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गुजरात के तटीय एशियाई शेर 70% जंगली शिकार पर निर्भर, 'कंजर्वेशन' जर्नल की स्टडी में खुलासा

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गुजरात के तटीय एशियाई शेर 70% जंगली शिकार पर निर्भर, 'कंजर्वेशन' जर्नल की स्टडी में खुलासा

सारांश

गुजरात के तटीय शेर मवेशियों पर नहीं, जंगल पर जी रहे हैं — यह स्टडी सालों पुरानी धारणा को पलट देती है। नीलगाय उनके 51% भोजन का स्रोत है, और 100 से अधिक शेर गिर से बाहर तीन सैटेलाइट आबादियों में पल रहे हैं। यह संरक्षण के लिए उम्मीद की बड़ी खबर है।

मुख्य बातें

पीयर-रिव्यूड जर्नल 'कंजर्वेशन' में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, गुजरात के तटीय एशियाई शेर उपभोग किए गए बायोमास का 70% जंगली शिकार से प्राप्त करते हैं।
नीलगाय कुल बायोमास का 51% हिस्सा लेकर शेरों की सबसे प्रमुख शिकार प्रजाति बनी; जंगली सूअर दूसरे स्थान पर।
मार्च-अप्रैल 2024 में जूनागढ़, गिर सोमनाथ, अमरेली, भावनगर और पोरबंदर से 160 मल नमूनों का विश्लेषण किया गया।
2025 के 16वें लायन पॉपुलेशन एस्टिमेशन के अनुसार गुजरात में एशियाई शेरों की संख्या 891 हो गई है।
तटीय क्षेत्रों में 100 से अधिक शेर तीन सैटेलाइट आबादियों में रह रहे हैं — गिर के बाहर प्रजाति के विस्तार का प्रमाण।
वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया के अनुसार, शेर नीलगाय और जंगली सूअरों का शिकार कर किसानों की फसल क्षति भी कम कर रहे हैं।

पीयर-रिव्यूड अंतरराष्ट्रीय जर्नल 'कंजर्वेशन' में प्रकाशित एक नई वैज्ञानिक स्टडी के अनुसार, गुजरात के तटीय क्षेत्रों में रहने वाले एशियाई शेर पालतू पशुओं पर नहीं, बल्कि मुख्य रूप से जंगली शिकार पर निर्भर हैं। स्टडी में पाया गया कि इन शेरों द्वारा उपभोग किए जाने वाले कुल बायोमास का लगभग 70 प्रतिशत जंगली शिकार से आता है। यह निष्कर्ष उस पुरानी धारणा को चुनौती देता है कि यह प्रजाति मवेशियों की तलाश में गिर के जंगलों से बाहर फैली है।

स्टडी का तरीका और दायरा

शोधकर्ताओं ने मार्च और अप्रैल 2024 के दौरान जूनागढ़, गिर सोमनाथ, अमरेली, भावनगर और पोरबंदर के तटीय जिलों से 160 शेरों के मल के नमूने एकत्र कर उनका विश्लेषण किया। 'सौराष्ट्र, गुजरात, भारत के कोस्टल इकोसिस्टम में एशियाई शेरों का डाइटरी पैटर्न' शीर्षक वाली इस स्टडी के लेखकों में मोहन राम, आराधना साहू, नित्यानंद श्रीवास्तव, कृतज्ञ वदार, रोहित चौधरी और लहर झाला शामिल हैं।

मुख्य निष्कर्ष: नीलगाय सबसे बड़ा शिकार

जूनागढ़ सर्कल के कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स और स्टडी के सह-लेखक मोहन राम ने बताया कि शेरों के भोजन में जंगली शिकार का हिस्सा 64 प्रतिशत और पालतू पशुओं का हिस्सा 31 प्रतिशत रहा। उपभोग किए गए बायोमास के संदर्भ में जंगली शिकार की भागीदारी 70 प्रतिशत और पालतू पशुओं की 30 प्रतिशत रही। राम ने कहा, "सभी शिकार प्रजातियों में से, नीलगाय शेरों के भोजन का मुख्य जरिया बन गई, जो खाए गए कुल बायोमास का आधे से ज़्यादा — 51 प्रतिशत — हिस्सा थी। जंगली सूअर दूसरा सबसे बड़ा जंगली शिकार था, जबकि मवेशी सबसे बड़ा घरेलू शिकार थे।"

छोड़े गए मवेशी: एक विशेष संदर्भ

स्टडी में यह भी उल्लेख किया गया है कि शेरों के भोजन में शामिल अधिकांश मवेशी वे होते हैं जिन्हें उनके मालिकों द्वारा छोड़ दिया गया है — विशेष रूप से सौराष्ट्र के उन इलाकों में जहाँ अनुपयोगी पशुओं को खुला छोड़ने की प्रथा प्रचलित है। इन पशुओं में शिकारियों के प्रति सतर्कता की कमी उन्हें संरक्षित पशुओं की तुलना में आसान लक्ष्य बनाती है। शोधकर्ताओं के अनुसार यह निष्कर्ष उनकी प्रारंभिक अपेक्षाओं के विपरीत रहा, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि मानव-बहुल तटीय क्षेत्रों में जंगली शिकार की कमी के कारण शेर पालतू पशुओं पर अधिक निर्भर होंगे।

