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न्यूजीलैंड में एच5एन1 बर्ड फ्लू की पहली दस्तक, महीनों में स्थानिक बीमारी बनने की आशंका

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न्यूजीलैंड में एच5एन1 बर्ड फ्लू की पहली दस्तक, महीनों में स्थानिक बीमारी बनने की आशंका

सारांश

न्यूजीलैंड में एच5एन1 बर्ड फ्लू की पहली दस्तक हुई है — वेलिंगटन के पेटोन बीच पर एक जंगली समुद्री पक्षी में वायरस मिला। विशेषज्ञों ने चेताया है कि एक बार वन्यजीवों में फैला तो रोकना मुश्किल होगा, और काकापो जैसी दुर्लभ प्रजातियाँ विलुप्ति के खतरे में पड़ सकती हैं।

मुख्य बातें

वेलिंगटन के पेटोन बीच पर एक जंगली समुद्री पक्षी में एच5एन1 एवियन इन्फ्लूएंजा की पुष्टि — न्यूजीलैंड में जंगली पक्षियों में यह पहला मामला।
मिनिस्ट्री फॉर प्राइमरी इंडस्ट्रीज की चीफ वेटेरिनरी ऑफिसर मैरी वैन एंडेल ने कहा — वायरस वन्यजीवों में फैला तो खत्म करना मुश्किल होगा।
ऑकलैंड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर डायने ब्रंटन ने कहा — भौगोलिक अलगाव वायरस को नहीं रोक सकता।
कंजर्वेशन डिपार्टमेंट ने काकापो और ताकाहे सहित 5 लुप्तप्राय प्रजातियों के 300 पक्षियों का टीकाकरण शुरू किया।
मैसी यूनिवर्सिटी के नाइजेल फ्रेंच ने चेताया — फेयरी टर्न जैसी दुर्लभ प्रजातियाँ विलुप्त हो सकती हैं।
विशेषज्ञों ने त्वरित जीनोमिक सीक्वेंसिंग और वन्यजीव निगरानी को अनिवार्य बताया।

न्यूजीलैंड में 16 जुलाई 2026 को एक जंगली समुद्री पक्षी में एच5एन1 एवियन इन्फ्लूएंजा के नए स्ट्रेन की पुष्टि के बाद विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह वायरस कुछ ही महीनों में देश में स्थानिक बीमारी का रूप ले सकता है। यह जंगली पक्षियों में इस वायरस का न्यूजीलैंड में पहला दर्ज मामला है, और अधिकारियों ने कहा है कि एक बार वायरस वन्यजीवों में फैल गया तो उसे नियंत्रित करना अत्यंत कठिन होगा।

पहला मामला कहाँ और कैसे मिला

बुधवार को राजधानी वेलिंगटन के पेटोन बीच पर पाए गए एक समुद्री पक्षी में एच5 वायरस की प्रयोगशाला में पुष्टि हुई। मिनिस्ट्री फॉर प्राइमरी इंडस्ट्रीज की चीफ वेटेरिनरी ऑफिसर मैरी वैन एंडेल ने रेडियो न्यूजीलैंड (RNZ) को बताया कि अगर यह वायरस जंगली जीवों में फैल गया, तो इसे समाप्त करना मुश्किल होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वायरस पक्षियों से इंसानों में फैल सकता है, लेकिन ऐसे मामले बहुत दुर्लभ हैं और खाद्य सुरक्षा पर इसका कोई प्रत्यक्ष असर नहीं है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

ऑकलैंड यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ बायोलॉजिकल साइंसेज की प्रोफेसर डायने ब्रंटन ने कहा, 'न्यूजीलैंड का अलग-थलग होना इस जानलेवा बर्ड वायरस को नहीं रोक पाएगा।' उन्होंने कहा कि अभी जंगली जीवों में बड़े पैमाने पर मौत या स्थानीय पक्षियों के बीच वायरस के फैलने का कोई प्रमाण नहीं है, लेकिन समय के साथ एच5एन1 के यहाँ पाँव पसारने की आशंका वास्तविक है।

ओटागो यूनिवर्सिटी की वायरोलॉजिस्ट प्रोफेसर जेम्मा जियोघेगन ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया और दुनिया के अन्य हिस्सों में इस वायरस के प्रसार के बाद से ही न्यूजीलैंड इसके आगमन की तैयारी कर रहा था। उन्होंने जंगली पक्षियों की त्वरित जाँच, जीनोमिक सीक्वेंसिंग और कड़ी निगरानी को अनिवार्य बताया।

