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गुलशन कुमार की 29वीं पुण्यतिथि: 'कैसेट किंग' की विरासत आज 5 अरब व्यूज और संस्थानों में जीवित

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गुलशन कुमार की 29वीं पुण्यतिथि: 'कैसेट किंग' की विरासत आज 5 अरब व्यूज और संस्थानों में जीवित

सारांश

'कैसेट किंग' गुलशन कुमार ने भक्ति संगीत को कैसेटों से घर-घर पहुँचाया था — आज उनकी मृत्यु के 29 साल बाद वही संगीत यूट्यूब पर 5 अरब व्यूज का रिकॉर्ड बना चुका है। उनकी दूरदर्शिता ने एक ऐसी विरासत रची जो डिजिटल युग में और बड़ी होती जा रही है।

मुख्य बातें

गुलशन कुमार की 29वीं पुण्यतिथि पर उनकी डिजिटल विरासत नई ऊँचाई पर है।
'श्री हनुमान चालीसा' वीडियो ( 10 मई 2011 को अपलोड) ने नवंबर 2025 में 5 अरब व्यूज पार किए — रिपोर्टों के अनुसार यह भारत का पहला ऐसा यूट्यूब अपलोड है।
गुलशन कुमार फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और 2019 में शुरू हुए दो पुरस्कार उनकी संस्थागत विरासत हैं।
बायोपिक 'मोगुल' से अक्षय कुमार और आमिर खान के नाम जुड़े, लेकिन 2025 तक फिल्म अटकी हुई है।
गुलशन कुमार की कारोबारी सोच — भक्ति संगीत को आम जनता तक सस्ते में पहुँचाना — आज टी-सीरीज़ के विशाल डिजिटल कैटलॉग की बुनियाद है।

मुंबई में 11 अगस्त को 'कैसेट किंग' गुलशन कुमार की 29वीं पुण्यतिथि पर उनकी विरासत का दायरा हैरान करने वाला है — न कोई दुकान, न कैसेट, बल्कि डिजिटल दुनिया में अरबों व्यूज के रूप में। 1980 और 1990 के दशक में भक्ति संगीत को सस्ते कैसेटों के ज़रिए घर-घर पहुँचाने वाले गुलशन कुमार की आवाज़ और चेहरा आज मोबाइल और इंटरनेट पर उससे कहीं अधिक व्यापक पहुँच बना चुका है।

5 अरब व्यूज का ऐतिहासिक मील का पत्थर

गुलशन कुमार की विरासत का सबसे बड़ा डिजिटल प्रमाण है 'श्री हनुमान चालीसा' का वह वीडियो, जिसमें वे स्वयं दिखाई देते हैं। यह वीडियो 10 मई 2011 को टी-सीरीज़ के भक्ति चैनल पर अपलोड किया गया था। 2020 में इसने 1 अरब व्यूज का आँकड़ा पार किया, 2023 में यह 3 अरब तक पहुँचा, और नवंबर 2025 में यह 5 अरब व्यूज के पार चला गया। रिपोर्टों के अनुसार, उस समय मीडिया ने इसे भारत का पहला ऐसा यूट्यूब अपलोड बताया जिसने 5 अरब व्यूज का रिकॉर्ड छुआ।

गुलशन कुमार के निधन के करीब 14 साल बाद उनका चेहरा इस वैश्विक डिजिटल रिकॉर्ड का हिस्सा बना — यह तथ्य ही उनकी दूरदर्शिता का प्रमाण है।

कारोबारी दूरदर्शिता जो आज भी प्रासंगिक है

गुलशन कुमार की असली ताकत उनकी वह समझ थी कि संगीत केवल फिल्म दर्शकों की ज़रूरत नहीं। मंदिर जाने वाला, घर में पूजा करने वाला और छोटे शहरों का आम नागरिक — सभी भक्ति संगीत के उतने ही बड़े उपभोक्ता हो सकते हैं। टी-सीरीज़ ने शुरुआती वर्षों में भजन और धार्मिक गीतों के कैसेट बड़े पैमाने पर बाज़ार में उतारे।

यही सोच बाद में टी-सीरीज़ के विशाल डिवोशनल कैटलॉग की नींव बनी। पुराने भजन नए वीडियो के रूप में सामने आए, पुराने संगीत को नए डिजिटल प्लेटफॉर्म मिले, और टी-सीरीज़ ने अपने भक्ति कंटेंट को इंटरनेट पर व्यापक रूप से फैलाया। यह ऐसे समय में आया जब भारत में स्मार्टफोन क्रांति ने ग्रामीण और अर्ध-शहरी दर्शकों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा — वही दर्शक जिन्हें गुलशन कुमार ने कैसेट युग में पहचाना था।

