भारत-ईयू 12वां मानवाधिकार संवाद नई दिल्ली में संपन्न, एआई सहयोग और लोकतंत्र पर बनी सहमति
सारांश
मुख्य बातें
भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच 12वां मानवाधिकार संवाद बुधवार, 24 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुआ, जिसमें लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मानव-केंद्रित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे अहम विषयों पर सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। इस संवाद की सह-अध्यक्षता अतिरिक्त सचिव (यूरोप पश्चिम) पीयूष श्रीवास्तव और भारत में ईयू के राजदूत हर्वे डेल्फिन ने की।
मुख्य घटनाक्रम
दोनों पक्षों ने बैठक में खुली और सार्थक चर्चा का स्वागत किया। उन्होंने जनवरी 2025 में हुए पिछले संवाद के बाद भारत, ईयू, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों से जुड़े घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। गौरतलब है कि यह संवाद जनवरी 2026 में नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के बाद हो रहा है, जिसमें दोनों पक्षों के नेताओं ने रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने का संकल्प लिया था।
यह साझेदारी लोकतंत्र, मानवाधिकार, बहुलवाद, कानून के शासन और संयुक्त राष्ट्र-केंद्रित नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था जैसे साझा मूल्यों पर टिकी है।
किन मुद्दों पर हुई चर्चा
बैठक में नागरिक और राजनीतिक अधिकार, सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक अधिकार, भेदभाव उन्मूलन, प्रवासियों के अधिकार, धर्म या आस्था की स्वतंत्रता, ऑनलाइन और ऑफलाइन अभिव्यक्ति की आजादी, लैंगिक समानता और बच्चों के अधिकार जैसे विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। दोनों पक्षों ने माना कि सभी मानवाधिकार परस्पर जुड़े हुए हैं और हर जगह समान रूप से लागू होते हैं।
एआई और मानवाधिकार: नया साझा एजेंडा
दोनों पक्षों ने भारत की ओर से आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान व्यक्त प्रतिबद्धता को दोहराते हुए भरोसेमंद, टिकाऊ और मानव-केंद्रित एआई के विकास के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर एआई के नैतिक उपयोग को लेकर बहस तेज हो रही है।
इसके अलावा, मानवीय सहायता और आपदा राहत में सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने व्यवसाय और मानवाधिकारों से जुड़े संयुक्त राष्ट्र के दिशा-निर्देशों को लागू करने की दिशा में अपने-अपने कदमों की जानकारी साझा की।
मतभेद के बिंदु भी स्पष्ट
ईयू ने हर परिस्थिति में और बिना किसी अपवाद के मृत्युदंड का विरोध दोहराया। वहीं भारत ने विकास के अधिकार को मौलिक मानव अधिकार के रूप में मान्यता देने की अपनी परंपरागत स्थिति दोहराई। ये दोनों बिंदु भारत-ईयू संवाद में दीर्घकालिक वैचारिक अंतर को रेखांकित करते हैं।
दोनों पक्षों ने नागरिक समाज संगठनों, पत्रकारों और अन्य संबंधित पक्षों की स्वतंत्रता और विविधता की रक्षा के महत्व को भी स्वीकार किया।
आगे की राह
दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय और बहुपक्षीय स्तर पर मानवाधिकार मुद्दों पर संवाद जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई, जिसमें संयुक्त राष्ट्र महासभा और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के मंचों पर आपसी सहयोग शामिल है। अगला मानवाधिकार संवाद 2027 में आयोजित होने की उम्मीद जताई गई है।