28 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पीएम विश्वकर्मा योजना से बैतूल के 180 से अधिक कारीगरों को मिली नई राह, लोन-टूलकिट से बदली जिंदगी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पीएम विश्वकर्मा योजना से बैतूल के 180 से अधिक कारीगरों को मिली नई राह, लोन-टूलकिट से बदली जिंदगी

सारांश

बैतूल में पीएम विश्वकर्मा योजना का जागरूकता शिविर केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं था — यह उन 180 से अधिक कारीगरों की कहानी थी जिन्हें ₹1 लाख के लोन और ₹15,000 की टूलकिट ने नई शुरुआत दी। पीतल की मूर्तियों से लेकर राजमिस्त्री तक, योजना ज़मीनी स्तर पर असर दिखा रही है।

मुख्य बातें

बैतूल जिले में 28 जुलाई को पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत सेमिनार सह जागरूकता कार्यक्रम आयोजित हुआ।
जिले के सभी ब्लॉकों से 180 से अधिक महिला-पुरुष हितग्राहियों ने भाग लिया।
योजना के तहत कारीगरों को ₹1 लाख तक का लोन और ₹15,000 तक की टूलकिट प्रदान की जाती है।
लाभार्थी नीलम पाटिल , सुरेश सराटकर और आरती बरसाकर ने योजना से व्यवसाय में सुधार की बात कही।
सहायक निर्देशक गौरव गोयल ने माना कि अभी भी कुछ लाभार्थियों को लोन-टूलकिट नहीं मिली; जल्द समाधान का आश्वासन दिया।
योजना के तीसरे वर्ष में लाभार्थियों की संख्या और उपलब्धियों की समीक्षा जारी है।

मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में 28 जुलाई को पीएम विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत एक सेमिनार सह जागरूकता कार्यक्रम और प्रशिक्षण शिविर का आयोजन हुआ, जिसमें जिले के सभी ब्लॉकों से 180 से अधिक महिला-पुरुष हितग्राहियों ने भाग लिया। जिला पंचायत कार्यालय के सभागार में एमएसएमई विकास कार्यालय, इंदौर के अधिकारियों द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में कारीगरों ने बताया कि योजना ने उनके व्यवसाय और पारिवारिक जीवन में उल्लेखनीय बदलाव लाया है।

मुख्य घटनाक्रम

कार्यक्रम में 150 से अधिक पुरुष और महिला लाभार्थी उपस्थित रहे। एमएसएमई विकास कार्यालय, बैतूल के सहायक निर्देशक गौरव गोयल ने बताया कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य लाभार्थियों को फंडिंग और मार्केटिंग के बारे में जागरूक करना था। उन्होंने कहा, 'हमने उन्हें बताया कि टूलकिट और लोन मिलने के बाद व्यवसाय को कैसे आगे बढ़ाएं, उत्पादों की पैकेजिंग, मार्केटिंग, एआई का उपयोग और साइबर क्राइम से बचाव कैसे करें।'

कार्यक्रम में लोहे और पीतल के व्यवसाय से जुड़े हितग्राहियों की संख्या सबसे अधिक रही। यह ऐसे समय में आया है जब योजना अपने तीसरे वर्ष में प्रवेश कर रही है और लाभार्थियों की संख्या तथा उपलब्धियों की समीक्षा की जा रही है।

लाभार्थियों की आवाज़

लाभार्थी महिला नीलम पाटिल ने बताया कि पहले कई बार आवेदन करने के बाद भी लोन नहीं मिला था, लेकिन पीएम विश्वकर्मा योजना से जुड़ने पर उन्हें ₹1 लाख का लोन और ₹15,000 की टूलकिट मिली, जिससे उनका व्यवसाय अब सुचारु रूप से चल रहा है।

राजमिस्त्री और सेंटरिंग कार्य करने वाले सुरेश सराटकर ने कहा कि योजना के तहत लोन, प्रमाण-पत्र और टूलकिट मिलने से उनका व्यवसाय बढ़ा है और अब वे दूसरी किस्त के लोन के लिए इच्छुक हैं। पीतल की मूर्तियाँ बनाने वाली आरती बरसाकर ने बताया कि बेसिक ट्रेनिंग के दौरान स्टाइपेंड भी मिला और डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिए अब वे अपने उत्पाद देश-विदेश तक बेच सकती हैं।

