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पुरी रथयात्रा 2025: बारिश में भी लाखों भक्तों की आस्था अटल, 'जय जगन्नाथ' से गूंजा पूरा शहर

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पुरी रथयात्रा 2025: बारिश में भी लाखों भक्तों की आस्था अटल, 'जय जगन्नाथ' से गूंजा पूरा शहर

सारांश

बारिश रुकी नहीं, भक्त डिगे नहीं — पुरी में 16 जुलाई को जगन्नाथ रथयात्रा का दिव्य दृश्य लाखों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमाण बना। मंदिर सेवायत के अनुसार इतनी शीघ्रता से नीतियाँ पहले कभी पूरी नहीं हुईं — जैसे महाप्रभु स्वयं भक्तों से मिलने को आतुर हों।

मुख्य बातें

16 जुलाई को पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु एकत्रित हुए।
दिनभर भारी बारिश के बावजूद भक्तों का उत्साह अटूट रहा; श्रद्धालुओं ने बारिश को 'प्रभु का आशीर्वाद' बताया।
चुनरा सेवायत शरत मोहंती के अनुसार इस बार मंदिर की सभी धार्मिक नीतियाँ असाधारण शीघ्रता से पूरी हुईं।
पाहांडी बिजे परंपरा के तहत चक्रराज सुदर्शन , बलभद्र , सुभद्रा और अंत में जगन्नाथ रथ पर विराजमान हुए।
कुछ हिस्सों में जलभराव की स्थिति बनी; प्रशासन , सुरक्षाकर्मी और स्वयंसेवक व्यवस्था बनाए रखने में जुटे रहे।

पुरी में 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा के अवसर पर लाखों श्रद्धालु उमड़ पड़े। दिनभर रुक-रुककर होती रही भारी बारिश भक्तों की आस्था को डिगाने में नाकाम रही — भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालु बड़दांड पर जमा हो गए। 'जय जगन्नाथ' के जयकारों से पूरा शहर गूंज उठा।

मंदिर में अनुष्ठान: तेज़ रफ़्तार से पूरी हुईं सभी नीतियाँ

श्री जगन्नाथ मंदिर के चुनरा सेवायत शरत मोहंती ने बताया कि इस बार मंदिर की सभी धार्मिक नीतियाँ असाधारण रूप से शीघ्रता से पूरी की गईं। उन्होंने कहा, 'ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि मंदिर की सभी नीतियाँ इतनी जल्दी पूरी हुई हों।' उनके अनुसार ऐसा प्रतीत होता है कि स्वयं महाप्रभु की इच्छा है कि वे जल्द से जल्द मंदिर से बाहर निकलकर लाखों भक्तों को दर्शन दें।

मंगला आरती के बाद भगवान की स्नान पूजा और अन्य विधियाँ संपन्न हुईं। इसके बाद भगवान का श्रृंगार और विशेष वेश धारण कराया गया। गोपाल वल्लभ भोग और सकाल धूप यानी राजभोग के रूप में खिचड़ी भोग अर्पित किया गया। तत्पश्चात मंगला अर्पण कर रथारोहण की प्रक्रिया आरंभ हुई।

पाहांडी बिजे: क्रमबद्ध विग्रह-यात्रा की परंपरा

शरत मोहंती ने बताया कि पाहांडी बिजे की परंपरा के अनुसार भगवान के विग्रहों को क्रम से मंदिर से बाहर लाया जाता है। सबसे पहले चक्रराज सुदर्शन, फिर भगवान बलभद्र, माता सुभद्रा और अंत में भगवान जगन्नाथ रथ पर विराजमान होते हैं। जैसे ही महाप्रभु बाहर आएँगे, घंटों, मृदंग और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों की ध्वनि से पूरा वातावरण गूंज उठेगा।

भक्तों की आवाज़: 'यह बारिश नहीं, प्रभु का आशीर्वाद है'

रथयात्रा में शामिल एक महिला श्रद्धालु ने बताया कि बचपन से ही उन्हें भगवान जगन्नाथ की कृपा से पुरी आने और रथयात्रा देखने का सौभाग्य मिलता रहा है। कक्षा 10वीं के बाद से हर वर्ष उन्हें रथ खींचने और दर्शन करने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा, 'मैं भीड़ देखने नहीं, भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने आती हूँ — यह कोई मेला नहीं, बल्कि भगवान और भक्तों का दिव्य मिलन है।'

