27 जून 2026
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भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में, राजदूत सर्जियो गोर बोले — 'कुछ हफ्तों या महीनों में होगा पूरा'

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भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में, राजदूत सर्जियो गोर बोले — 'कुछ हफ्तों या महीनों में होगा पूरा'

सारांश

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अब सिर्फ कागज़ी औपचारिकता की दूरी पर है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के अनुसार, 18 महीने की वार्ता के बाद दोनों पक्ष अंतिम मसौदे की भाषा पर काम कर रहे हैं। यह उस रणनीतिक साझेदारी का अहम पड़ाव है जिसे मोदी-ट्रंप की व्यक्तिगत दोस्ती ने गति दी है।

मुख्य बातें

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने 27 जून 2026 को कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता कुछ हफ्तों या महीनों में पूरा होने की उम्मीद है।
दोनों पक्ष अब केवल अंतिम मसौदे की कानूनी भाषा को अंतिम रूप देने पर केंद्रित हैं; कुछ मुद्दे अभी भी सहमति के इंतजार में हैं।
राजदूत गोर और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने नई दिल्ली में मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की।
गोर ने बताया कि यह वार्ता केवल 18 महीने में इस मुकाम तक पहुँची, जबकि EU समझौते को 20 साल हो गए हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप भारत यात्रा के लिए उत्सुक हैं; PM मोदी ने उन्हें आमंत्रित किया है, लेकिन मध्यावधि चुनाव के कारण तारीख तय नहीं।

भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने 27 जून 2026 को वाशिंगटन में एक विशेष इंटरव्यू में कहा कि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता अपने अंतिम चरण में है और दोनों पक्ष अब केवल कानूनी भाषा को अंतिम रूप देने पर केंद्रित हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि यह समझौता आने वाले कुछ हफ्तों या महीनों में संपन्न हो जाएगा।

बातचीत की मौजूदा स्थिति

राजदूत गोर ने बताया कि वे करीब 48 घंटे पहले नई दिल्ली में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राजदूत जैमीसन ग्रीर के साथ उन बैठकों में शामिल थे जहाँ वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात हुई। उन्होंने कहा, "यह वार्ता बेहद सार्थक रही। हालांकि, कुछ मुद्दों पर अभी भी सहमति बनना बाकी है। अब बहुत कुछ उस अंतिम मसौदे की भाषा पर निर्भर करेगा, जिस पर दोनों पक्ष हस्ताक्षर करेंगे। हमें पूरा विश्वास है कि अगले कुछ हफ्तों या महीनों में इस प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।"

गोर ने इस बात पर जोर दिया कि प्रस्तावित समझौते पर केवल लगभग 18 महीने से चर्चा चल रही है, जो कि वैश्विक व्यापार वार्ताओं के मानकों के हिसाब से उल्लेखनीय रूप से तेज गति है।

यूरोपीय संघ से तुलना

बातचीत की गति को संदर्भ में रखते हुए गोर ने कहा, "देखिए, इसे सही नजरिए से देखें तो हम इस समझौते पर डेढ़ साल से काम कर रहे हैं। यूरोपीय संघ समझौता, जो अभी भी पूरा नहीं हुआ है, उसे 20 साल हो गए हैं। हम इसे पूरा करने की दिशा में एक शानदार रास्ते पर हैं।" उन्होंने समझौते की विषयवस्तु पर विस्तार से बोलने से इनकार किया, लेकिन कहा कि दोनों सरकारें ऐसे नतीजे की ओर काम कर रही हैं जिससे दोनों पक्षों को फायदा हो।

गौरतलब है कि यह समझौता मार्केट एक्सेस बढ़ाने, टैरिफ बाधाएँ घटाने और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से पहले चरण के रूप में तैयार किया जा रहा है।

राष्ट्रपति ट्रंप की भारत यात्रा की संभावना

राजदूत गोर ने यह भी खुलासा किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत आने को लेकर उत्सुक हैं। उन्होंने बताया, "मैं उनके साथ ओवल ऑफिस में कई घंटे रहा। राष्ट्रपति ने जो बातें पूछी, उनमें से एक यह थी — 'तो मैं कब आ रहा हूं?' वह आने के लिए बहुत उत्सुक हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें आमंत्रित किया है।" हालांकि, गोर ने अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के व्यस्त कार्यक्रम का हवाला देते हुए कोई पक्की तारीख देने से परहेज किया।

