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भारत-अमेरिका व्यापार समझौता दोनों देशों के लिए समान रूप से लाभकारी हो: पूर्व गवर्नर टेरी मैकऑलिफ

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भारत-अमेरिका व्यापार समझौता दोनों देशों के लिए समान रूप से लाभकारी हो: पूर्व गवर्नर टेरी मैकऑलिफ

सारांश

वर्जीनिया के पूर्व गवर्नर टेरी मैकऑलिफ ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर साफ कहा — जीत एकतरफा नहीं हो सकती। अपने कार्यकाल में 35 विदेशी व्यापार मिशन और 1,100 कंपनियों को वर्जीनिया लाने वाले इस नेता ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय को अमेरिकी प्रगति का आधार बताया और ट्रंप की आव्रजन नीति की आलोचना की।

मुख्य बातें

वर्जीनिया के पूर्व गवर्नर टेरी मैकऑलिफ ने 16 जुलाई को वाशिंगटन में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का समर्थन किया।
मैकऑलिफ ने कहा — समझौता दोनों पक्षों के लिए लाभकारी हो, एकतरफा समझौते अंततः नुकसानदेह होते हैं।
उन्होंने अपने चार वर्षीय गवर्नर कार्यकाल में 35 विदेशी व्यापार मिशनों का नेतृत्व किया और 1,100 कंपनियों को वर्जीनिया में निवेश के लिए आकर्षित किया।
भारतीय-अमेरिकी समुदाय की उद्यमिता, प्रौद्योगिकी और परोपकार में भूमिका को 'असाधारण' बताया।
ट्रंप प्रशासन की आव्रजन-विरोधी बयानबाजी को 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया।

वर्जीनिया के पूर्व गवर्नर टेरी मैकऑलिफ ने 16 जुलाई को वाशिंगटन में दिए एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि भारत और अमेरिका के बीच किसी भी व्यापार समझौते से दोनों देशों के श्रमिकों और व्यापार को समान रूप से लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने एकतरफा समझौतों को दीर्घकालिक रूप से नुकसानदेह बताया।

समझौते पर मैकऑलिफ का स्पष्ट रुख

मैकऑलिफ ने कहा, "आपको ऐसा व्यापार समझौता करना चाहिए जो दोनों पक्षों के लिए अच्छा हो। ऐसा समझौता कभी नहीं किया जा सकता जिसमें केवल एक पक्ष विजेता बनकर उभरे, क्योंकि अंततः ऐसी स्थिति में नुकसान होगा।" उन्होंने जोड़ा, "समझौते से दोनों पक्षों को अच्छा महसूस होना चाहिए और यह दोनों के हित में काम करना चाहिए। जब ऐसा होता है, तो दोनों देशों की प्रगति होती है और सभी को लाभ मिलता है।"

2014 से 2018 तक वर्जीनिया के गवर्नर रहे इस डेमोक्रेट नेता ने वैश्विक व्यापार को आर्थिक समृद्धि का अनिवार्य आधार बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि जो देश वैश्विक व्यापार में सक्रिय भागीदारी नहीं करेंगे, वे पीछे छूट जाएंगे और उनके नागरिकों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

गवर्नर कार्यकाल का व्यापारिक अनुभव

मैकऑलिफ ने अपने चार वर्षीय गवर्नर कार्यकाल के दौरान 35 विदेशी व्यापार मिशनों का नेतृत्व करने और 1,100 कंपनियों को वर्जीनिया में निवेश के लिए आकर्षित करने का उल्लेख किया। उनके अनुसार इन निवेशों से उत्तरी वर्जीनिया के साथ-साथ राज्य के दक्षिण-पश्चिमी ग्रामीण इलाकों में भी रोजगार के अवसर उत्पन्न हुए। यह अनुभव उन्हें वैश्विक व्यापार के व्यावहारिक पक्ष से जोड़ता है।

भारतीय-अमेरिकी समुदाय की सराहना

पूर्व गवर्नर ने उद्यमिता, प्रौद्योगिकी और परोपकार के क्षेत्र में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के योगदान की विशेष सराहना की। उन्होंने कहा, "रोजगार सृजन और उद्यमिता क्षेत्र में उनका योगदान असाधारण रहा है। लेकिन बात केवल उद्यमिता और रोजगार तक सीमित नहीं है, भारतीय-अमेरिकी समुदाय समाज को भी बहुत कुछ लौटाता है।"

