पीएम विश्वकर्मा योजना से बैतूल के 180 से अधिक कारीगरों को मिली नई राह, लोन-टूलकिट से बदली जिंदगी
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में 28 जुलाई को पीएम विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत एक सेमिनार सह जागरूकता कार्यक्रम और प्रशिक्षण शिविर का आयोजन हुआ, जिसमें जिले के सभी ब्लॉकों से 180 से अधिक महिला-पुरुष हितग्राहियों ने भाग लिया। जिला पंचायत कार्यालय के सभागार में एमएसएमई विकास कार्यालय, इंदौर के अधिकारियों द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में कारीगरों ने बताया कि योजना ने उनके व्यवसाय और पारिवारिक जीवन में उल्लेखनीय बदलाव लाया है।
मुख्य घटनाक्रम
कार्यक्रम में 150 से अधिक पुरुष और महिला लाभार्थी उपस्थित रहे। एमएसएमई विकास कार्यालय, बैतूल के सहायक निर्देशक गौरव गोयल ने बताया कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य लाभार्थियों को फंडिंग और मार्केटिंग के बारे में जागरूक करना था। उन्होंने कहा, 'हमने उन्हें बताया कि टूलकिट और लोन मिलने के बाद व्यवसाय को कैसे आगे बढ़ाएं, उत्पादों की पैकेजिंग, मार्केटिंग, एआई का उपयोग और साइबर क्राइम से बचाव कैसे करें।'
कार्यक्रम में लोहे और पीतल के व्यवसाय से जुड़े हितग्राहियों की संख्या सबसे अधिक रही। यह ऐसे समय में आया है जब योजना अपने तीसरे वर्ष में प्रवेश कर रही है और लाभार्थियों की संख्या तथा उपलब्धियों की समीक्षा की जा रही है।
लाभार्थियों की आवाज़
लाभार्थी महिला नीलम पाटिल ने बताया कि पहले कई बार आवेदन करने के बाद भी लोन नहीं मिला था, लेकिन पीएम विश्वकर्मा योजना से जुड़ने पर उन्हें ₹1 लाख का लोन और ₹15,000 की टूलकिट मिली, जिससे उनका व्यवसाय अब सुचारु रूप से चल रहा है।
राजमिस्त्री और सेंटरिंग कार्य करने वाले सुरेश सराटकर ने कहा कि योजना के तहत लोन, प्रमाण-पत्र और टूलकिट मिलने से उनका व्यवसाय बढ़ा है और अब वे दूसरी किस्त के लोन के लिए इच्छुक हैं। पीतल की मूर्तियाँ बनाने वाली आरती बरसाकर ने बताया कि बेसिक ट्रेनिंग के दौरान स्टाइपेंड भी मिला और डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिए अब वे अपने उत्पाद देश-विदेश तक बेच सकती हैं।
योजना में क्या मिलता है
पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को ₹1 लाख तक का रियायती लोन, ₹15,000 तक की टूलकिट, व्यावसायिक प्रशिक्षण, स्टाइपेंड और सरकारी प्रमाण-पत्र दिया जाता है। गौरतलब है कि यह योजना ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के छोटे व्यवसायों को औपचारिक बैंकिंग तंत्र से जोड़ने का प्रयास करती है।
आम जनता पर असर
सहायक निर्देशक गौरव गोयल ने स्वीकार किया कि अभी भी कई लाभार्थियों को लोन या टूलकिट नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि सभी की समस्याओं का फीडबैक लिया गया है और जिला प्रशासन के सहयोग से शीघ्र लाभ दिलाने का प्रयास किया जाएगा। यह स्वीकारोक्ति बताती है कि योजना का क्रियान्वयन अभी पूरी तरह समान नहीं है।
क्या होगा आगे
योजना के तीसरे वर्ष पूरे होने पर लाभार्थियों की संख्या और उपलब्धियों की व्यापक समीक्षा की जाएगी। अधिकारियों का लक्ष्य है कि शेष हितग्राहियों को भी जल्द से जल्द लोन और टूलकिट से जोड़ा जाए, ताकि बैतूल जैसे जिलों में छोटे उद्यमों को और मज़बूती मिल सके।