गुलशन कुमार की 29वीं पुण्यतिथि: 'कैसेट किंग' की विरासत आज 5 अरब व्यूज और संस्थानों में जीवित
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई में 11 अगस्त को 'कैसेट किंग' गुलशन कुमार की 29वीं पुण्यतिथि पर उनकी विरासत का दायरा हैरान करने वाला है — न कोई दुकान, न कैसेट, बल्कि डिजिटल दुनिया में अरबों व्यूज के रूप में। 1980 और 1990 के दशक में भक्ति संगीत को सस्ते कैसेटों के ज़रिए घर-घर पहुँचाने वाले गुलशन कुमार की आवाज़ और चेहरा आज मोबाइल और इंटरनेट पर उससे कहीं अधिक व्यापक पहुँच बना चुका है।
5 अरब व्यूज का ऐतिहासिक मील का पत्थर
गुलशन कुमार की विरासत का सबसे बड़ा डिजिटल प्रमाण है 'श्री हनुमान चालीसा' का वह वीडियो, जिसमें वे स्वयं दिखाई देते हैं। यह वीडियो 10 मई 2011 को टी-सीरीज़ के भक्ति चैनल पर अपलोड किया गया था। 2020 में इसने 1 अरब व्यूज का आँकड़ा पार किया, 2023 में यह 3 अरब तक पहुँचा, और नवंबर 2025 में यह 5 अरब व्यूज के पार चला गया। रिपोर्टों के अनुसार, उस समय मीडिया ने इसे भारत का पहला ऐसा यूट्यूब अपलोड बताया जिसने 5 अरब व्यूज का रिकॉर्ड छुआ।
गुलशन कुमार के निधन के करीब 14 साल बाद उनका चेहरा इस वैश्विक डिजिटल रिकॉर्ड का हिस्सा बना — यह तथ्य ही उनकी दूरदर्शिता का प्रमाण है।
कारोबारी दूरदर्शिता जो आज भी प्रासंगिक है
गुलशन कुमार की असली ताकत उनकी वह समझ थी कि संगीत केवल फिल्म दर्शकों की ज़रूरत नहीं। मंदिर जाने वाला, घर में पूजा करने वाला और छोटे शहरों का आम नागरिक — सभी भक्ति संगीत के उतने ही बड़े उपभोक्ता हो सकते हैं। टी-सीरीज़ ने शुरुआती वर्षों में भजन और धार्मिक गीतों के कैसेट बड़े पैमाने पर बाज़ार में उतारे।
यही सोच बाद में टी-सीरीज़ के विशाल डिवोशनल कैटलॉग की नींव बनी। पुराने भजन नए वीडियो के रूप में सामने आए, पुराने संगीत को नए डिजिटल प्लेटफॉर्म मिले, और टी-सीरीज़ ने अपने भक्ति कंटेंट को इंटरनेट पर व्यापक रूप से फैलाया। यह ऐसे समय में आया जब भारत में स्मार्टफोन क्रांति ने ग्रामीण और अर्ध-शहरी दर्शकों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा — वही दर्शक जिन्हें गुलशन कुमार ने कैसेट युग में पहचाना था।
शिक्षा और पुरस्कारों में विरासत
गुलशन कुमार की स्मृति को संस्थागत रूप भी दिया गया है। गुलशन कुमार फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया का नामकरण सीधे उनके नाम पर किया गया है। इसके अलावा, 2019 में टी-सीरीज़ की शैक्षणिक शाखा ने गुलशन कुमार अवॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस और गुलशन कुमार यंग अचीवर्स अवॉर्ड की शुरुआत की — यानी उनकी विरासत को शिक्षा और युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के माध्यम के रूप में भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
बायोपिक 'मोगुल' अभी भी अटकी
गुलशन कुमार के जीवन पर आधारित फिल्म 'मोगुल' लंबे समय से चर्चा में है। इस परियोजना से अलग-अलग समय पर अक्षय कुमार और आमिर खान जैसे नाम जुड़े रहे। 2025 में इसे नए सिरे से आगे बढ़ाने की खबर आई, लेकिन फिल्म अभी भी अटकी हुई है और इसकी रिलीज़ की कोई पक्की तारीख सामने नहीं आई है।
गुलशन कुमार की कहानी इस बात का दुर्लभ उदाहरण है कि किसी व्यक्ति की दूरदर्शिता उसके जाने के दशकों बाद भी न केवल जीवित रहती है, बल्कि नए आयाम छूती रहती है।