संरक्षण और किसानों के लिए महत्व

गुजरात के वन और पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने इस स्टडी के निष्कर्षों का स्वागत करते हुए कहा, "रिसर्च से पता चलता है कि गिर के जंगलों के बाहर शेरों की आबादी नीलगाय और जंगली सूअरों का शिकार करके किसानों को फायदा पहुँचा रही है। ये दोनों ही फसलों को नुकसान पहुँचाते हैं, ऐसे में इनकी आबादी को नियंत्रित करके शेर फसल क्षति को कम करने में मदद कर रहे हैं।" स्टडी के अनुसार गुजरात का तटीय पारिस्थितिकी तंत्र अब दक्षिण-पश्चिमी तट, दक्षिण-पूर्वी तट और भावनगर तट पर एशियाई शेरों की तीन महत्वपूर्ण सैटेलाइट आबादी को सहारा देता है, जिनमें कुल मिलाकर 100 से अधिक शेर होने का अनुमान है।

आबादी विस्तार और आगे की राह

2025 में किए गए 16वें लायन पॉपुलेशन एस्टिमेशन के अनुसार, राज्य में एशियाई शेरों की कुल आबादी 891 तक पहुँच गई है — जो गिर से परे इस प्रजाति के निरंतर विस्तार का प्रमाण है। शोधकर्ताओं ने ज़ोर देकर कहा कि संरक्षित वनों के बाहर एशियाई शेरों के दीर्घकालिक अस्तित्व के लिए जंगली शिकार की आबादी का संरक्षण अनिवार्य होगा। तटीय क्षेत्रों में नीलगाय और जंगली सूअरों की पर्याप्त उपस्थिति न केवल शेरों को टिकाए रखती है, बल्कि मानव-शेर टकराव को कम करने में भी सहायक हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर सैटेलाइट आबादियों की दीर्घकालिक व्यवहार्यता के लिए जंगली शिकार का संरक्षण और आवास की गुणवत्ता दोनों पर ठोस कार्ययोजना ज़रूरी है।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात के तटीय एशियाई शेरों की डाइट स्टडी में क्या पाया गया?
'कंजर्वेशन' जर्नल में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, गुजरात के तटीय एशियाई शेर उपभोग किए गए बायोमास का 70% जंगली शिकार से प्राप्त करते हैं, न कि पालतू पशुओं से। नीलगाय कुल बायोमास का 51% हिस्सा लेकर सबसे प्रमुख शिकार प्रजाति रही।
यह स्टडी कैसे की गई और किसने की?
मार्च-अप्रैल 2024 में जूनागढ़, गिर सोमनाथ, अमरेली, भावनगर और पोरबंदर के तटीय जिलों से 160 शेरों के मल नमूने एकत्र कर उनका विश्लेषण किया गया। स्टडी के लेखकों में मोहन राम, आराधना साहू, नित्यानंद श्रीवास्तव, कृतज्ञ वदार, रोहित चौधरी और लहर झाला शामिल हैं।
गुजरात में एशियाई शेरों की मौजूदा आबादी कितनी है?
2025 में किए गए 16वें लायन पॉपुलेशन एस्टिमेशन के अनुसार गुजरात में एशियाई शेरों की कुल संख्या 891 हो गई है। इनमें से 100 से अधिक शेर गिर के बाहर तटीय क्षेत्रों में तीन सैटेलाइट आबादियों में रह रहे हैं।
यह स्टडी किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया के अनुसार, तटीय शेर नीलगाय और जंगली सूअरों का शिकार करके किसानों की फसल क्षति कम करने में सहायक हो रहे हैं, क्योंकि ये दोनों प्रजातियाँ खेतों को नुकसान पहुँचाती हैं। इससे मानव-शेर टकराव को भी कम करने में मदद मिल सकती है।
क्या तटीय क्षेत्रों में शेरों का रहना टिकाऊ है?
स्टडी के अनुसार, गुजरात का तटीय पारिस्थितिकी तंत्र तीन सैटेलाइट आबादियों को सहारा देने में सक्षम है, बशर्ते जंगली शिकार की आबादी संरक्षित रहे। शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि संरक्षित वनों के बाहर एशियाई शेरों के दीर्घकालिक अस्तित्व के लिए नीलगाय और जंगली सूअरों जैसी प्रजातियों का संरक्षण अनिवार्य होगा।
राष्ट्र प्रेस
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