मैकऑलिफ ने यह भी कहा कि भारतीय-अमेरिकियों ने अमेरिका को प्रौद्योगिकी और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके शब्दों में, "अमेरिका में हम सभी उन प्रवासियों के ऋणी हैं, विशेष रूप से भारतीय-अमेरिकियों के, जिन्होंने यहां व्यवसाय स्थापित किए और समाज सेवा व परोपकार में उल्लेखनीय योगदान दिया।"

ट्रंप प्रशासन की आव्रजन नीति पर आलोचना

मैकऑलिफ ने ट्रंप प्रशासन की आव्रजन संबंधी बयानबाजी की आलोचना करते हुए कहा, "दुर्भाग्य से वर्तमान प्रशासन के दौरान प्रवासियों के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमाएं सुरक्षित होनी चाहिए और प्रवेश कानूनी माध्यम से हो, परंतु अमेरिका की विविधता उसकी सबसे बड़ी ताकत है।

उन्होंने कहा, "हम एक 'मेल्टिंग पॉट' हैं और यही विविधता हमें और अधिक मजबूत बनाती है।" यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के साथ-साथ H-1B वीजा और भारतीय प्रवासियों से जुड़े मुद्दे भी द्विपक्षीय संबंधों के केंद्र में हैं।

आगे की राह

मैकऑलिफ के बयान ऐसे समय में आए हैं जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है। गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ा है, और किसी औपचारिक समझौते से इसे और गति मिल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित व्यापार नीति दोनों देशों के हित में होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली अहमियत संदर्भ में है — यह वह दौर है जब ट्रंप प्रशासन भारत पर टैरिफ दबाव बना रहा है और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता नाजुक मोड़ पर है। एक डेमोक्रेट नेता का यह स्वर व्हाइट हाउस की 'अमेरिका फर्स्ट' लाइन से सीधे टकराता है। गौरतलब यह भी है कि मैकऑलिफ खुद 2025 में संघीय भ्रष्टाचार मामले में दोषी पाए जा चुके हैं, जो उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता को प्रभावित करता है — इस पहलू को मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नजरअंदाज करती है। भारत के लिए असली सवाल यह है कि क्या ऐसे बयान द्विपक्षीय वार्ता में कोई व्यावहारिक वजन रखते हैं, या ये केवल राजनीतिक टिप्पणी हैं।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टेरी मैकऑलिफ ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर क्या कहा?
मैकऑलिफ ने कहा कि भारत-अमेरिका के बीच कोई भी व्यापार समझौता दोनों देशों के श्रमिकों और व्यापार के लिए समान रूप से लाभकारी होना चाहिए। उनके अनुसार एकतरफा समझौते दीर्घकालिक रूप से नुकसानदेह होते हैं।
टेरी मैकऑलिफ कौन हैं?
टेरी मैकऑलिफ 2014 से 2018 तक अमेरिकी राज्य वर्जीनिया के गवर्नर रहे डेमोक्रेट नेता हैं। अपने कार्यकाल में उन्होंने 35 विदेशी व्यापार मिशनों का नेतृत्व किया और 1,100 कंपनियों को वर्जीनिया में निवेश के लिए आकर्षित किया।
मैकऑलिफ ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय के बारे में क्या कहा?
मैकऑलिफ ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय के उद्यमिता, प्रौद्योगिकी और परोपकार में योगदान को 'असाधारण' बताया। उन्होंने कहा कि इस समुदाय ने अमेरिका को प्रौद्योगिकी क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मैकऑलिफ ने ट्रंप प्रशासन की आव्रजन नीति पर क्या कहा?
मैकऑलिफ ने ट्रंप प्रशासन की आव्रजन-विरोधी बयानबाजी को 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका की विविधता उसकी सबसे बड़ी ताकत है और प्रवासियों — विशेषकर भारतीय-अमेरिकियों — ने देश को मजबूत बनाया है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की मौजूदा स्थिति क्या है?
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ा है, हालांकि टैरिफ और बाजार पहुंच जैसे मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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