मक्का पर हमले के आरोपों से हूती नेता अल-हूती का इनकार, सऊदी अरब के दावों को बताया 'मनगढ़ंत'
सारांश
मुख्य बातें
यमन के हूती आंदोलन के प्रमुख अब्दुल-मलिक अल-हूती ने 18 सितंबर 2026 को स्पष्ट शब्दों में उन आरोपों को खारिज किया जिनमें दावा किया गया था कि उनके संगठन ने इस्लाम के पवित्र शहर मक्का को निशाना बनाने की कोशिश की। सऊदी अरब के साथ तेज होते टकराव के बीच अल-हूती ने इन आरोपों को 'मनगढ़ंत और गलत' करार दिया। उनका कहना था कि इस आरोप का उपयोग यमन के खिलाफ कथित 'सैन्य कदमों' के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने के मकसद से किया जा रहा है।
अल-मसीरा टीवी पर अल-हूती का बयान
हूती संगठन के प्रचार माध्यम अल-मसीरा टीवी पर गुरुवार को प्रसारित भाषण में अल-हूती ने कहा कि मक्का को निशाना बनाने का दावा 'सरासर झूठ' है। उन्होंने कहा कि यह आरोप यमन के विरुद्ध सैन्य दबाव को उचित ठहराने की एक सुनियोजित कोशिश है। इसके साथ ही उन्होंने अपने समर्थकों से शुक्रवार को पूरे यमन में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करने की अपील की।
सऊदी गठबंधन का दावा और 'रेड लाइन' की चेतावनी
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने बुधवार को कहा कि रॉयल सऊदी एयर डिफेंस फोर्सेज ने मंगलवार शाम मक्का के दक्षिण में एक ड्रोन को रोककर नष्ट कर दिया था। गठबंधन के अनुसार, ड्रोन को मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही मार गिराया गया।
गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मल्की ने इस्लाम के दो सबसे पवित्र स्थलों और वहाँ आने वाले तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को 'रेड लाइन' बताया और चेतावनी दी कि इस घटना के जवाब में ज़रूरी कदम उठाए जाएँगे। अल-मल्की के अनुसार, यह मक्का को निशाना बनाने की हूती की कथित दूसरी कोशिश थी — इससे पहले 27 जुलाई 2017 को बैलिस्टिक मिसाइल हमले की कथित कोशिश का भी दावा किया जा चुका है।
सऊदी अरब पर प्रतिबंधों और शांति विफलता का आरोप
अल-हूती ने सऊदी अरब पर यह भी आरोप लगाया कि हालिया तनाव से पहले जब परिस्थितियाँ कुछ समय के लिए शांत थीं, तब उसने राजनीतिक समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उनके अनुसार, इस दौरान हूती-नियंत्रित इलाकों पर पाबंदियाँ और कड़ी कर दी गईं। एयरपोर्ट संचालन और सामान के आयात पर लगी बंदिशें अब भी अनसुलझे प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं।
बढ़ता टकराव: लाल सागर और बाब अल-मंदब
दोनों पक्षों के बीच ये आरोप-प्रत्यारोप ऐसे समय में सामने आए हैं जब यमन में संघर्ष खतरनाक स्तर तक पहुँच चुका है। 3 सितंबर से हूती लड़ाकों ने यमन के लाल सागर तट और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बाब अल-मंदब जलसंधि के आसपास बड़ी सैन्य बढ़त हासिल की है।
इसके साथ ही सऊदी अरब के सैन्य और तेल ठिकानों पर मिसाइल तथा ड्रोन हमले भी तेज हुए हैं। हूती का यह भी कहना है कि सऊदी लड़ाकू विमानों ने पूरे यमन में हवाई हमले बढ़ा दिए हैं।
संघर्ष की पृष्ठभूमि
यमन में यह संघर्ष 2014 के अंत में उस समय शुरू हुआ था जब हूती लड़ाकों ने राजधानी सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया था। इसके जवाब में मार्च 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया था। एक दशक से अधिक समय से जारी इस युद्ध ने यमन को मानवीय आपदा के कगार पर पहुँचा दिया है, और अब पवित्र स्थलों से जुड़े आरोपों ने इसमें नया धार्मिक आयाम जोड़ दिया है।