शिक्षा और पुरस्कारों में विरासत

गुलशन कुमार की स्मृति को संस्थागत रूप भी दिया गया है। गुलशन कुमार फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया का नामकरण सीधे उनके नाम पर किया गया है। इसके अलावा, 2019 में टी-सीरीज़ की शैक्षणिक शाखा ने गुलशन कुमार अवॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस और गुलशन कुमार यंग अचीवर्स अवॉर्ड की शुरुआत की — यानी उनकी विरासत को शिक्षा और युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के माध्यम के रूप में भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

बायोपिक 'मोगुल' अभी भी अटकी

गुलशन कुमार के जीवन पर आधारित फिल्म 'मोगुल' लंबे समय से चर्चा में है। इस परियोजना से अलग-अलग समय पर अक्षय कुमार और आमिर खान जैसे नाम जुड़े रहे। 2025 में इसे नए सिरे से आगे बढ़ाने की खबर आई, लेकिन फिल्म अभी भी अटकी हुई है और इसकी रिलीज़ की कोई पक्की तारीख सामने नहीं आई है।

गुलशन कुमार की कहानी इस बात का दुर्लभ उदाहरण है कि किसी व्यक्ति की दूरदर्शिता उसके जाने के दशकों बाद भी न केवल जीवित रहती है, बल्कि नए आयाम छूती रहती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वही आज यूट्यूब पर सबसे बड़े व्यूज रिकॉर्ड का आधार है। विडंबना यह है कि 'मोगुल' बायोपिक — जो उनकी इसी दूरदर्शिता को पर्दे पर उतारने की कोशिश है — वर्षों से अटकी है, जबकि असली विरासत बिना किसी फिल्म के ही अरबों तक पहुँच चुकी है। यह उद्योग को याद दिलाता है कि कंटेंट की जड़ें मज़बूत हों, तो माध्यम बदलने से पहुँच घटती नहीं, बढ़ती है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुलशन कुमार को 'कैसेट किंग' क्यों कहा जाता था?
गुलशन कुमार ने 1980 और 1990 के दशक में टी-सीरीज़ के ज़रिए भक्ति संगीत को सस्ते कैसेटों पर उपलब्ध कराया और इसे आम जनता — विशेषकर छोटे शहरों और गाँवों — तक पहुँचाया। उनकी इसी कारोबारी दूरदर्शिता के कारण उन्हें 'कैसेट किंग' की उपाधि मिली।
'श्री हनुमान चालीसा' वीडियो ने 5 अरब व्यूज कब पार किए?
टी-सीरीज़ के भक्ति चैनल पर 10 मई 2011 को अपलोड यह वीडियो नवंबर 2025 में 5 अरब व्यूज पार कर गया। रिपोर्टों के अनुसार यह भारत का पहला यूट्यूब अपलोड है जिसने यह मील का पत्थर छुआ।
गुलशन कुमार के नाम पर कौन-से संस्थान और पुरस्कार हैं?
गुलशन कुमार फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया उनके नाम पर है। इसके अलावा 2019 में टी-सीरीज़ की शैक्षणिक शाखा ने गुलशन कुमार अवॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस और गुलशन कुमार यंग अचीवर्स अवॉर्ड की शुरुआत की।
गुलशन कुमार की बायोपिक 'मोगुल' का क्या हाल है?
गुलशन कुमार के जीवन पर आधारित फिल्म 'मोगुल' लंबे समय से विकास के दौर में है। इससे अक्षय कुमार और आमिर खान के नाम अलग-अलग समय पर जुड़े। 2025 में इसे नए सिरे से आगे बढ़ाने की खबर आई, लेकिन फिल्म अभी भी अटकी हुई है।
गुलशन कुमार की विरासत डिजिटल युग में इतनी मज़बूत क्यों है?
गुलशन कुमार ने जिस भक्ति संगीत को आम जनता के लिए सुलभ बनाया, वही कंटेंट टी-सीरीज़ के डिजिटल कैटलॉग की रीढ़ बना। स्मार्टफोन और इंटरनेट के विस्तार ने उसी दर्शक वर्ग को ऑनलाइन जोड़ा जिसे गुलशन कुमार ने कैसेट युग में पहचाना था, जिससे उनका कंटेंट अरबों व्यूज तक पहुँचा।
राष्ट्र प्रेस
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