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गिर जंगल में बेबेसिया परजीवी संक्रमण से शेरों की मौत, 17 वयस्क शेर आइसोलेट; CM पटेल ने ली उच्चस्तरीय बैठक

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गिर जंगल में बेबेसिया परजीवी संक्रमण से शेरों की मौत, 17 वयस्क शेर आइसोलेट; CM पटेल ने ली उच्चस्तरीय बैठक

सारांश

गिर के एशियाई शेरों पर एक बार फिर बेबेसिया परजीवी का साया — 17 शेर आइसोलेट, 350 से अधिक की जाँच जारी। 2018 में इसी तरह के संक्रमण से 23 शेर काल के गाल में समा गए थे। दुनिया के इकलौते एशियाई शेर आवास पर मंडरा रहा यह खतरा वन्यजीव संरक्षण की कमज़ोर कड़ियों को फिर उजागर करता है।

मुख्य बातें

गिर जंगल में हाल के दिनों में कई शेरों की मौत, बेबेसिया परजीवी संक्रमण की आशंका।
एहतियात के तौर पर 17 वयस्क शेरों को 10 किलोमीटर के दायरे में आइसोलेट कर गहन उपचार जारी।
350 से अधिक शेरों के स्वास्थ्य की जाँच; जूनागढ़ वेटरनरी कॉलेज और वन विभाग की संयुक्त टीमें सक्रिय।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में उच्चस्तरीय बैठक कर पूर्ण निगरानी के निर्देश दिए।
वन मंत्री अर्जुन मोधवाडिया ने कहा — यह बड़ी महामारी नहीं, छिटपुट घटनाएं हैं; स्थिति नियंत्रण में।
बेबेसिया एक प्रोटोजोआ परजीवी है जो किलनी के काटने से फैलता है और लाल रक्त कोशिकाओं को नष्ट करता है।

गुजरात के गिर जंगल में हाल के दिनों में कई शेरों की मौत के बाद वन विभाग सतर्क हो गया है। राज्य के वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोधवाडिया ने पुष्टि की है कि कुछ शेरों की मौत बेबेसिया नामक जानलेवा परजीवी संक्रमण से होने की आशंका है, जबकि अन्य मौतें प्राकृतिक कारणों और आपसी संघर्ष के चलते हुईं। एहतियात के तौर पर 17 वयस्क शेरों को आइसोलेट कर गहन चिकित्सा और निगरानी में रखा गया है।

मुख्य घटनाक्रम

वन मंत्री मोधवाडिया ने स्पष्ट किया कि यह कोई बड़ी महामारी या व्यापक प्रकोप नहीं है, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों में हुई छिटपुट घटनाएं हैं। उन्होंने बताया कि 10 किलोमीटर के दायरे में मौजूद शेरों को आइसोलेट किया गया है ताकि संक्रमण आगे न फैल सके।

मौतों की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीमें सक्रिय हो गईं। जूनागढ़ वेटरनरी कॉलेज और वन विभाग की संयुक्त टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार गश्त कर रही हैं। संक्रमण की रोकथाम और किलनी (बाह्य परजीवी) के उन्मूलन के लिए 350 से अधिक शेरों के स्वास्थ्य की जाँच की जा रही है।

सरकार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की और स्थिति की पूर्ण निगरानी के निर्देश दिए। राज्य सरकार की ओर से संक्रमण नियंत्रण के लिए कई उपाय तेज़ी से लागू किए जा रहे हैं।

वन मंत्री मोधवाडिया ने कहा, 'शेरों की मौत की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम सक्रिय हो गई। मुख्यमंत्री ने उच्च अधिकारियों के साथ बैठक की और स्थिति की समीक्षा की।'

