श्रीलंका ईस्टर बम धमाके 2019: पूर्व पुलिस प्रमुख पुजित जयसुंदरा को मौत की सजा, खुफिया चेतावनी अनदेखी पर दोष सिद्ध
सारांश
मुख्य बातें
कोलंबो की एक विशेष तीन-न्यायाधीशीय उच्च न्यायालय पीठ ने 1 अगस्त 2026 को श्रीलंका के पूर्व पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) पुजित जयसुंदरा को 21 अप्रैल 2019 के ईस्टर संडे आत्मघाती बम धमाकों को रोकने में विफल रहने का दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई। इन हमलों में 260 से अधिक लोगों की जान गई थी और 500 से अधिक घायल हुए थे। अदालत ने माना कि जयसुंदरा के पास पहले से खुफिया चेतावनी उपलब्ध थी, फिर भी उन्होंने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया।
मुख्य घटनाक्रम
शुक्रवार को सुनाए गए फैसले में न्यायाधीश प्रियंता लियानागे और तिलकरत्ने बंडारा ने बहुमत का निर्णय सुनाया। पीठ की अध्यक्षता कर रहे न्यायाधीश लियानागे ने कहा कि हमलों के समय जयसुंदरा देश के सर्वोच्च पुलिस अधिकारी थे और नागरिकों की सुरक्षा तथा सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की संवैधानिक जिम्मेदारी उन्हीं की थी। अदालत को पूरा फैसला सुनाने में चार घंटे से अधिक का समय लगा।
अदालत ने जयसुंदरा को कर्तव्यों की घोर उपेक्षा, हत्या में सहायता और उकसावे का दोषी करार दिया। अपराध की असाधारण गंभीरता को देखते हुए पीठ ने उन्हें मृत्युदंड सुनाया।
खुफिया चेतावनी की अनदेखी
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि तत्कालीन स्टेट इंटेलिजेंस सर्विस के निदेशक निलंता जयवर्धने ने 20 अप्रैल 2019 की शाम — यानी हमलों से एक दिन पहले — जयसुंदरा को सूचित किया था कि अगले दिन कोलंबो और उसके आसपास के कैथोलिक चर्चों तथा पर्यटक होटलों पर आत्मघाती हमलों की आशंका है।
इस स्पष्ट चेतावनी के बावजूद जयसुंदरा ने हमलों को रोकने के लिए कोई आवश्यक सुरक्षात्मक कदम नहीं उठाया। बहुमत के फैसले में कहा गया कि अपराधों की रोकथाम और जनता की सुरक्षा के लिए नियुक्त राज्य अधिकारी होने के बावजूद उन्होंने अपने दायित्वों की गंभीर उपेक्षा की।
असहमति का फैसला
तीसरे न्यायाधीश विराज वीरासूर्या ने बहुमत से असहमति व्यक्त करते हुए अलग निर्णय दिया। उनके अनुसार अभियोजन पक्ष जयसुंदरा के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा, इसलिए उन्होंने उन्हें सभी आरोपों से बरी करने का मत रखा। यह असहमति इस ऐतिहासिक फैसले को कानूनी दृष्टि से जटिल बनाती है और संभावित अपील की राह खोलती है।
रक्षा सचिव को भी मौत की सजा
उसी दिन अदालत ने तत्कालीन रक्षा सचिव हेमासिरी फर्नांडो को भी दोषी ठहराया। उन पर भी आरोप था कि उन्होंने 2019 के आतंकी हमलों से पहले मिली खुफिया चेतावनियों पर कोई कार्रवाई नहीं की। अदालत ने उन्हें भी मौत की सजा सुनाई। इस प्रकार एक ही दिन में दो वरिष्ठ राज्य अधिकारियों को इस मामले में सर्वोच्च दंड दिया गया।
हमलों की पृष्ठभूमि और व्यापक असर
21 अप्रैल 2019 को ईस्टर संडे की सुबह कोलंबो और अन्य स्थानों पर एक के बाद एक सीरियल आत्मघाती बम धमाके हुए थे। इन हमलों ने कैथोलिक चर्चों और लक्जरी होटलों को निशाना बनाया था। 260 से अधिक लोगों की मौत और 500 से अधिक के घायल होने के साथ यह श्रीलंका के इतिहास का सबसे विनाशकारी आतंकी हमला था। यह ऐसे समय में आया था जब देश 30 साल के गृहयुद्ध की समाप्ति के एक दशक बाद स्थिरता की राह पर था।
गौरतलब है कि इस मामले में राज्य की विफलता को लेकर वर्षों से पीड़ित परिवार न्याय की माँग करते रहे हैं। यह फैसला उस लंबी कानूनी लड़ाई का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। आगे जयसुंदरा और फर्नांडो के पास उच्चतर न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध होगा।