योजना में क्या मिलता है

पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को ₹1 लाख तक का रियायती लोन, ₹15,000 तक की टूलकिट, व्यावसायिक प्रशिक्षण, स्टाइपेंड और सरकारी प्रमाण-पत्र दिया जाता है। गौरतलब है कि यह योजना ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के छोटे व्यवसायों को औपचारिक बैंकिंग तंत्र से जोड़ने का प्रयास करती है।

आम जनता पर असर

सहायक निर्देशक गौरव गोयल ने स्वीकार किया कि अभी भी कई लाभार्थियों को लोन या टूलकिट नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि सभी की समस्याओं का फीडबैक लिया गया है और जिला प्रशासन के सहयोग से शीघ्र लाभ दिलाने का प्रयास किया जाएगा। यह स्वीकारोक्ति बताती है कि योजना का क्रियान्वयन अभी पूरी तरह समान नहीं है।

क्या होगा आगे

योजना के तीसरे वर्ष पूरे होने पर लाभार्थियों की संख्या और उपलब्धियों की व्यापक समीक्षा की जाएगी। अधिकारियों का लक्ष्य है कि शेष हितग्राहियों को भी जल्द से जल्द लोन और टूलकिट से जोड़ा जाए, ताकि बैतूल जैसे जिलों में छोटे उद्यमों को और मज़बूती मिल सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सहायक निर्देशक का यह स्वीकारना कि कई लाभार्थियों को अभी तक लोन या टूलकिट नहीं मिली, क्रियान्वयन की खामियों को उजागर करता है। योजना की असली कसौटी यह नहीं कि कितने शिविर हुए, बल्कि यह है कि कितने कारीगरों के बैंक खाते में वास्तव में राशि पहुँची। डिजिटल मार्केटिंग और एआई प्रशिक्षण की बात प्रेरक है, पर जब तक बुनियादी लोन वितरण में एकरूपता नहीं आती, तब तक ये महत्वाकांक्षाएँ कागज़ी ही रहेंगी।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत क्या-क्या मिलता है?
पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत पात्र कारीगरों और शिल्पकारों को ₹1 लाख तक का रियायती लोन, ₹15,000 तक की टूलकिट, व्यावसायिक प्रशिक्षण के दौरान स्टाइपेंड और सरकारी प्रमाण-पत्र दिया जाता है। यह योजना उन्हें औपचारिक बैंकिंग तंत्र से जोड़ने और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उत्पाद बेचने में भी सहायता करती है।
बैतूल में पीएम विश्वकर्मा योजना का शिविर कब और कहाँ हुआ?
यह शिविर 28 जुलाई को बैतूल के जिला पंचायत कार्यालय के सभागार में आयोजित किया गया। इसे एमएसएमई विकास कार्यालय, इंदौर के अधिकारियों ने संचालित किया और जिले के सभी ब्लॉकों से 180 से अधिक हितग्राही उपस्थित रहे।
क्या बैतूल के सभी लाभार्थियों को योजना का लाभ मिल गया है?
नहीं। सहायक निर्देशक गौरव गोयल ने स्वीकार किया कि अभी भी कई लाभार्थियों को लोन या टूलकिट नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि सभी की समस्याओं का फीडबैक लिया गया है और जिला प्रशासन के सहयोग से जल्द से जल्द लाभ दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
पीएम विश्वकर्मा योजना से किन व्यवसायों को सबसे अधिक फायदा हो रहा है?
बैतूल शिविर में लोहे और पीतल के व्यवसाय से जुड़े हितग्राहियों की संख्या सबसे अधिक थी। राजमिस्त्री, पीतल की मूर्तियाँ बनाने वाले और सेंटरिंग का काम करने वाले कारीगरों ने योजना से सीधा लाभ मिलने की बात कही।
पीएम विश्वकर्मा योजना की अब तक की समीक्षा क्या कहती है?
योजना अपने तीसरे वर्ष में है और लाभार्थियों की संख्या तथा उपलब्धियों की समीक्षा जारी है। अधिकारियों के अनुसार कारीगरों को फंडिंग, मार्केटिंग, पैकेजिंग और साइबर सुरक्षा जैसे विषयों पर भी प्रशिक्षित किया जा रहा है, हालाँकि वितरण में एकरूपता अभी एक चुनौती बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले