13 जुलाई 2026
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गुलशन देवैया: 'चलता-फिरता एनसाइक्लोपीडिया' जो हर किरदार की माइक्रो डिटेल में जीते हैं

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गुलशन देवैया: 'चलता-फिरता एनसाइक्लोपीडिया' जो हर किरदार की माइक्रो डिटेल में जीते हैं

सारांश

फैशन डिज़ाइनर से बॉलीवुड के 'चलता-फिरता एनसाइक्लोपीडिया' तक — गुलशन देवैया का सफर बताता है कि असली अभिनय किरदार को रटने में नहीं, उसकी हर परत को जीने में है। 'शैतान' से 'गन्स एंड गुलाब्स' तक, हर जॉनर में उन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा से इंडस्ट्री को चौंकाया है।

मुख्य बातें

गुलशन देवैया का जन्म 28 मई 1978 को बेंगलुरु में हुआ; उन्होंने NIFT से फैशन डिज़ाइनिंग की पढ़ाई की और करीब 10 साल फैशन इंडस्ट्री में काम किया।
बॉलीवुड डेब्यू 2010 में अनुराग कश्यप की 'दैट गर्ल इन येलो बूट्स' से; असली पहचान 2011 की फिल्म 'शैतान' से मिली।
'मर्द को दर्द नहीं होता' (2018) में डबल रोल — कराटे मणि और जिमी — उनके करियर की उल्लेखनीय उपलब्धि।
'गन्स एंड गुलाब्स' में 'फोर कट आत्माराम' का किरदार ओटीटी का आइकॉनिक रोल बना।
'दहाड़' (2023) में एसएचओ देवीलाल सिंह की भूमिका को दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने सराहा।
फिल्मफेयर और स्क्रीन अवॉर्ड सहित कई प्रतिष्ठित नामांकन हासिल।

बॉलीवुड और ओटीटी के विस्तृत परिदृश्य में गुलशन देवैया एक ऐसे अभिनेता के रूप में उभरे हैं जो किरदार को सतह पर नहीं, बल्कि उसकी गहराई में जाकर जीते हैं। उनके सह-कलाकार और निर्देशक उन्हें अक्सर 'चलता-फिरता एनसाइक्लोपीडिया' कहते हैं — इसलिए नहीं कि वे सिर्फ डायलॉग याद रखते हैं, बल्कि इसलिए कि स्क्रिप्ट के हर सीन, हर बारीकी और हर भावनात्मक परत की उन्हें असाधारण समझ होती है। यह खूबी उनकी हर परफॉर्मेंस में साफ झलकती है।

प्रारंभिक जीवन और फैशन से अभिनय तक का सफर

28 मई 1978 को बेंगलुरु में जन्मे गुलशन देवैया का रास्ता किसी परंपरागत अभिनेता जैसा नहीं रहा। उन्होंने NIFT (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी) से फैशन डिज़ाइनिंग की पढ़ाई की और इस इंडस्ट्री में करीब 10 साल तक सक्रिय रहे — न केवल डिज़ाइनर के रूप में, बल्कि फैशन एजुकेटर के तौर पर भी। यह दौर उनके भीतर के रचनात्मक इंसान को गढ़ रहा था।

अभिनय की ललक उन्हें बेंगलुरु के इंग्लिश थिएटर की ओर खींच लाई। थिएटर के शुरुआती दिनों में वे बैकस्टेज काम और लाइटिंग तक संभालते थे, जिससे उन्हें मंच की संरचना और प्रस्तुति की गहरी समझ मिली — एक ऐसी नींव जो बाद में उनके पर्दे पर दिखने वाले हर किरदार में काम आई।

बॉलीवुड में दस्तक और पहचान

गुलशन का बॉलीवुड डेब्यू 2010 में निर्देशक अनुराग कश्यप की फिल्म 'दैट गर्ल इन येलो बूट्स' से हुआ। लेकिन असली पहचान उन्हें 2011 में आई फिल्म 'शैतान' से मिली, जिसमें उन्होंने करण चौधरी 'केसी' का किरदार निभाया। इस परफॉर्मेंस के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट डेब्यू के लिए नामांकन भी मिला।

इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक ऐसे किरदार चुने जो उनकी रेंज को परखते थे। 'हेट स्टोरी' (2012) में ग्रे-शेड वाला किरदार, 'राम-लीला' (2013) में खलनायक भवानी का रोल और 'हंटर' (2015) में मंदार पोंक्षे का बोल्ड कॉमेडी ड्रामा — हर बार उन्होंने दर्शकों को चौंकाया।

