4 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

आशीष विद्यार्थी: किराया देने को संघर्ष करने वाले राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता विलेन की अनोखी जीवन यात्रा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
आशीष विद्यार्थी: किराया देने को संघर्ष करने वाले राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता विलेन की अनोखी जीवन यात्रा

सारांश

किराया देने तक को संघर्ष करने वाले आशीष विद्यार्थी ने राष्ट्रीय पुरस्कार जीता, चार भाषाओं में खलनायक बने, और 60 की उम्र में यूट्यूब व स्टैंड-अप से नई पहचान बनाई — यह सिर्फ एक अभिनेता की कहानी नहीं, निरंतर पुनर्आविष्कार का पाठ है।

मुख्य बातें

आशीष विद्यार्थी का जन्म 19 जून 1962 को केरल के थालास्सेरी में हुआ; पिता स्वतंत्रता सेनानी, माँ कथक प्रशिक्षिका थीं।
NSD से प्रशिक्षण के बाद 'द्रोहकाल' (1994) में भूमिका के लिए 1995 में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता) मिला।
पुरस्कार मिलने के बावजूद उस दौर में मुंबई में किराया चुकाने के लिए आर्थिक संघर्ष करना पड़ा।
हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और बंगाली — 5 भाषाओं में यादगार खलनायक भूमिकाएँ निभाईं; 'अथानोक्काडे' (2005) के लिए फिल्मफेयर (सर्वश्रेष्ठ खलनायक) भी मिला।
नवंबर 2021 में यूट्यूब चैनल शुरू; जून 2025 में 'द ट्रेटर्स इंडिया' में युवा इन्फ्लुएंसर्स के साथ नज़र आए।
25 मई 2023 को रूपाली बरुआ से दूसरा विवाह; सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का भी सामना किया।

बॉलीवुड और दक्षिण भारतीय सिनेमा के सबसे दमदार खलनायकों में शुमार आशीष विद्यार्थी का जीवन संघर्ष, सफलता और निरंतर पुनर्आविष्कार की एक असाधारण कहानी है। 19 जून 1962 को केरल के थालास्सेरी में जन्मे इस अभिनेता ने पर्दे पर जितने भयावह किरदार निभाए, उतनी ही कठिन परिस्थितियों का असल जीवन में भी सामना किया — यहाँ तक कि एक दौर में मुंबई में किराया चुकाने के लिए भी जूझना पड़ा। आज वे अपने पॉडकास्ट 'फिफ्टी प्लस जिंदगी' में कहते हैं कि उम्र रचनात्मकता की दुश्मन नहीं होती।

विरासत और प्रारंभिक जीवन

आशीष विद्यार्थी की वैचारिक नींव उनके परिवार से मिली। उनके पिता गोविंद विद्यार्थी (टी.के. गोविंदन) स्वतंत्रता सेनानी और कम्युनिस्ट कार्यकर्ता थे, जिन्होंने धर्मनिरपेक्ष शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी के सम्मान में 'विद्यार्थी' उपनाम अपनाया था। उन्होंने संगीत नाटक अकादमी में लुप्तप्राय लोक कलाओं के संरक्षण में भी उल्लेखनीय योगदान दिया। उनकी माँ रेबा विद्यार्थी कथक की प्रतिष्ठित प्रशिक्षिका थीं। इसी सांस्कृतिक और वैचारिक वातावरण ने आशीष के भीतर कला और समाज के प्रति गहरी संवेदनशीलता विकसित की।

हिंदू कॉलेज से इतिहास की पढ़ाई के बाद उन्होंने प्रतिष्ठित नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) में प्रशिक्षण लिया। वहाँ से निकलकर वे मनोज बाजपेयी और एन.के. शर्मा के साथ थिएटर ग्रुप 'एक्ट वन' से जुड़े। रंगमंच के इस अनुभव ने उनकी अभिनय क्षमता और गहरी आवाज़ को एक अलग पहचान दी।

राष्ट्रीय पुरस्कार और आर्थिक संघर्ष

1994 में गोविंद निहलानी की फिल्म 'द्रोहकाल' उनके करियर का निर्णायक मोड़ बनी। कमांडर भद्रा की भूमिका के लिए उन्हें 1995 में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। गौरतलब है कि यह वही दौर था जब वे मुंबई में किराया चुकाने के लिए आर्थिक संघर्ष कर रहे थे — राष्ट्रीय पुरस्कार और रोज़मर्रा की माली तंगी एक साथ। इसके बाद 'इस रात की सुबह नहीं' (1996) में रमनभाई और 'वास्तव' (1999) में विट्ठल काण्या के किरदारों ने बॉलीवुड में उन्हें विलेन के रूप में स्थापित कर दिया।

दक्षिण भारतीय सिनेमा में धमाका

2000 के दशक की शुरुआत में आशीष ने दक्षिण भारतीय सिनेमा में कदम रखा और वहाँ भी अपनी छाप छोड़ी। तमिल फिल्म 'दिल' (2001) में भ्रष्ट पुलिस अधिकारी डीएसपी शंकर और ब्लॉकबस्टर 'घिल्ली' (2004) में सख्त पिता शिवसुब्रमण्यम के किरदारों ने उन्हें दक्षिण में रातोंरात लोकप्रिय बना दिया। तेलुगु फिल्म 'अथानोक्काडे' (2005) के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ खलनायक का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। कन्नड़ फिल्म 'एके-47' (1999) और बंगाली फिल्म 'बॉम्बाइयर बॉम्बेते' (2003) जैसी फिल्मों से उन्होंने साबित किया कि भाषा की सीमाएँ एक सच्चे कलाकार को नहीं बाँध सकतीं।

