1 अगस्त 2026
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श्रीलंका ईस्टर बम धमाके 2019: पूर्व पुलिस प्रमुख पुजित जयसुंदरा को मौत की सजा, खुफिया चेतावनी अनदेखी पर दोष सिद्ध

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श्रीलंका ईस्टर बम धमाके 2019: पूर्व पुलिस प्रमुख पुजित जयसुंदरा को मौत की सजा, खुफिया चेतावनी अनदेखी पर दोष सिद्ध

सारांश

श्रीलंका की अदालत ने 2019 के ईस्टर बम धमाकों में खुफिया चेतावनी जानते हुए भी निष्क्रिय रहने पर पूर्व पुलिस प्रमुख पुजित जयसुंदरा और तत्कालीन रक्षा सचिव हेमासिरी फर्नांडो को मौत की सजा सुनाई। 260 से अधिक लोगों की जान लेने वाले इन हमलों के सात साल बाद आया यह फैसला राज्य की जवाबदेही की एक दुर्लभ मिसाल है।

मुख्य बातें

कोलंबो की विशेष उच्च न्यायालय पीठ ने 1 अगस्त 2026 को पूर्व पुलिस महानिरीक्षक पुजित जयसुंदरा को मौत की सजा सुनाई।
21 अप्रैल 2019 के ईस्टर संडे हमलों में 260 से अधिक लोगों की मौत और 500 से अधिक घायल हुए थे।
अदालत ने माना कि जयसुंदरा को 20 अप्रैल 2019 की शाम खुफिया चेतावनी मिली थी, फिर भी उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।
तत्कालीन रक्षा सचिव हेमासिरी फर्नांडो को भी उसी दिन दोषी ठहराते हुए मौत की सजा दी गई।
न्यायाधीश विराज वीरासूर्या ने असहमति जताते हुए जयसुंदरा को सभी आरोपों से बरी करने का अलग मत दिया।
फैसला सुनाने में अदालत को चार घंटे से अधिक का समय लगा; उच्चतर अदालत में अपील का विकल्प उपलब्ध है।

कोलंबो की एक विशेष तीन-न्यायाधीशीय उच्च न्यायालय पीठ ने 1 अगस्त 2026 को श्रीलंका के पूर्व पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) पुजित जयसुंदरा को 21 अप्रैल 2019 के ईस्टर संडे आत्मघाती बम धमाकों को रोकने में विफल रहने का दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई। इन हमलों में 260 से अधिक लोगों की जान गई थी और 500 से अधिक घायल हुए थे। अदालत ने माना कि जयसुंदरा के पास पहले से खुफिया चेतावनी उपलब्ध थी, फिर भी उन्होंने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया।

मुख्य घटनाक्रम

शुक्रवार को सुनाए गए फैसले में न्यायाधीश प्रियंता लियानागे और तिलकरत्ने बंडारा ने बहुमत का निर्णय सुनाया। पीठ की अध्यक्षता कर रहे न्यायाधीश लियानागे ने कहा कि हमलों के समय जयसुंदरा देश के सर्वोच्च पुलिस अधिकारी थे और नागरिकों की सुरक्षा तथा सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की संवैधानिक जिम्मेदारी उन्हीं की थी। अदालत को पूरा फैसला सुनाने में चार घंटे से अधिक का समय लगा।

अदालत ने जयसुंदरा को कर्तव्यों की घोर उपेक्षा, हत्या में सहायता और उकसावे का दोषी करार दिया। अपराध की असाधारण गंभीरता को देखते हुए पीठ ने उन्हें मृत्युदंड सुनाया।

खुफिया चेतावनी की अनदेखी

अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि तत्कालीन स्टेट इंटेलिजेंस सर्विस के निदेशक निलंता जयवर्धने ने 20 अप्रैल 2019 की शाम — यानी हमलों से एक दिन पहले — जयसुंदरा को सूचित किया था कि अगले दिन कोलंबो और उसके आसपास के कैथोलिक चर्चों तथा पर्यटक होटलों पर आत्मघाती हमलों की आशंका है।

इस स्पष्ट चेतावनी के बावजूद जयसुंदरा ने हमलों को रोकने के लिए कोई आवश्यक सुरक्षात्मक कदम नहीं उठाया। बहुमत के फैसले में कहा गया कि अपराधों की रोकथाम और जनता की सुरक्षा के लिए नियुक्त राज्य अधिकारी होने के बावजूद उन्होंने अपने दायित्वों की गंभीर उपेक्षा की।

