गिर के 500 एशियाई शेरों को कृमिनाशक दवा दी गई, 8 मौतों के बाद स्थिति नियंत्रण में: मोढवाडिया
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने 31 मई 2026 को बताया कि गिर परिक्षेत्र में संदिग्ध संक्रमण से 8 एशियाई शेरों की मौत के बाद राज्य के वन विभाग ने लगभग 500 शेरों को कृमिनाशक (डीवॉर्मिंग) दवा दे दी है। मंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों का व्यक्तिगत दौरा करने के बाद पुष्टि की कि पिछले तीन दिनों में संक्रमण से जुड़ी कोई नई मौत दर्ज नहीं हुई है।
मुख्य घटनाक्रम
मोढवाडिया ने जामवाला रेस्क्यू सेंटर, बाबरिया जंगल एरिया और जसाधर एनिमल केयर सेंटर का ऑन-ग्राउंड निरीक्षण किया, जहाँ पशु चिकित्सकों की टीमें बीमारी के लक्षण दिखाने वाले शेरों पर नज़र रख रही हैं। फिलहाल 17 शेर विभिन्न स्थानों पर निगरानी में हैं।
मौतें गिर सोमनाथ जिले के गिर गढ़डा और अमरेली जिले के बाबरिया इलाके से रिपोर्ट की गईं — दोनों ही संरक्षित गिर अभयारण्य की सीमाओं के बाहर के क्षेत्र हैं। वन अधिकारियों ने प्रभावित स्थानों के 10 किलोमीटर के दायरे में शेरों को अलग कर दिया है और बड़े पैमाने पर एंटी-टिक व निगरानी अभियान शुरू किए हैं।
बचाव उपाय और प्रारंभिक कार्रवाई
मंत्री के अनुसार वन अधिकारियों ने 19 मई से ही एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए थे, जबकि यह स्थिति आधिकारिक रूप से 28 मई को सामने आई। उन्होंने कहा, 'उन बचाव के उपायों की वजह से अब हम कह सकते हैं कि स्थिति लगभग पूरी तरह से नियंत्रण में आ गई है।'
आस-पास के इलाकों में शेरों और उनके झुंडों को भी एहतियात के तौर पर निगरानी में रखा जा रहा है। प्रभावित जानवरों से एकत्र किए गए नमूने सटीक कारण की पुष्टि के लिए गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर भेजे गए हैं।
संभावित बीमारी और विशेषज्ञ सहयोग
शुरुआती जाँच में बेबेसियोसिस की ओर संकेत मिला है — यह एक परजीवी रोग है जो लाल रक्त कणिकाओं पर हमला करता है और जानवरों में कमज़ोरी, साँस लेने में कठिनाई तथा गंभीर बीमारी पैदा कर सकता है। हालाँकि आधिकारिक प्रयोगशाला पुष्टि अभी बाकी है।
जूनागढ़ वेटेरिनरी कॉलेज के विशेषज्ञ और इंडियन वेटेरिनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (IVRI) के विशेषज्ञ जाँच और उपचार प्रयासों में सहयोग कर रहे हैं। मोढवाडिया ने कहा, 'हमारे वन विभाग के अधिकारियों और स्टाफ के पास ऐसी विशेषज्ञता है जो न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया को मार्गदर्शन दे सकती है।'
2018 के प्रकोप से तुलना और चिंताएँ
वन्यजीव प्राधिकरण स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहा है, क्योंकि 2018 में गिर में एक बड़ा प्रकोप हुआ था जब कैनाइन डिस्टेंपर वायरस और बेबेसिया संक्रमण के संयोजन से शेरों की मौतें काफी बढ़ गई थीं। रिपोर्टों के अनुसार इसी संयोजन के दोबारा उभरने की संभावना को लेकर चिंता जताई जा रही है, हालाँकि अभी प्रयोगशाला पुष्टि का इंतजार है।
गौरतलब है कि 2025 में हुई राज्य की हालिया जनगणना के अनुसार गिर में एशियाई शेरों की आबादी 891 तक पहुँच गई है। यह प्रजाति विश्व में केवल गुजरात के जंगलों में ही जीवित है और गिर से आगे सौराष्ट्र क्षेत्र के कई जिलों में फैल चुकी है।
सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की राह
मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में राज्य सरकार एशियाई शेरों के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने जानवरों की सुरक्षा के लिए चौबीसों घंटे काम करने वाले वन कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की। प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद उपचार प्रोटोकॉल को और परिष्कृत किया जाएगा, जिससे इस दुर्लभ प्रजाति के दीर्घकालिक संरक्षण की दिशा तय होगी।