फ्रेंडशिप डे का इतिहास: 1930 से संयुक्त राष्ट्र तक, जानिए कैसे बना दोस्ती का यह खास दिन
सारांश
मुख्य बातें
फ्रेंडशिप डे हर साल दुनिया भर में दोस्ती के अनमोल रिश्ते को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। भारत में यह पर्व अगस्त के पहले रविवार को धूमधाम से मनाया जाता है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त राष्ट्र ने 30 जुलाई को इंटरनेशनल फ्रेंडशिप डे के रूप में मान्यता दी है। इस उत्सव के पीछे एक सदी से भी पुरानी यात्रा है — जो अमेरिका के एक ग्रीटिंग कार्ड उद्यमी के विचार से शुरू होकर पराग्वे की एक रात्रिभोज की बातचीत तक और फिर संयुक्त राष्ट्र महासभा के आधिकारिक प्रस्ताव तक पहुँची।
1930: बीज बोया अमेरिका में
फ्रेंडशिप डे का विचार सबसे पहले 1930 में अमेरिका में सामने आया। प्रसिद्ध ग्रीटिंग कार्ड कंपनी हॉलमार्क के संस्थापक जॉयस हॉल ने सुझाव दिया कि दोस्तों के नाम पर भी एक विशेष दिन होना चाहिए। उनकी सोच थी कि इस दिन लोग अपने मित्रों को ग्रीटिंग कार्ड, शुभकामनाएँ और छोटे उपहार देकर अपने रिश्ते को और प्रगाढ़ बना सकते हैं। हालाँकि उस दौर में यह विचार व्यापक लोकप्रियता हासिल नहीं कर पाया और धीरे-धीरे लोगों की स्मृति से लुप्त हो गया।
1958: पराग्वे में मिली नई दिशा
इस विचार को असली जीवन 1958 में दक्षिण अमेरिकी देश पराग्वे में मिला। डॉक्टर रेमन आर्टेमियो ब्राचो अपने मित्रों के साथ भोजन कर रहे थे, जब बातचीत के दौरान उन्होंने एक ऐसे दिन की परिकल्पना रखी जो विशेष रूप से मित्रता को समर्पित हो और दुनिया में भाईचारे, प्रेम तथा शांति का संदेश फैलाए। इसी विचार की कोख से वर्ल्ड फ्रेंडशिप क्रूसेड नामक संस्था का जन्म हुआ। इस संगठन ने वैश्विक स्तर पर मित्रता को बढ़ावा देने का अभियान चलाया और 30 जुलाई को फ्रेंडशिप डे के रूप में मनाने की परंपरा की नींव रखी।
2011: संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक मान्यता
दोस्ती के इस वैश्विक महत्व को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2011 में आधिकारिक रूप से 30 जुलाई को इंटरनेशनल फ्रेंडशिप डे घोषित किया। इस निर्णय का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत मित्रता का उत्सव मनाना नहीं था, बल्कि विभिन्न देशों, संस्कृतियों और समुदायों के बीच शांति, सहयोग और आपसी समझ को प्रोत्साहित करना भी था। यह ऐसे समय में आया जब वैश्विक स्तर पर सांस्कृतिक संवाद की ज़रूरत पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही थी।
भारत में अगस्त के पहले रविवार की परंपरा
भारत समेत कुछ अन्य देशों में फ्रेंडशिप डे अगस्त के पहले रविवार को मनाया जाता है। इसके पीछे कोई सरकारी आदेश या औपचारिक घोषणा नहीं है। रविवार को अवकाश होने के कारण लोग इस दिन अपने दोस्तों से मिल सकते हैं, और फिल्मों, टेलीविज़न, ग्रीटिंग कार्ड कंपनियों तथा बाद में सोशल मीडिया ने इस तारीख को इतना लोकप्रिय बना दिया कि यही चलन में स्थायी रूप से आ गई। गौरतलब है कि यह सांस्कृतिक प्रचलन किसी संस्थागत निर्देश का नहीं, बल्कि जन-भावना का स्वाभाविक परिणाम है।
आज कैसे मनाया जाता है फ्रेंडशिप डे
आज के दौर में फ्रेंडशिप डे विशेष रूप से युवाओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। स्कूल, कॉलेज और कार्यालयों में मित्र एक-दूसरे को रंग-बिरंगे फ्रेंडशिप बैंड बाँधते हैं, चॉकलेट, उपहार और ग्रीटिंग कार्ड देते हैं। सोशल मीडिया पर लोग अपने प्रिय मित्रों के साथ तस्वीरें और वीडियो साझा कर उन्हें विशेष महसूस कराते हैं। कई लोग इस दिन पुराने बिछड़े दोस्तों से पुनः संपर्क करते हैं और साझा यादों को ताज़ा करते हैं। यह पर्व इस बात की याद दिलाता है कि सच्ची मित्रता देशों और संस्कृतियों की सीमाओं से परे होती है।