भावनगर के गार्जिया गांव में शेर ने मालधारी पर किया हमला, गंभीर रूप से घायल कालूभाई अस्पताल में भर्ती
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के भावनगर जिले के पालिताना तालुका स्थित गार्जिया गांव में 6 जुलाई 2026 की सुबह एक शेर ने मालधारी कालूभाई बोघाभाई गामारा पर अचानक हमला कर दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल को पहले पालिताना सरकारी अस्पताल और फिर बेहतर इलाज के लिए भावनगर सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।
घटनाक्रम: कैसे हुआ हमला
कालूभाई बोघाभाई गामारा सोमवार सुबह गार्जिया गांव के सीमावर्ती इलाके में अपने घर पर थे, तभी अचानक एक शेर ने उन पर हमला बोल दिया। शेर ने उन्हें जमीन पर दबा लिया। आसपास मौजूद ग्रामीण तुरंत हरकत में आए और शेर को भगाने के लिए जोर-जोर से चिल्लाने लगे तथा पत्थर भी फेंके। कालूभाई अपनी जान बचाने के लिए शेर से संघर्ष करते रहे। ग्रामीणों के प्रयासों से अंततः शेर ने उन्हें छोड़ा।
वायरल वीडियो ने बढ़ाई दहशत
इस पूरी घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो गया, जिसमें साफ़ देखा जा सकता है कि शेर ने मालधारी को दबा रखा है और स्थानीय लोग उसे भगाने की कोशिश कर रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद गार्जिया गांव और आसपास के इलाकों में भय और दहशत का माहौल बन गया। यह ऐसे समय में आया है जब गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएँ पहले से चिंता का विषय रही हैं।
वन विभाग की प्रतिक्रिया
पालिताना वन विभाग के अधिकारी चिराग अमीन ने बताया कि हमले की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुँच गई। उन्होंने कहा कि विभाग ने घटना की जाँच शुरू कर दी है और इलाके में दहशत फैला रहे इस शेर को पकड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, स्थिति पर नज़र रखी जा रही है।
आम जनता और पशुपालकों पर असर
इस घटना के बाद गार्जिया गांव सहित आसपास के इलाकों में पशुपालक समुदाय के बीच अपने जानवरों और परिजनों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्याप्त है। मालधारी समुदाय, जो पशुपालन पर निर्भर है, अक्सर जंगल के निकटवर्ती क्षेत्रों में रहता है, जिससे उनका वन्यजीवों से सामना होने का जोखिम बना रहता है।
क्या होगा आगे
वन विभाग की टीम उस शेर की पहचान और उसे पकड़ने के लिए सक्रिय है जिसने यह हमला किया। कालूभाई का भावनगर सरकारी अस्पताल में उपचार जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानव बस्तियों के करीब शेरों की बढ़ती आवाजाही को लेकर दीर्घकालिक प्रबंधन नीति पर पुनर्विचार ज़रूरी है।