भारत-अमेरिका व्यापार समझौता बरकरार: राजदूत सर्जियो गोर ने फर्जी खबरों को किया खारिज
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने 13 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता किसी भी स्तर पर टूटा नहीं है और दोनों देश सक्रिय रूप से बातचीत जारी रखे हुए हैं। उन्होंने उन भ्रामक मीडिया रिपोर्टों को सिरे से नकार दिया जिनमें दावा किया गया था कि भारत ने अमेरिका के साथ जल्द समझौता करने के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है।
राजदूत का एक्स पर सीधा जवाब
राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'फर्जी खबरों से सावधान! किसी ने भी किसी चीज को ठुकराया नहीं है। दोनों पक्षों के बीच हुई बैठकें काफी रचनात्मक रहीं और दोनों ने व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। हम अब भी इस मुद्दे पर लगातार बातचीत कर रहे हैं और सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं।' गोर ने उस रिपोर्ट को रीपोस्ट करते हुए उसे फर्जी करार दिया जिसमें यह दावा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नए व्यापारिक साझेदारों से मिले भरोसे और घरेलू राजनीतिक लाभों के चलते अमेरिका के प्रस्ताव को टालने की स्थिति में हैं। उन्होंने संबंधित मीडिया संस्थान को सीधे संदेश देते हुए कहा, 'आप बेहतर कर सकते हैं।'
वाणिज्य सचिव का आश्वासन
केंद्रीय वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'हमें बातचीत में कोई चुनौती नहीं दिख रही है और बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है। दोनों पक्ष सकारात्मक हैं। भारत-अमेरिका फ्रेमवर्क ट्रेड डील सही समय पर साइन किए जाने के लिए तैयार है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध मज़बूत हो रहे हैं, जिसमें अमेरिका से ऊर्जा आयात भी शामिल है।
वार्ता की मौजूदा स्थिति
इस महीने की शुरुआत में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बताया था कि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की बातचीत अंतिम दौर में पहुँच चुकी है। उनके अनुसार अधिकतर अहम मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और दोनों पक्ष एक ऐसे समझौते पर काम कर रहे हैं जो नई दिल्ली को उसके प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले रणनीतिक बढ़त दिलाए। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार परिदृश्य में अमेरिकी टैरिफ नीतियों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
गलत सूचना और कूटनीतिक संदेश
गौरतलब है कि किसी देश के राजदूत द्वारा सार्वजनिक रूप से किसी मीडिया रिपोर्ट को 'फर्जी' बताना और संबंधित संस्थान को सीधे जवाब देना कूटनीतिक दृष्टि से असामान्य कदम माना जाता है। इससे स्पष्ट होता है कि अमेरिकी पक्ष इस समझौते को लेकर जनता में बन रही नकारात्मक धारणा को लेकर कितना सतर्क है। आलोचकों का कहना है कि व्यापार वार्ता की संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए दोनों पक्षों को सूचना प्रबंधन पर अधिक ध्यान देना होगा।
आगे क्या
दोनों देशों के अधिकारियों के बयानों से संकेत मिलता है कि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता निकट भविष्य में अंतिम रूप ले सकता है। वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार समझौते पर हस्ताक्षर की समयसीमा को लेकर जल्द आधिकारिक घोषणा हो सकती है। तब तक दोनों पक्षों की ओर से बातचीत जारी रहने की पुष्टि की गई है।