पीएम विश्वकर्मा योजना: तीन साल में 30 लाख पंजीकरण, ₹5,316 करोड़ के ऋण मंजूर
सारांश
मुख्य बातें
पीएम विश्वकर्मा योजना ने लॉन्च के तीन वर्षों के भीतर 30 लाख लाभार्थियों के पंजीकरण का लक्ष्य पूरा कर लिया है। 16 सितंबर 2026 को जारी सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, इस योजना के अंतर्गत कौशल प्रशिक्षण, टूलकिट वितरण, ऋण सहायता, डिजिटल प्रोत्साहन और बाज़ार से जुड़ाव जैसी सुविधाएँ प्रदान की गई हैं। देश के पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में यह एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
मुख्य उपलब्धियाँ
फैक्टशीट के आँकड़ों के अनुसार, अब तक 24.37 लाख से अधिक कारीगरों को बुनियादी कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है और 18.16 लाख से अधिक कारीगरों को टूलकिट उपलब्ध कराई गई हैं। इसके अलावा, 6.19 लाख से अधिक ऋण स्वीकृत किए गए हैं, जिनकी कुल राशि करीब ₹5,316 करोड़ है — जिसका उपयोग कच्चा माल खरीदने, औज़ार अपग्रेड करने और कारोबार विस्तार के लिए किया जा सकता है।
डिजिटल प्रोत्साहन के अंतर्गत 8.11 लाख से अधिक लाभार्थियों को ₹42 करोड़ से अधिक की राशि वितरित की गई है। गौरतलब है कि यह योजना कारीगरों को नकद-रहित लेनदेन अपनाने के लिए प्रेरित करने हेतु डिजिटल प्रोत्साहन राशि सीधे खाते में भेजती है।
तकनीकी प्रशिक्षण और बाज़ार से जुड़ाव
ब्रांडिंग, उत्पाद डिज़ाइन, पैकेजिंग और मार्केटिंग के लिए एआई टूल्स के उपयोग को लेकर 12,000 से अधिक कारीगरों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। योजना के अंतर्गत 30,000 से अधिक विश्वकर्मा लाभार्थियों को सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM), ONDC, मीशो, अमेज़न, फैबइंडिया और सुलेखा जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म से जोड़ा गया है।
यह ऐसे समय में आया है जब पारंपरिक हस्तशिल्प क्षेत्र बड़े पैमाने पर मशीन-निर्मित उत्पादों की प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है। ई-कॉमर्स से जुड़ाव इन कारीगरों को स्थानीय बाज़ार की सीमाओं से परे ले जाने का प्रयास है।
जागरूकता और आउटरीच
देशभर में 1,500 से अधिक जागरूकता कार्यक्रम और शिविर, 50 से अधिक कार्यशालाएँ, 82 व्यापार मेले, 37 राज्य स्तरीय प्रदर्शनियाँ और 50 से अधिक फ्लैश मॉब आयोजित किए जा चुके हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य दूरदराज़ के कारीगरों तक योजना की जानकारी पहुँचाना और पंजीकरण को सुगम बनाना है।
प्रशिक्षण की संरचना
योजना के तहत बुनियादी प्रशिक्षण 5 से 7 दिन का होता है, जबकि उन्नत प्रशिक्षण 15 दिन या उससे अधिक समय का है। प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्रत्येक प्रशिक्षु को ₹500 प्रतिदिन स्टाइपेंड दिया जाता है। पंजीकरण और सत्यापन पूरा होने पर लाभार्थियों को पीएम विश्वकर्मा प्रमाणपत्र और पहचान पत्र प्रदान किया जाता है।
योजना विशेष रूप से गुरु-शिष्य परंपरा और परिवार आधारित पारंपरिक कौशल को संरक्षित करने पर भी ध्यान देती है — एक ऐसा पहलू जो अन्य कौशल विकास कार्यक्रमों में प्रायः अनुपस्थित रहता है। आगे, योजना के क्रियान्वयन की गुणवत्ता और ऋण चुकौती की दर इसकी दीर्घकालिक सफलता के असल मानक बनेंगे।