित पक्षों की स्वतंत्रता और विविधता की रक्षा के महत्व को भी स्वीकार किया।

आगे की राह

दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय और बहुपक्षीय स्तर पर मानवाधिकार मुद्दों पर संवाद जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई, जिसमें संयुक्त राष्ट्र महासभा और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के मंचों पर आपसी सहयोग शामिल है। अगला मानवाधिकार संवाद 2027 में आयोजित होने की उम्मीद जताई गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि यह सहयोग ठोस नीतिगत ढाँचे में कितना तब्दील होता है। भारत और ईयू के बीच मृत्युदंड और विकास के अधिकार जैसे मुद्दों पर वैचारिक दूरी बनी हुई है, जो हर संवाद में सामने आती है लेकिन कभी पाटी नहीं जाती। यह संवाद 16वें शिखर सम्मेलन की रणनीतिक गति का विस्तार है, पर नागरिक समाज और प्रेस की स्वतंत्रता पर जो सहमति जताई गई, उसकी व्यावहारिक निगरानी का कोई तंत्र सामने नहीं आया।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-ईयू 12वां मानवाधिकार संवाद क्या है और यह कब हुआ?
यह भारत और यूरोपीय संघ के बीच नियमित रूप से आयोजित होने वाली द्विपक्षीय वार्ता की 12वीं कड़ी है, जो 24 जून 2026 को नई दिल्ली में हुई। इसमें लोकतंत्र, मानवाधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और एआई सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
इस संवाद में एआई का विषय क्यों शामिल किया गया?
भारत की ओर से आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में भरोसेमंद और मानव-केंद्रित एआई विकसित करने की प्रतिबद्धता जताई गई थी। इसी के अनुरूप दोनों पक्षों ने इस संवाद में एआई को मानवाधिकार-अनुकूल तरीके से विकसित करने पर मिलकर काम करने की सहमति दोहराई।
भारत और ईयू के बीच किन मुद्दों पर मतभेद सामने आए?
ईयू ने हर परिस्थिति में मृत्युदंड के विरोध की अपनी स्थिति दोहराई, जबकि भारत ने विकास के अधिकार को मौलिक मानव अधिकार के रूप में मान्यता देने पर जोर दिया। ये दोनों बिंदु दोनों पक्षों के बीच दीर्घकालिक वैचारिक अंतर को दर्शाते हैं।
अगला भारत-ईयू मानवाधिकार संवाद कब होगा?
दोनों पक्षों ने उम्मीद जताई कि अगला संवाद 2027 में आयोजित होगा। इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र महासभा और यूएनएचआरसी जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भी आपसी सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई गई।
16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन का इस संवाद से क्या संबंध है?
जनवरी 2026 में नई दिल्ली में हुए 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन में दोनों पक्षों के नेताओं ने रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई थी। 12वाँ मानवाधिकार संवाद उसी प्रतिबद्धता की अगली कड़ी है, जो साझा मूल्यों — लोकतंत्र, कानून का शासन और बहुलवाद — पर आधारित है।
राष्ट्र प्रेस
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