डिजिटल साधनों के माध्यम से मानवाधिकारों को सशक्त बनाना: भारत का दृष्टिकोण

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डिजिटल साधनों के माध्यम से मानवाधिकारों को सशक्त बनाना: भारत का दृष्टिकोण

सारांश

भारत का कहना है कि डिजिटल उपकरणों का उपयोग मानवाधिकारों के विस्तार में महत्वपूर्ण है। यह सभी व्यक्तियों के जीवन में सुधार लाने का एक साधन है। जानिए इस पहल के बारे में और क्या कहता है भारत का दृष्टिकोण।

Key Takeaways

  • डिजिटल उपकरणों का उपयोग मानवाधिकारों की पहुंच में सुधार करता है।
  • महिलाओं के सशक्तिकरण में मदद करता है।
  • आधुनिक तकनीक का उपयोग न्याय और लोकतंत्र को बढ़ावा देता है।
  • आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई की आवश्यकता है।
  • ग्लोबल साउथ की भागीदारी महत्वपूर्ण है।

संयुक्त राष्ट्र, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत का मानना है कि डिजिटल उपकरणों की शक्ति को संपूर्ण मानवता तक पहुंचाना मानवाधिकारों को प्रोत्साहित करने में सहायक है, क्योंकि यह सभी व्यक्तियों के जीवन में सुधार करने की वास्तविक क्षमता को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

भारत के विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबि जॉर्ज ने जिनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में कहा कि भारत ने सभी लोगों के अधिकारों तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल उपकरणों का प्रभावी ढंग से उपयोग किया है।

उन्होंने आगे बताया कि भारत में, हमने डिजिटल उपकरणों का उपयोग सभी के अधिकारों की पहुंच को विस्तारित करने के लिए बड़े पैमाने पर किया है।

इससे न्याय तक पहुंच, नागरिक और राजनीतिक अधिकारों, और 1.4 अरब भारतीयों की लोकतांत्रिक भागीदारी को भी बल मिला है। इसके साथ ही, यह महिलाओं के सशक्तिकरण में भी सहायक रहा है।

जॉर्ज ने उल्लेख किया कि पिछले महीने दिल्ली में आयोजित एआई इंपैक्ट समिट में 100 से अधिक देशों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की शक्ति को वैश्विक स्तर पर साझा करने के विचार का समर्थन किया।

उन्होंने बताया कि इस शिखर सम्मेलन में 20 राष्ट्राध्यक्ष और लगभग 45 मंत्रियों ने भाग लिया। यह सम्मेलन भारत ने फ्रांस के सहयोग से आयोजित किया था।

जॉर्ज ने कहा कि सम्मेलन में यह सहमति बनी कि एआई की वास्तविक शक्ति तभी पूरी तरह से प्रकट हो सकती है जब इसके लाभ को सभी मानवता में समान रूप से साझा किया जाए, जिसमें ग्लोबल साउथ की भागीदारी भी आवश्यक है।

उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर की उस अपील का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने परिषद से आग्रह किया कि केवल बयानों और प्रस्तावों से आगे बढ़कर सबसे कमजोर लोगों के दैनिक जीवन में ठोस सुधार लाने की दिशा में कार्य करें।

जॉर्ज ने कहा, “हम दृढ़ता से मानते हैं कि सभी मानवाधिकारों के प्रति एक समग्र और संतुलित दृष्टिकोण, जो एकीकृत विकास मॉडल पर आधारित हो, उन्हें हासिल करने का सबसे प्रभावी रास्ता है।” उन्होंने कहा कि भारत का डिजिटल कार्यक्रम इसी दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।

उन्होंने परिषद को यह याद दिलाया कि आतंकवाद मानवाधिकारों के लिए एक गंभीर खतरा बना हुआ है और इसके खिलाफ सामूहिक कार्रवाई का आह्वान किया।

जॉर्ज ने कहा, “आतंकवाद मानवाधिकारों के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है। हमें इसके सभी रूपों और अभिव्यक्तियों का मुकाबला करने के लिए अपने संकल्प पर अडिग रहना चाहिए। इस मुद्दे पर परिषद को एक स्वर में बोलते रहना चाहिए।”

Point of View

बल्कि यह समाज में समानता और सशक्तिकरण की दिशा में भी एक कदम है।
NationPress
15/03/2026

Frequently Asked Questions

भारत के डिजिटल कार्यक्रम का उद्देश्य क्या है?
भारत का डिजिटल कार्यक्रम मानवाधिकारों की पहुंच को बढ़ाना और सभी नागरिकों को न्याय और सशक्तिकरण प्रदान करना है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग कैसे किया जा रहा है?
भारत ने एआई तकनीक का उपयोग वैश्विक स्तर पर साझा करने के लिए किया है, जिससे सभी देशों को इसके लाभ मिल सकें।
महिलाओं के सशक्तिकरण में डिजिटल उपकरणों की भूमिका क्या है?
डिजिटल उपकरणों का उपयोग महिलाओं को सशक्त बनाने और उनके अधिकारों की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
भारत में डिजिटल उपकरणों की पहुंच कैसे बढ़ाई जा रही है?
भारत ने डिजिटल उपकरणों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया है, ताकि सभी लोगों के अधिकारों तक पहुंच सुनिश्चित की जा सके।
आतंकवाद मानवाधिकारों के लिए कैसे खतरा है?
आतंकवाद मानवाधिकारों के लिए एक गंभीर खतरा है, और इसके खिलाफ ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है।
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