मुंबई से आए एक भक्त ने कहा कि भगवान जगन्नाथ के प्रति प्रेम और आस्था ही उन्हें यहाँ खींच लाई। कई श्रद्धालुओं ने पहली बार पुरी आकर आध्यात्मिक शांति का अनुभव होने की बात कही, जबकि कुछ परिवार दूसरी बार यहाँ पहुँचे और बताया कि बिना किसी पूर्व योजना के भगवान की कृपा से वे रथयात्रा में शामिल हो सके।

ओडिसी कलाकारों की भावनाएँ और प्रशासनिक व्यवस्था

रथयात्रा में शामिल ओडिसी नृत्य कलाकारों ने भी अपनी भावनाएँ साझा कीं। एक कलाकार ने कहा कि भगवान जगन्नाथ के सामने सेवा करने का अवसर उनके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है। एक अन्य कलाकार ने बताया कि वे मंदिर की पारंपरिक देवदासी नृत्य परंपरा से जुड़ी हैं और उसी परंपरा के अनुरूप पारंपरिक वेशभूषा में भगवान की सेवा कर रही हैं।

लगातार बारिश के कारण पुरी शहर के कुछ हिस्सों में जलभराव की स्थिति बनी। हालाँकि प्रशासन ने व्यवस्था बनाए रखने के भरपूर प्रयास किए। सुरक्षाकर्मी, स्वयंसेवक और प्रशासनिक अधिकारी श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने में जुटे रहे। यह रथयात्रा एक बार फिर यह सिद्ध करती है कि आस्था के आगे प्रकृति की चुनौतियाँ भी बौनी पड़ जाती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जलभराव और सीमित अवसंरचना के बीच सुरक्षित आयोजन सुनिश्चित करना एक बड़ी प्रशासनिक परीक्षा है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है। इस वर्ष मंदिर नीतियों का असाधारण रूप से शीघ्र पूरा होना उल्लेखनीय है, परंतु भविष्य में तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या के मद्देनज़र बुनियादी ढाँचे में दीर्घकालिक निवेश की ज़रूरत पर भी ध्यान देना आवश्यक है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जगन्नाथ रथयात्रा 2025 कब और कहाँ आयोजित हुई?
जगन्नाथ रथयात्रा 2025 का आयोजन 16 जुलाई को ओडिशा के पुरी में हुआ। इस अवसर पर लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन के लिए बड़दांड पर एकत्रित हुए।
रथयात्रा में बारिश के बावजूद भक्त क्यों आए?
श्रद्धालुओं का कहना है कि रथयात्रा के दौरान बारिश कोई बाधा नहीं बल्कि प्रभु का आशीर्वाद है। भक्त पहले से इसके लिए तैयार रहते हैं और उनके लिए भगवान के दर्शन एवं रथ खींचने का अवसर सर्वोपरि है।
पाहांडी बिजे परंपरा क्या है?
पाहांडी बिजे वह परंपरा है जिसमें भगवान के विग्रहों को क्रम से मंदिर से बाहर लाया जाता है। पहले चक्रराज सुदर्शन, फिर बलभद्र, माता सुभद्रा और अंत में भगवान जगन्नाथ रथ पर विराजमान होते हैं।
इस वर्ष मंदिर की धार्मिक नीतियाँ इतनी जल्दी कैसे पूरी हुईं?
चुनरा सेवायत शरत मोहंती के अनुसार इस बार मंगला आरती, स्नान पूजा, श्रृंगार, गोपाल वल्लभ भोग और सकाल धूप सहित सभी नीतियाँ असाधारण शीघ्रता से संपन्न हुईं। उन्होंने कहा कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ और ऐसा प्रतीत होता है कि स्वयं महाप्रभु की इच्छा थी कि वे जल्द भक्तों को दर्शन दें।
रथयात्रा के दौरान प्रशासन ने क्या व्यवस्था की?
भारी बारिश के कारण पुरी के कुछ हिस्सों में जलभराव हुआ, लेकिन प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित रखा। सुरक्षाकर्मी, स्वयंसेवक और प्रशासनिक अधिकारी श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने में लगातार जुटे रहे।
राष्ट्र प्रेस
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