पुरी रथ यात्रा 2025: लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का सैलाब, 16 से 24 जुलाई तक नौ दिवसीय उत्सव
सारांश
मुख्य बातें
पुरी (ओडिशा) में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा 16 जुलाई से आरंभ होकर 24 जुलाई तक चलेगी। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से शुरू हुए इस नौ दिवसीय महोत्सव में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा विशाल रथों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण पर निकले, और लाखों श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए उमड़ पड़े। भक्ति और आस्था के इस अनूठे संगम ने पुरी की सड़कों को एक विशाल तीर्थस्थल में बदल दिया।
श्रद्धालुओं का उमड़ा जनसैलाब
रथ यात्रा के दौरान देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालु पुरी की गलियों में एकत्रित हुए। भक्ति में भाव-विभोर श्रद्धालुओं के चेहरों पर आँसू और मुस्कान का अद्भुत मिश्रण देखने को मिला। हंगरी से आई श्रद्धालु राधिका लीला देवी ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, "यहां श्रद्धालुओं को देखकर मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उनके चेहरों पर अलग-अलग भाव दिखाई देते हैं। कोई रो रहा है तो कोई मुस्कुरा रहा है।"
राधिका लीला देवी ने भगवान जगन्नाथ की तुलना एक शक्तिशाली चुंबक से करते हुए कहा, "भगवान सबसे शक्तिशाली चुंबक की तरह हैं। उनसे अधिक शक्तिशाली कुछ भी नहीं है। भगवान ने पूरी दुनिया को अपनी ओर आकर्षित कर रखा है।" उन्होंने बताया कि वे पुरी पाँच-छह बार आ चुकी हैं, किंतु यह उनकी दूसरी रथ यात्रा है।
विदेशी भक्तों की आस्था और अनुभव
राधिका लीला देवी ने यह भी कहा, "मैं सभी से कहना चाहती हूं कि हर किसी को यहां कम से कम एक बार ज़रूर आना चाहिए, खासकर रथ यात्रा के दौरान। जब रथ यात्रा में भगवान स्वयं बाहर निकलकर सभी भक्तों को दर्शन देते हैं, तो वह अनुभव बिल्कुल अलग होता है।" उन्होंने पहली रथ यात्रा के दौरान भगवान से किए वादे का भी उल्लेख किया — कि यदि भगवान की इच्छा होगी, तो वे आगे कोई भी रथ यात्रा नहीं छोड़ेंगी।
आम जनता पर असर और भक्तों की प्रार्थनाएँ
एक अन्य श्रद्धालु ने कहा, "जब मैं भगवान के दर्शन करती हूं तो लगता है कि जीवन का सारा दुख-दर्द समाप्त हो गया है।" उन्होंने भगवान से विश्व शांति और सभी चल रहे संघर्षों के अंत की प्रार्थना की। एक अन्य भक्त ने कहा, "भगवान सभी को बिना किसी भेदभाव के दर्शन दे रहे हैं, जिससे हर श्रद्धालु उनके दर्शन का सौभाग्य प्राप्त कर रहा है।"
प्रशासन की व्यवस्था
भारी भीड़ के बावजूद प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्था की श्रद्धालुओं ने सराहना की। श्रद्धालुओं के अनुसार, बेहतर भीड़ प्रबंधन के कारण उन्हें अधिक कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ा।
रथ यात्रा का महत्व
गौरतलब है कि पुरी रथ यात्रा न केवल भारत, बल्कि विश्वभर में हिंदू आस्था के सबसे बड़े उत्सवों में से एक मानी जाती है। यह ऐसे समय में आई है जब देश-विदेश से तीर्थयात्रियों की संख्या हर वर्ष बढ़ रही है, जो इस उत्सव की वैश्विक आध्यात्मिक पहुँच को रेखांकित करती है। 24 जुलाई को यात्रा के समापन तक भगवान के दर्शन का यह सिलसिला जारी रहेगा।