डीजल-एटीएफ निर्यात पर विंडफॉल टैक्स बढ़ा, पेट्रोल पर घटाया — अमेरिका-ईरान तनाव का असर
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 16 जुलाई 2026 से डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स में तत्काल वृद्धि की है, जबकि पेट्रोल पर निर्यात शुल्क में कटौती की गई है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, यह संशोधन अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आई तेज़ उछाल के जवाब में किया गया है।
नई दरें: क्या बढ़ा, क्या घटा
वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, डीजल पर निर्यात शुल्क पहले के ₹8.5 प्रति लीटर से बढ़कर अब ₹15.5 प्रति लीटर हो गया है। एटीएफ पर निर्यात शुल्क ₹7.5 प्रति लीटर से बढ़कर ₹14.5 प्रति लीटर कर दिया गया है। दूसरी ओर, पेट्रोल पर निर्यात शुल्क ₹4 प्रति लीटर से घटाकर ₹2.5 प्रति लीटर किया गया है।
अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतें
यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सभी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी पुनः लागू कर दी है, जिसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी बुनियादी ढाँचे पर जवाबी हमले किए हैं। इन घटनाओं के बाद बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत $85 प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है।
पिछली समीक्षा से तुलना
गौरतलब है कि इसी महीने की शुरुआत में सरकार ने इन दरों में विपरीत बदलाव किया था। उस समय पेट्रोल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) को ₹1.5 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹4 प्रति लीटर किया गया था, जबकि डीजल का शुल्क ₹14 प्रति लीटर से घटाकर ₹8.5 प्रति लीटर और एटीएफ का शुल्क ₹12.5 प्रति लीटर से घटाकर ₹7.5 प्रति लीटर किया गया था। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक रिफाइनिंग मार्जिन में तेज़ उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
विंडफॉल टैक्स की समीक्षा प्रक्रिया
सरकार घरेलू स्तर पर उत्पादित कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स की नियमित अंतराल पर समीक्षा करती है। इसका उद्देश्य शुल्क दरों को अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन में होने वाले बदलावों के अनुरूप समायोजित करना है।
आगे क्या
मध्य पूर्व संघर्ष के थमने के कोई तत्काल संकेत नहीं हैं, इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार अगले पखवाड़े में पुनः दरों की समीक्षा कर सकती है। घरेलू रिफाइनरियों और एयरलाइन क्षेत्र पर बढ़े हुए एटीएफ शुल्क के परिचालन प्रभाव पर उद्योग जगत की नज़र बनी रहेगी।