पीएम विश्वकर्मा योजना: 30 लाख लाभार्थियों का रजिस्ट्रेशन, ₹5,297 करोड़ का लोन वितरित — मांझी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्री जीतन राम मांझी ने 18 सितंबर 2026 को बताया कि पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत अब तक 30 लाख लाभार्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, जिनमें से लगभग 24.50 लाख लोगों को बेसिक स्किल ट्रेनिंग दी जा चुकी है। यह घोषणा कोलकाता के धोनों धान्यो ऑडिटोरियम में आयोजित योजना की तीसरी वर्षगांठ समारोह के दौरान की गई।
योजना की प्रमुख उपलब्धियाँ
मांझी के अनुसार, इंडिया पोस्ट के माध्यम से 18.15 लाख आधुनिक टूलकिट वितरित किए गए हैं। इसके अलावा, 6.18 लाख विश्वकर्माओं को 5 फीसदी सालाना की रियायती ब्याज दर पर ₹1 लाख तक का ऋण प्रदान किया गया है, जिसकी कुल राशि ₹5,297 करोड़ है। यह आँकड़े पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों तक सरकारी सहायता की व्यापक पहुँच को दर्शाते हैं।
योजना की पृष्ठभूमि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2023 को पीएम विश्वकर्मा योजना की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य देश के पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को स्किल ट्रेनिंग, आधुनिक उपकरण, ऋण सुविधा और बाज़ार तक पहुँच दिलाकर सशक्त बनाना है। गौरतलब है कि यह योजना उन समुदायों को लक्षित करती है जो पीढ़ियों से हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यवसाय से जुड़े हैं, लेकिन औपचारिक आर्थिक तंत्र में उनकी भागीदारी सीमित रही है।
पश्चिम बंगाल में योजना की स्थिति
समारोह में पश्चिम बंगाल के नेता सुवेंदु अधिकारी ने बताया कि राज्य में इस योजना के तहत 7 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विश्वकर्माओं को योजना का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक सहायता तेज़ी से उपलब्ध कराएगी। MSME राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने बताया कि यह पश्चिम बंगाल में इस योजना के अंतर्गत MSME मंत्रालय का पहला कार्यक्रम है, क्योंकि राज्य हाल ही में इस योजना से जुड़ा है।
महिला उद्यमियों पर विशेष जोर
करंदलाजे ने कार्यक्रम में महिला उद्यमियों को सशक्त बनाने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि महिला उद्यमियों की आर्थिक भागीदारी मज़बूत परिवारों, समुदायों और एक समृद्ध 'विकसित भारत' के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगी। लाभार्थियों को उन्होंने योजना के तहत मिलने वाले अवसरों का पूरा उपयोग करने और सफल उद्यमी बनने के लिए प्रोत्साहित किया।
आगे की दिशा
योजना की तीन वर्षों में हासिल उपलब्धियाँ पारंपरिक शिल्प क्षेत्र में एक व्यापक बदलाव की ओर इशारा करती हैं। यह ऐसे समय में आई है जब सरकार असंगठित क्षेत्र के कामगारों को औपचारिक आर्थिक ढाँचे में लाने पर ज़ोर दे रही है। ऋण वितरण और टूलकिट वितरण के आँकड़े उत्साहजनक हैं, लेकिन इन लाभार्थियों की आय और रोज़गार में दीर्घकालिक सुधार की स्वतंत्र निगरानी ही योजना की असल सफलता का मापदंड होगी।