जी20 बैठक में भारत-अमेरिका समझौता: क्रिटिकल मिनरल्स और सप्लाई चेन सुरक्षा पर बनी सहमति
सारांश
मुख्य बातें
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट के बीच 1 सितंबर को एशविले, नॉर्थ कैरोलिना में हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद भारत और अमेरिका ने क्रिटिकल मिनरल्स पर सहयोग को नई गहराई देने पर सहमति जताई है। यह बैठक जी20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों के सम्मेलन के दौरान आयोजित हुई, जहाँ सुरक्षित सप्लाई चेन और रणनीतिक खनिज संसाधनों को द्विपक्षीय आर्थिक संवाद के केंद्र में रखा गया।
मुख्य घटनाक्रम
दोनों नेताओं ने क्रिटिकल मिनरल्स, सप्लाई चेन सुरक्षा, तथा रिसर्च और टेक्नोलॉजी साझेदारी को भारत-अमेरिका आर्थिक संवाद के प्राथमिक एजेंडे के रूप में स्वीकार किया। भारत के वित्त मंत्रालय के अनुसार, बेसेंट ने जी7 प्लस फ्रेमवर्क में भारत की भूमिका की सराहना की और क्रिटिकल मिनरल्स पर जी7 के नेतृत्व वाले संवादों में भारत की भागीदारी का स्वागत किया।
सीतारमण ने बेसेंट को इस वर्ष के अंत में नई दिल्ली आने का आमंत्रण दिया, ताकि भारत-अमेरिका आर्थिक और वित्तीय साझेदारी बैठक आयोजित की जा सके। हालाँकि वित्त मंत्रालय ने इस प्रस्तावित बैठक की कोई निश्चित तारीख अभी तक साझा नहीं की है।
क्रिटिकल मिनरल्स क्यों हैं अहम
क्रिटिकल मिनरल्स का उपयोग स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेलीकॉम, रक्षा विनिर्माण और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी जैसे अनेक उद्योगों में होता है। यह ऐसे समय में आया है जब प्रमुख अर्थव्यवस्थाएँ अपने खनिज स्रोतों में विविधता लाने और केंद्रित सप्लाई चेन से उत्पन्न व्यवधान के जोखिम को कम करने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। गौरतलब है कि क्रिटिकल मिनरल्स वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक चर्चाओं में तेज़ी से महत्वपूर्ण स्थान बनाते जा रहे हैं।
भारत के लिए यह भागीदारी सप्लाई-चेन सुरक्षा, रिसर्च और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ मिलकर काम करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। अमेरिका के लिए, भारत की संलग्नता इन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संसाधनों से जुड़े वैश्विक प्रयासों में एक बड़ी उभरती अर्थव्यवस्था को जोड़ती है।
साझेदारी का व्यापक संदर्भ
एशविले में हुई यह बैठक दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय आर्थिक संपर्क की परंपरा को आगे बढ़ाती है। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ये चर्चाएँ सप्लाई चेन को सुरक्षित करने और रिसर्च व टेक्नोलॉजी साझा करने के उद्देश्य से की जा रही हैं। दोनों पक्षों ने कई क्षेत्रों में सहयोग विस्तार की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
यह उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्रालय ने अभी तक यह खुलासा नहीं किया कि क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर दोनों देश किन विशिष्ट पहलों को आगे बढ़ा सकते हैं।
आगे की राह
इस वर्ष के अंत में नई दिल्ली में प्रस्तावित बैठक एशविले वार्ता की अगली कड़ी होगी और दोनों सरकारों को आर्थिक एवं वित्तीय सहयोग की समीक्षा करने तथा साझेदारी के नए क्षेत्रों की पहचान करने का अवसर देगी। भारत-अमेरिका आर्थिक और वित्तीय साझेदारी का यह ढाँचा दोनों देशों को मंत्रिस्तरीय स्तर पर व्यापक आर्थिक मुद्दों पर नियमित संवाद बनाए रखने की सुविधा देता है।