बीएचयू में बिहार राज्यपाल हसनैन बोले: शिक्षा में एआई सहायक बने, एनईपी 2020 चरणबद्ध तरीके से लागू हो
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन ने 6 जुलाई 2026 को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), वाराणसी में '21वीं सदी के लिए शिक्षा सुधार' विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को चरणबद्ध रूप से लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया और स्पष्ट किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को शिक्षा में एक सहायक उपकरण के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, न कि मानवीय शिक्षकों के विकल्प के रूप में।
सम्मेलन का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
यह सम्मेलन यूनेस्को के सहयोग से आयोजित किया गया है और इसका केंद्रीय विषय 'भविष्य की शिक्षा' (Future of Education) है। हसनैन ने कहा, 'यह कॉन्फ्रेंस यूनेस्को के साथ आयोजित की जा रही है और यह 'फ्यूचर ऑफ एजुकेशन' पर आधारित है। भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों के आने के साथ, देश की युवा जनसंख्या को देखते हुए इन विषयों पर गंभीर विचार-विमर्श की आवश्यकता है।' उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या वर्तमान शिक्षा नीति के आधार पर 'विकसित भारत' का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
एआई पर राज्यपाल का स्पष्ट रुख
एआई के मानवों को प्रतिस्थापित करने की संभावना पर हसनैन ने कहा कि यह शायद 100 वर्ष बाद की बात हो सकती है, लेकिन अभी प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि एआई को एक सहयोगी तकनीक के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि एआई को शिक्षा का मुख्य माध्यम नहीं बनाना चाहिए — यह केवल एक सहायक उपकरण के रूप में कार्य करे। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के शिक्षण संस्थान एआई-आधारित शिक्षण प्रणालियों को अपनाने की दिशा में तेज़ी से बढ़ रहे हैं।
एनईपी 2020 का क्रियान्वयन: बीएचयू बनेगा मॉडल
राज्यपाल हसनैन ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन पर कहा कि इसे रातोंरात लागू नहीं किया जा सकता — यह एक प्रगतिशील और दीर्घकालिक प्रक्रिया है। उन्होंने बताया कि यह नीति उत्तर प्रदेश और बिहार दोनों राज्यों में लागू की जा रही है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय को इस नीति के क्रियान्वयन का एक 'मॉडल संस्थान' बताया गया, जहाँ इसे रचनात्मक और व्यवस्थित तरीके से अपनाया जा रहा है।
सोशल मीडिया और रोजगार योग्यता पर जोर
हसनैन ने यह भी रेखांकित किया कि आज शिक्षा सोशल मीडिया के माध्यम से भी प्रसारित हो रही है, इसलिए इसे और अधिक प्रभावी बनाने तथा युवा जनसंख्या को रोजगार योग्य बनाने पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। गौरतलब है कि भारत की युवा आबादी विश्व में सबसे बड़ी है और शिक्षा-रोजगार के बीच की खाई को पाटना नीति-निर्माताओं के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
आगे की राह
इस दो दिवसीय सम्मेलन में देश-विदेश के शिक्षाविद् और नीति-विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि सम्मेलन के अंत में शिक्षा में एआई के उपयोग और एनईपी के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर ठोस सिफारिशें सामने आएंगी, जो भविष्य की नीति-निर्माण प्रक्रिया में सहायक होंगी।