असहमति का फैसला

तीसरे न्यायाधीश विराज वीरासूर्या ने बहुमत से असहमति व्यक्त करते हुए अलग निर्णय दिया। उनके अनुसार अभियोजन पक्ष जयसुंदरा के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा, इसलिए उन्होंने उन्हें सभी आरोपों से बरी करने का मत रखा। यह असहमति इस ऐतिहासिक फैसले को कानूनी दृष्टि से जटिल बनाती है और संभावित अपील की राह खोलती है।

रक्षा सचिव को भी मौत की सजा

उसी दिन अदालत ने तत्कालीन रक्षा सचिव हेमासिरी फर्नांडो को भी दोषी ठहराया। उन पर भी आरोप था कि उन्होंने 2019 के आतंकी हमलों से पहले मिली खुफिया चेतावनियों पर कोई कार्रवाई नहीं की। अदालत ने उन्हें भी मौत की सजा सुनाई। इस प्रकार एक ही दिन में दो वरिष्ठ राज्य अधिकारियों को इस मामले में सर्वोच्च दंड दिया गया।

हमलों की पृष्ठभूमि और व्यापक असर

21 अप्रैल 2019 को ईस्टर संडे की सुबह कोलंबो और अन्य स्थानों पर एक के बाद एक सीरियल आत्मघाती बम धमाके हुए थे। इन हमलों ने कैथोलिक चर्चों और लक्जरी होटलों को निशाना बनाया था। 260 से अधिक लोगों की मौत और 500 से अधिक के घायल होने के साथ यह श्रीलंका के इतिहास का सबसे विनाशकारी आतंकी हमला था। यह ऐसे समय में आया था जब देश 30 साल के गृहयुद्ध की समाप्ति के एक दशक बाद स्थिरता की राह पर था।

गौरतलब है कि इस मामले में राज्य की विफलता को लेकर वर्षों से पीड़ित परिवार न्याय की माँग करते रहे हैं। यह फैसला उस लंबी कानूनी लड़ाई का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। आगे जयसुंदरा और फर्नांडो के पास उच्चतर न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

हाँ। लेकिन एक न्यायाधीश की असहमति यह भी बताती है कि 'साबित करने का बोझ' और 'नैतिक जिम्मेदारी' के बीच की रेखा अभी भी विवादित है। गौरतलब है कि दुनिया के अधिकांश लोकतंत्रों में किसी अधिकारी को चेतावनी पर कार्रवाई न करने के लिए मृत्युदंड देना अभूतपूर्व है — यह फैसला अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार निकायों की नज़र में भी आएगा। पीड़ित परिवारों के लिए यह न्याय की शुरुआत हो सकती है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि अपील की प्रक्रिया में यह सजा बरकरार रहती है या नहीं।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुजित जयसुंदरा को मौत की सजा क्यों दी गई?
कोलंबो की विशेष उच्च न्यायालय पीठ ने माना कि जयसुंदरा को 20 अप्रैल 2019 की शाम खुफिया चेतावनी मिली थी कि अगले दिन कैथोलिक चर्चों और होटलों पर हमले होंगे, फिर भी उन्होंने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। अदालत ने उन्हें कर्तव्यों की घोर उपेक्षा और हत्या में सहायता व उकसावे का दोषी ठहराया।
2019 के श्रीलंका ईस्टर बम धमाके क्या थे?
21 अप्रैल 2019 को ईस्टर संडे की सुबह कोलंबो और अन्य स्थानों पर कैथोलिक चर्चों और लक्जरी होटलों पर सीरियल आत्मघाती बम धमाके हुए थे। इन हमलों में 260 से अधिक लोगों की मौत हुई और 500 से अधिक घायल हुए — यह श्रीलंका के इतिहास का सबसे विनाशकारी आतंकी हमला था।
क्या इस मामले में किसी और को भी सजा मिली?
हाँ, उसी दिन 1 अगस्त 2026 को अदालत ने तत्कालीन रक्षा सचिव हेमासिरी फर्नांडो को भी दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई। उन पर भी खुफिया चेतावनियों पर कार्रवाई न करने का आरोप था।
एक न्यायाधीश ने असहमति क्यों जताई?
न्यायाधीश विराज वीरासूर्या ने अपने अलग फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष जयसुंदरा के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। इसलिए उन्होंने उन्हें सभी आरोपों से बरी करने का मत दिया, जो बहुमत के निर्णय से सीधे विपरीत था।
जयसुंदरा के पास अब क्या विकल्प हैं?
दोषसिद्धि और मृत्युदंड के खिलाफ जयसुंदरा श्रीलंका के उच्चतर न्यायालय में अपील कर सकते हैं। न्यायाधीश वीरासूर्या की असहमति अपील के लिए एक कानूनी आधार प्रदान कर सकती है, हालाँकि अंतिम निर्णय उच्च न्यायालय पर निर्भर होगा।
राष्ट्र प्रेस
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