लुप्तप्राय प्रजातियों पर खतरा

मैसी यूनिवर्सिटी के महामारी विज्ञानी नाइजेल फ्रेंच ने RNZ को बताया कि यदि वायरस फैलता है, तो छोटी और लुप्तप्राय आबादी वाले पक्षी — जिनमें अत्यंत दुर्लभ फेयरी टर्न भी शामिल है — विलुप्त होने के कगार पर आ सकते हैं। गौरतलब है कि न्यूजीलैंड अपनी अनूठी और स्थानिक पक्षी प्रजातियों के लिए जैव विविधता की दृष्टि से विश्व में विशेष स्थान रखता है, और एच5एन1 का यहाँ प्रसार एक अपूरणीय पारिस्थितिक क्षति का कारण बन सकता है।

सरकार की प्रतिक्रिया और तैयारी

तैयारी के तहत कंजर्वेशन डिपार्टमेंट ने न्यूजीलैंड की पाँच सबसे लुप्तप्राय प्रजातियों के 300 मुख्य प्रजनन पक्षियों का टीकाकरण शुरू कर दिया है, जिनमें काकापो और ताकाहे शामिल हैं। यह कदम इस बात का संकेत है कि अधिकारी वायरस के संभावित प्रसार को लेकर गंभीरता से सतर्क हैं।

आगे क्या होगा

विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले हफ्तों में वन्यजीवों की व्यापक निगरानी और नमूना-संग्रह की दर बढ़ाई जाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर एच5एन1 का प्रसार अभूतपूर्व गति से हो रहा है और कई देशों में पोल्ट्री उद्योग को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। न्यूजीलैंड के लिए अगले कुछ महीने यह तय करने में निर्णायक होंगे कि क्या यह वायरस यहाँ स्थायी रूप से पाँव जमा पाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

प्रवासी पक्षियों के सामने निरर्थक साबित हो रहा है। असली चिंता यह है कि काकापो और ताकाहे जैसी प्रजातियाँ पहले से ही इतनी कम संख्या में हैं कि एक भी महामारी की लहर उन्हें अपूरणीय क्षति पहुँचा सकती है। टीकाकरण की पहल सराहनीय है, लेकिन सैकड़ों की संख्या में बिखरे जंगली पक्षियों की निगरानी और सुरक्षा एक ऐसी चुनौती है जिसके लिए संसाधन और राजनीतिक इच्छाशक्ति दोनों की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता चाहिए।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

न्यूजीलैंड में एच5एन1 बर्ड फ्लू का पहला मामला कहाँ मिला?
वेलिंगटन के पेटोन बीच पर बुधवार को पाए गए एक जंगली समुद्री पक्षी में एच5एन1 एवियन इन्फ्लूएंजा की पुष्टि हुई। यह जंगली पक्षियों में न्यूजीलैंड का पहला दर्ज मामला है।
क्या एच5एन1 बर्ड फ्लू इंसानों के लिए खतरनाक है?
मिनिस्ट्री फॉर प्राइमरी इंडस्ट्रीज की चीफ वेटेरिनरी ऑफिसर मैरी वैन एंडेल के अनुसार, वायरस पक्षियों से इंसानों में फैल सकता है, लेकिन ऐसे मामले बहुत दुर्लभ हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इससे खाद्य सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ता।
न्यूजीलैंड की लुप्तप्राय पक्षी प्रजातियों पर क्या खतरा है?
मैसी यूनिवर्सिटी के महामारी विज्ञानी नाइजेल फ्रेंच ने चेताया है कि यदि वायरस फैलता है, तो फेयरी टर्न जैसी अत्यंत दुर्लभ और छोटी आबादी वाली प्रजातियाँ विलुप्त हो सकती हैं। काकापो और ताकाहे जैसी प्रजातियाँ पहले से ही संकटग्रस्त हैं।
न्यूजीलैंड सरकार ने एच5एन1 से बचाव के लिए क्या कदम उठाए हैं?
कंजर्वेशन डिपार्टमेंट ने पाँच सबसे लुप्तप्राय प्रजातियों के 300 मुख्य प्रजनन पक्षियों का टीकाकरण शुरू कर दिया है। इसके अलावा विशेषज्ञों ने जंगली पक्षियों की त्वरित जाँच, जीनोमिक सीक्वेंसिंग और कड़ी निगरानी की सिफारिश की है।
क्या न्यूजीलैंड का भौगोलिक अलगाव एच5एन1 को रोक सकता है?
ऑकलैंड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर डायने ब्रंटन ने स्पष्ट रूप से कहा है कि न्यूजीलैंड का अलग-थलग होना इस वायरस को नहीं रोक पाएगा। ओटागो यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर जेम्मा जियोघेगन ने भी कहा कि ऑस्ट्रेलिया और विश्व में फैलाव के बाद न्यूजीलैंड पहले से तैयारी कर रहा था, जो इस खतरे की अनिवार्यता को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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