यादगार किरदार और ओटीटी पर छाप

'मर्द को दर्द नहीं होता' (2018) में गुलशन ने डबल रोल निभाया — कराटे मणि और जिमी — दोनों बिल्कुल विपरीत व्यक्तित्व के किरदार। इस चुनौती को उन्होंने इतनी सहजता से पेश किया कि यह फिल्म उनके करियर की मील का पत्थर बन गई। 'बधाई दो' (2022) में उनका छोटा लेकिन असरदार रोल कहानी की धुरी बना।

ओटीटी पर 'दहाड़' (2023) में उनका एसएचओ देवीलाल सिंह का किरदार दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने सराहा। वेब सीरीज़ 'अफसोस', 'दुरंगा', 'गन्स एंड गुलाब्स' और 'बैड कॉप' में उन्होंने अलग-अलग जॉनर में अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया। खासतौर पर 'गन्स एंड गुलाब्स' में उनका 'फोर कट आत्माराम' ओटीटी की दुनिया का एक आइकॉनिक किरदार बन गया।

पुरस्कार और सम्मान

अपने करियर में गुलशन देवैया को फिल्मफेयर और स्क्रीन अवॉर्ड सहित कई प्रतिष्ठित मंचों पर नामांकन मिले हैं। ये नामांकन इस बात का प्रमाण हैं कि इंडस्ट्री ने उनकी कला को बार-बार स्वीकृति दी है।

आगे की राह

गुलशन देवैया का सफर यह साबित करता है कि जब एक कलाकार किरदार को रट्टे की तरह नहीं, बल्कि उसकी आत्मा को समझकर निभाता है, तो वह दर्शकों के ज़ेहन में स्थायी जगह बना लेता है। आने वाले प्रोजेक्ट्स में भी उनसे ऐसी ही गहराई और विविधता की उम्मीद बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी वे अक्सर सहायक या दूसरी पंक्ति के रोल में दिखते हैं। 'गन्स एंड गुलाब्स' जैसे ओटीटी प्रोजेक्ट ने उन्हें वह दर्शक-वर्ग दिया जो मेनस्ट्रीम सिनेमा नहीं दे पाया। यह एक संकेत है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म उन कलाकारों के लिए असली मंच बन रहे हैं जिन्हें स्टार-सिस्टम ने हाशिये पर रखा।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुलशन देवैया को 'चलता-फिरता एनसाइक्लोपीडिया' क्यों कहा जाता है?
उनके सह-कलाकार और निर्देशक उन्हें यह उपाधि इसलिए देते हैं क्योंकि उन्हें स्क्रिप्ट, डायलॉग और हर सीन की बारीकियों की असाधारण गहरी समझ होती है। यह खूबी उनकी परफॉर्मेंस में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
गुलशन देवैया का बॉलीवुड में डेब्यू कब और किस फिल्म से हुआ?
गुलशन देवैया ने 2010 में निर्देशक अनुराग कश्यप की फिल्म 'दैट गर्ल इन येलो बूट्स' से बॉलीवुड में कदम रखा। हालांकि व्यापक पहचान उन्हें 2011 की फिल्म 'शैतान' से मिली, जिसके लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट डेब्यू नामांकन भी मिला।
गुलशन देवैया की सबसे यादगार ओटीटी भूमिका कौन-सी है?
'गन्स एंड गुलाब्स' में उनका 'फोर कट आत्माराम' का किरदार ओटीटी की दुनिया में आइकॉनिक माना जाता है। इसके अलावा 'दहाड़' (2023) में एसएचओ देवीलाल सिंह की भूमिका को भी दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने खूब सराहा।
अभिनय से पहले गुलशन देवैया किस क्षेत्र में थे?
अभिनय में आने से पहले गुलशन देवैया ने NIFT से फैशन डिज़ाइनिंग की पढ़ाई की और करीब 10 साल फैशन इंडस्ट्री में डिज़ाइनर और फैशन एजुकेटर के रूप में काम किया। बेंगलुरु के इंग्लिश थिएटर से जुड़कर उन्होंने अभिनय की शुरुआत की।
'मर्द को दर्द नहीं होता' में गुलशन देवैया ने कौन-से किरदार निभाए?
2018 की इस फिल्म में गुलशन देवैया ने डबल रोल निभाया — कराटे मणि और जिमी। दोनों किरदार स्वभाव और व्यक्तित्व में बिल्कुल विपरीत थे, और उन्होंने इस चुनौती को इतनी सहजता से पेश किया कि यह उनके करियर की उल्लेखनीय उपलब्धि बन गई।
राष्ट्र प्रेस
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