डिजिटल पारी और नई पहचान

कोरोना महामारी के दौरान नवंबर 2021 में उन्होंने अपना यूट्यूब चैनल 'आशीष विद्यार्थी एक्टर व्लॉग्स' शुरू किया, जहाँ वे यात्रा, स्थानीय व्यंजनों, आम लोगों की कहानियों और जीवन के अनुभवों को साझा करते हैं। इसके साथ ही 'कहानीबाज' नाम के अनौपचारिक स्टोरीटेलिंग शो और 'सीट डाउन विद आशीष' के ज़रिए स्टैंड-अप कॉमेडी में कदम रखकर उन्होंने दर्शकों के बीच एक बिल्कुल अलग पहचान बनाई। जून 2025 में वे करण जौहर के रियलिटी शो 'द ट्रेटर्स इंडिया' में नज़र आए, जहाँ युवा इन्फ्लुएंसर्स के साथ उनके वैचारिक टकराव और बाद की सुलह ने खूब सुर्खियाँ बटोरीं।

फिल्म 'किल' (2023) में ट्रेन डकैतों के मुखिया 'बेनी' की भूमिका में उन्होंने एक भावुक पिता और क्रूर खलनायक का बेजोड़ मेल पेश किया। 'आवेशम' (2024) में कॉलेज डायरेक्टर के रूप में उनका कैमियो भी चर्चित रहा।

व्यक्तिगत जीवन

2022 में पहली पत्नी राजोशी बरुआ से आपसी सहमति से अलग होने के बाद आशीष विद्यार्थी ने 25 मई 2023 को रूपाली बरुआ से विवाह किया। इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर उन्हें आलोचना और ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ा। यह भी उनके जीवन का एक ऐसा अध्याय है जिसे उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया। छह दशकों के जीवन और चार दशकों के करियर के बाद भी आशीष विद्यार्थी का रचनात्मक सफर थमने का नाम नहीं लेता।

संपादकीय दृष्टिकोण

व्यक्ति की नहीं। उनका डिजिटल पुनर्आविष्कार इस बात का प्रमाण है कि भारत का मनोरंजन उद्योग अभी भी 'चरित्र अभिनेताओं' को वह स्थायी आर्थिक सुरक्षा नहीं देता जिसके वे हकदार हैं। मुख्यधारा की कवरेज उनकी सफलता का जश्न मनाती है, लेकिन यह सवाल नहीं उठाती कि राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता को किराये के लिए क्यों जूझना पड़ा। उनकी यात्रा एक बड़े ढाँचागत सवाल की ओर इशारा करती है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आशीष विद्यार्थी को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार किस फिल्म के लिए मिला?
आशीष विद्यार्थी को 1995 में गोविंद निहलानी की फिल्म 'द्रोहकाल' (1994) में कमांडर भद्रा की भूमिका के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। उल्लेखनीय है कि उसी दौर में वे मुंबई में आर्थिक संघर्ष से गुज़र रहे थे।
आशीष विद्यार्थी का यूट्यूब चैनल कब शुरू हुआ और उस पर क्या है?
आशीष विद्यार्थी ने कोरोना महामारी के दौरान नवंबर 2021 में 'आशीष विद्यार्थी एक्टर व्लॉग्स' नाम से यूट्यूब चैनल शुरू किया। इस पर वे यात्रा, स्थानीय व्यंजनों, आम लोगों की कहानियों और जीवन के अनुभवों पर वीडियो साझा करते हैं।
आशीष विद्यार्थी की दूसरी शादी कब और किससे हुई?
आशीष विद्यार्थी ने 25 मई 2023 को रूपाली बरुआ से विवाह किया। इससे पहले 2022 में उनकी पहली पत्नी राजोशी बरुआ से आपसी सहमति से अलगाव हुआ था और इस दूसरी शादी को लेकर उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ा।
आशीष विद्यार्थी ने दक्षिण भारतीय सिनेमा में कौन-से प्रमुख किरदार निभाए?
आशीष विद्यार्थी ने तमिल फिल्म 'घिल्ली' (2004) में शिवसुब्रमण्यम और 'दिल' (2001) में डीएसपी शंकर जैसे यादगार किरदार निभाए। तेलुगु फिल्म 'अथानोक्काडे' (2005) के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ खलनायक का फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला।
आशीष विद्यार्थी के परिवार की पृष्ठभूमि क्या है?
उनके पिता गोविंद विद्यार्थी (टी.के. गोविंदन) स्वतंत्रता सेनानी और कम्युनिस्ट कार्यकर्ता थे, जिन्होंने शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी के सम्मान में 'विद्यार्थी' उपनाम अपनाया और संगीत नाटक अकादमी में लोक कलाओं के संरक्षण में योगदान दिया। उनकी माँ रेबा विद्यार्थी कथक की प्रतिष्ठित प्रशिक्षिका थीं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले