गिर जंगल में बेबेसिया परजीवी संक्रमण से शेरों की मौत, 17 वयस्क शेर आइसोलेट; CM पटेल ने ली उच्चस्तरीय बैठक
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के गिर जंगल में हाल के दिनों में कई शेरों की मौत के बाद वन विभाग सतर्क हो गया है। राज्य के वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोधवाडिया ने पुष्टि की है कि कुछ शेरों की मौत बेबेसिया नामक जानलेवा परजीवी संक्रमण से होने की आशंका है, जबकि अन्य मौतें प्राकृतिक कारणों और आपसी संघर्ष के चलते हुईं। एहतियात के तौर पर 17 वयस्क शेरों को आइसोलेट कर गहन चिकित्सा और निगरानी में रखा गया है।
मुख्य घटनाक्रम
वन मंत्री मोधवाडिया ने स्पष्ट किया कि यह कोई बड़ी महामारी या व्यापक प्रकोप नहीं है, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों में हुई छिटपुट घटनाएं हैं। उन्होंने बताया कि 10 किलोमीटर के दायरे में मौजूद शेरों को आइसोलेट किया गया है ताकि संक्रमण आगे न फैल सके।
मौतों की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीमें सक्रिय हो गईं। जूनागढ़ वेटरनरी कॉलेज और वन विभाग की संयुक्त टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार गश्त कर रही हैं। संक्रमण की रोकथाम और किलनी (बाह्य परजीवी) के उन्मूलन के लिए 350 से अधिक शेरों के स्वास्थ्य की जाँच की जा रही है।
सरकार की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की और स्थिति की पूर्ण निगरानी के निर्देश दिए। राज्य सरकार की ओर से संक्रमण नियंत्रण के लिए कई उपाय तेज़ी से लागू किए जा रहे हैं।
वन मंत्री मोधवाडिया ने कहा, 'शेरों की मौत की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम सक्रिय हो गई। मुख्यमंत्री ने उच्च अधिकारियों के साथ बैठक की और स्थिति की समीक्षा की।'
बेबेसिया संक्रमण क्या है
बेबेसिया एक जानलेवा प्रोटोजोआ परजीवी है जो मलेरिया की तरह काम करता है और सीधे जानवरों की लाल रक्त कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। यह बीमारी मुख्यतः किलनी के काटने से फैलती है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार यह संक्रमण शेरों जैसी बड़ी बिल्लियों के लिए विशेष रूप से घातक हो सकता है।
गिर के शेरों के लिए क्यों है यह चिंताजनक
गौरतलब है कि गिर दुनिया में एशियाई शेरों का एकमात्र प्राकृतिक आवास है। यह ऐसे समय में आया है जब संरक्षण प्रयासों से शेरों की संख्या में सुधार दर्ज किया गया था। किसी भी संक्रामक बीमारी का प्रकोप इस दुर्लभ और संकटग्रस्त आबादी के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। वर्ष 2018 में भी गिर में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस और बेबेसिया के मिले-जुले संक्रमण से 23 शेरों की मौत हो गई थी — यह पृष्ठभूमि मौजूदा स्थिति को और संवेदनशील बनाती है।
आगे क्या होगा
अधिकारियों के अनुसार आइसोलेट किए गए 17 शेरों की चिकित्सा जारी है और उनकी स्थिति की नियमित निगरानी की जा रही है। 350 से अधिक शेरों की स्वास्थ्य जाँच का अभियान जारी रहेगा। विशेषज्ञ टीमें किलनी नियंत्रण के उपायों पर भी काम कर रही हैं ताकि संक्रमण की जड़ को खत्म किया जा सके।