बेबेसिया संक्रमण क्या है

बेबेसिया एक जानलेवा प्रोटोजोआ परजीवी है जो मलेरिया की तरह काम करता है और सीधे जानवरों की लाल रक्त कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। यह बीमारी मुख्यतः किलनी के काटने से फैलती है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार यह संक्रमण शेरों जैसी बड़ी बिल्लियों के लिए विशेष रूप से घातक हो सकता है।

गिर के शेरों के लिए क्यों है यह चिंताजनक

गौरतलब है कि गिर दुनिया में एशियाई शेरों का एकमात्र प्राकृतिक आवास है। यह ऐसे समय में आया है जब संरक्षण प्रयासों से शेरों की संख्या में सुधार दर्ज किया गया था। किसी भी संक्रामक बीमारी का प्रकोप इस दुर्लभ और संकटग्रस्त आबादी के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। वर्ष 2018 में भी गिर में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस और बेबेसिया के मिले-जुले संक्रमण से 23 शेरों की मौत हो गई थी — यह पृष्ठभूमि मौजूदा स्थिति को और संवेदनशील बनाती है।

आगे क्या होगा

अधिकारियों के अनुसार आइसोलेट किए गए 17 शेरों की चिकित्सा जारी है और उनकी स्थिति की नियमित निगरानी की जा रही है। 350 से अधिक शेरों की स्वास्थ्य जाँच का अभियान जारी रहेगा। विशेषज्ञ टीमें किलनी नियंत्रण के उपायों पर भी काम कर रही हैं ताकि संक्रमण की जड़ को खत्म किया जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह सवाल उठना स्वाभाविक है। दुनिया में एशियाई शेरों का यह एकमात्र प्राकृतिक ठिकाना है, इसलिए यहाँ किसी भी संक्रमण की 'छिटपुट' व्याख्या सावधानी से की जानी चाहिए — आबादी छोटी है और आनुवंशिक विविधता सीमित। सरकार की त्वरित प्रतिक्रिया सराहनीय है, लेकिन असली परीक्षा किलनी-नियंत्रण के दीर्घकालिक प्रोटोकॉल और शेरों के दूसरे आवास की योजना पर होगी, जिसे वर्षों से टाला जा रहा है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गिर के शेरों में बेबेसिया संक्रमण क्या है और यह कैसे फैलता है?
बेबेसिया एक जानलेवा प्रोटोजोआ परजीवी है जो किलनी (टिक) के काटने से फैलता है और जानवरों की लाल रक्त कोशिकाओं को सीधे नष्ट कर देता है — ठीक मलेरिया की तरह। गिर के शेरों में इसी संक्रमण से हाल की मौतों की आशंका जताई जा रही है।
कितने शेरों को आइसोलेट किया गया है और क्यों?
वन विभाग ने एहतियात के तौर पर 17 वयस्क शेरों को 10 किलोमीटर के दायरे में आइसोलेट किया है ताकि संक्रमण आगे न फैल सके। इन शेरों की गहन चिकित्सा और निगरानी जारी है।
क्या गिर में यह पहली बार हुआ है?
नहीं। वर्ष 2018 में भी गिर में बेबेसिया और कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के मिले-जुले संक्रमण से 23 शेरों की मौत हो गई थी। मौजूदा स्थिति उसी पृष्ठभूमि में अधिक चिंताजनक मानी जा रही है।
राज्य सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में उच्चस्तरीय बैठक कर पूर्ण निगरानी के निर्देश दिए हैं। जूनागढ़ वेटरनरी कॉलेज और वन विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में गश्त कर रही हैं और 350 से अधिक शेरों के स्वास्थ्य की जाँच चल रही है।
क्या यह एशियाई शेरों के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा है?
गिर दुनिया में एशियाई शेरों का एकमात्र प्राकृतिक आवास है, इसलिए कोई भी संक्रामक बीमारी इस दुर्लभ आबादी के लिए गंभीर हो सकती है। वन मंत्री मोधवाडिया ने इसे बड़ी महामारी नहीं बताया है, लेकिन वन्यजीव विशेषज्ञ सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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