उन्होंने कहा, "अमेरिका में मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं, इसलिए राष्ट्रपति का शेड्यूल बहुत व्यस्त है। लेकिन इसके बावजूद, भारत उन जगहों की सूची में सबसे ऊपर है जहाँ वे जल्द ही जाएंगे।"

मोदी-ट्रंप व्यक्तिगत संबंध: समझौते की नींव

गोर ने रेखांकित किया कि राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच वर्षों पुराना व्यक्तिगत संबंध भारत-अमेरिका संबंधों की मजबूत आधारशिला बना हुआ है — यहाँ तक कि तनाव की अटकलों के बावजूद भी। उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री बहुत अच्छे मित्र हैं और यह बात सालों पुरानी है और आगे भी जारी रहेगी।" फ्रांस में हाल ही में हुई दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद यह बयान और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।

व्यापार साझेदारी का व्यापक ढाँचा

यह ऐसे समय में आया है जब भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी रक्षा, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, शिक्षा और हिंद-प्रशांत सहयोग जैसे कई स्तंभों पर एक साथ विस्तार ले रही है। व्यापार इन सभी में सबसे तेजी से उभरता क्षेत्र बन रहा है। दोनों देश एक बड़े व्यापार ढाँचे की ओर बढ़ने से पहले इस प्रारंभिक समझौते को आधार बनाना चाहते हैं। आने वाले हफ्ते यह तय करेंगे कि 18 महीने की यह कूटनीतिक मेहनत ठोस नतीजे में बदलती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'कुछ हफ्तों या महीनों' की समयसीमा पहले भी कई बार खिसकती रही है — व्यापार वार्ताओं में यह एक परिचित पैटर्न है। असली सवाल यह है कि 'कुछ मुद्दे' कितने गहरे हैं: टैरिफ रियायतें, कृषि बाज़ार पहुँच और डेटा स्थानीयकरण जैसे विषय दोनों पक्षों के लिए संवेदनशील रहे हैं। EU के 20 साल वाले उदाहरण से तुलना प्रभावशाली लगती है, पर वह तुलना भ्रामक भी हो सकती है — EU-India FTA की जटिलता और भारत-अमेरिका के इस 'पहले चरण' की सीमित महत्वाकांक्षा में बड़ा फर्क है। मोदी-ट्रंप व्यक्तिगत रसायन निश्चित रूप से कूटनीतिक माहौल बनाता है, लेकिन व्यापार समझौते आखिरकार संख्याओं और नियमों पर तय होते हैं, न कि मित्रता पर।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता कब तक पूरा होगा?
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के अनुसार, यह समझौता आने वाले कुछ हफ्तों या महीनों में पूरा होने की उम्मीद है। दोनों पक्ष अभी अंतिम मसौदे की कानूनी भाषा को अंतिम रूप देने पर काम कर रहे हैं।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में अभी कौन से मुद्दे बाकी हैं?
राजदूत गोर ने विशिष्ट मुद्दों का खुलासा नहीं किया, लेकिन कहा कि 'कुछ मुद्दों पर अभी भी सहमति बनना बाकी है।' वार्ता मुख्य रूप से मार्केट एक्सेस, टैरिफ बाधाओं और अंतिम मसौदे की भाषा पर केंद्रित है।
क्या राष्ट्रपति ट्रंप जल्द भारत आएंगे?
राजदूत गोर ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप भारत आने के लिए उत्सुक हैं और प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें आमंत्रित किया है। हालांकि, अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के व्यस्त कार्यक्रम के कारण अभी कोई पक्की तारीख तय नहीं है।
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में कौन-कौन शामिल हैं?
अमेरिकी पक्ष से राजदूत सर्जियो गोर और व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर प्रमुख वार्ताकार हैं। भारतीय पक्ष से वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल नेतृत्व कर रहे हैं। हाल ही में नई दिल्ली में दोनों पक्षों की अहम बैठक हुई।
यह भारत-अमेरिका व्यापार समझौता क्यों महत्वपूर्ण है?
यह समझौता दोनों देशों के बीच मार्केट एक्सेस बढ़ाने, टैरिफ बाधाएँ घटाने और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के लिए एक बड़े व्यापार ढाँचे की नींव रखेगा। व्यापार भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के सबसे तेजी से बढ़ते स्तंभ के रूप में उभरा है।
राष्ट्र प्रेस
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