पीएम विश्वकर्मा योजना: नीमच में 5,050 कारीगरों को प्रशिक्षण, ₹15.5 करोड़ के ऋण से बदल रही ज़िंदगियाँ
सारांश
मुख्य बातें
पीएम विश्वकर्मा योजना मध्य प्रदेश के नीमच जिले में पारंपरिक कारीगरों, छोटे कामगारों और स्वरोज़गार की इच्छुक महिलाओं के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनती दिख रही है। प्रशिक्षण, कौशल विकास और बैंक ऋण की सुलभता के चलते दर्जनों छोटे कारोबारी गुमटी-स्तरीय काम से आगे निकलकर अपनी स्वतंत्र दुकान और व्यवसाय खड़ा कर चुके हैं।
जिले में योजना का दायरा
नीमच जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अमन वैष्णव के अनुसार, योजना की शुरुआत से अब तक जिले में करीब 36,000 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इनमें से लगभग 5,500 आवेदनों का सफल पंजीकरण किया गया है, जबकि 5,050 लाभार्थियों को विभिन्न ट्रेडों में व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा चुका है। ब्यूटी पार्लर, कारपेंट्री और बार्बर शॉप जैसे क्षेत्रों में आधुनिक कौशल और व्यवसाय-प्रबंधन की जानकारी प्रदान की गई है।
वित्तीय सहायता के मोर्चे पर, अब तक लगभग 1,800 ऋण आवेदन स्वीकृत किए गए हैं, जिनके ज़रिए कुल ₹15.5 करोड़ की राशि लाभार्थियों तक पहुँचाई गई है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य उन गरीब और छोटे कामगारों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना है, जो अब तक ऋण की सुविधा से वंचित थे।
लाभार्थियों की ज़मीनी कहानियाँ
नयागांव की रानी जैन, जो रक्षिता ब्यूटी पार्लर चलाती हैं, ने बताया कि वे करीब आठ वर्षों से पार्लर का काम कर रही थीं, लेकिन पूंजी की कमी विस्तार में बाधा बन रही थी। पीएम विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत 15 दिन की ट्रेनिंग और ₹1 लाख के ऋण की मदद से उन्होंने नए उत्पाद और ज़रूरी सामान खरीदे, जिससे कारोबार और परिवार की आर्थिक स्थिति दोनों में सुधार आया।
नयागांव की ही नंदिनी ब्यूटी पार्लर की संचालक सोनम सेन ने कहा कि प्रशिक्षण में व्यवसाय चलाने और उसे आगे बढ़ाने के व्यावहारिक तरीके सिखाए गए। बैंक से मिले ₹1 लाख के ऋण को उन्होंने सीधे अपने व्यवसाय में लगाया। उनके अनुसार, 'पूंजी की कमी के कारण छोटे कारोबार को विस्तार देना मुश्किल होता है — ऐसे में यह आर्थिक सहायता बेहद उपयोगी साबित हुई।'
नीमच की रत्ना व्यास की कहानी और भी उल्लेखनीय है। योजना के तहत उन्हें सिलाई मशीन और ₹1 लाख का ऋण मिला, जिससे उन्होंने महिलाओं और बच्चों के कपड़े तैयार करने का काम शुरू किया। उन्होंने ऋण की पूरी राशि चुका दी है और अब थोक में कपड़े लेकर सिलाई का व्यवसाय कर रही हैं। रत्ना ने इस बदलाव के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया।
जावी निवासी दशरथ देवीलाल सेन पहले गुमटी पर काम करते थे। योजना के तहत ₹1 लाख के ऋण, प्रशिक्षण के दौरान प्रतिदिन ₹500 के भत्ते और काम से संबंधित किट व मशीनों की सुविधा मिलने के बाद उन्होंने अपनी स्वतंत्र दुकान स्थापित की। उनके अनुसार, दुकान शुरू होने के बाद उनकी आजीविका पहले की तुलना में काफी बेहतर हो गई है।
योजना का व्यापक संदर्भ
केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई पीएम विश्वकर्मा योजना का लक्ष्य देशभर के पारंपरिक शिल्पकारों और कारीगरों को आधुनिक कौशल, डिजिटल साक्षरता और संस्थागत वित्त से जोड़ना है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब असंगठित क्षेत्र के कामगार अक्सर बैंकिंग सुविधाओं से वंचित रहते हैं और अनौपचारिक महाजनी कर्ज़ पर निर्भर रहते हैं। गौरतलब है कि नीमच जैसे अर्ध-शहरी और ग्रामीण जिलों में योजना की पहुँच इस दृष्टि से विशेष महत्व रखती है।
आगे की राह
जिला प्रशासन के अनुसार, शेष पंजीकृत आवेदकों को भी चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण और ऋण सुविधा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी है। अधिकारियों का कहना है कि लक्ष्य केवल ऋण वितरण नहीं, बल्कि दीर्घकालिक स्वरोज़गार सुनिश्चित करना है — ताकि लाभार्थी आत्मनिर्भर उद्यमी बन सकें।