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भारत-अमेरिका में महत्वपूर्ण खनिज समझौता, चीन के दबदबे को चुनौती देने की रणनीतिक पहल

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भारत-अमेरिका में महत्वपूर्ण खनिज समझौता, चीन के दबदबे को चुनौती देने की रणनीतिक पहल

सारांश

चीन के खनिज एकाधिकार को सीधी चुनौती देते हुए भारत और अमेरिका ने क्वाड बैठक के दौरान एक रणनीतिक फ्रेमवर्क साइन किया। खनन से रीसाइक्लिंग तक की पूरी सप्लाई चेन को कवर करने वाला यह समझौता सेमीकंडक्टर, EV और AI जैसे भविष्य के उद्योगों की आपूर्ति सुरक्षा के लिए निर्णायक माना जा रहा है।

मुख्य बातें

भारत और अमेरिका ने 26 मई 2025 को महत्वपूर्ण खनिज और दुर्लभ मृदा तत्वों पर रणनीतिक फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए।
समझौता क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान एस.
जयशंकर और मार्को रुबियो की उपस्थिति में हुआ।
फ्रेमवर्क में खनन, प्रोसेसिंग, रीसाइक्लिंग और संबद्ध निवेश — पूरी सप्लाई चेन शामिल है।
इस समझौते की नींव 4 फरवरी 2025 को वॉशिंगटन डीसी के क्रिटिकल मिनरल्स फोरम में रखी गई थी।
भारत ने अमेरिका के नेतृत्व वाले 'पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन' पर भी हस्ताक्षर किए, जो AI, सेमीकंडक्टर और खनिज आपूर्ति सुरक्षा पर केंद्रित है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की उपस्थिति में भारत और अमेरिका ने 26 मई 2025 को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ मृदा तत्वों की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करना है। ये वही अहम पदार्थ हैं, जो सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन, सोलर पैनल और उन्नत रक्षा प्रणालियों के निर्माण की रीढ़ हैं। यह समझौता क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान संपन्न हुआ।

समझौते की पृष्ठभूमि

यह रणनीतिक फ्रेमवर्क ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर इन संसाधनों पर चीन के एकाधिकार को लेकर गहरी चिंता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन खनिजों पर किसी एक देश की निर्भरता उसे भू-राजनीतिक दबाव का हथियार बनाने का अवसर देती है। गौरतलब है कि इस समझौते की नींव 4 फरवरी 2025 को रखी गई थी, जब भारत ने वॉशिंगटन डीसी में आयोजित 'क्रिटिकल मिनरल्स फोरम' में भागीदारी की थी।

जयशंकर का बयान

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस अवसर पर कहा, 'आज हम भारत-अमेरिका के बीच एक ऐसा फ्रेमवर्क साइन कर रहे हैं, जिसका मकसद क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ्स की सप्लाई को सुरक्षित करना है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सहयोग द्विपक्षीय, क्वाड और समान विचारधारा वाले देशों के व्यापक समूह — तीनों स्तरों पर आगे बढ़ाया जाएगा। जयशंकर ने यह भी बताया कि इस फ्रेमवर्क का दायरा खनन, प्रोसेसिंग, रीसाइक्लिंग और संबद्ध निवेश तक फैला हुआ है।

रुबियो का रुख

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि मजबूत और नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्थाएं किसी एकल देश या एकल स्रोत पर निर्भर नहीं रह सकतीं, क्योंकि ऐसी निर्भरता दबाव का साधन बन जाती है। उन्होंने भारत यात्रा के दौरान कई बार भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी की अहमियत को रेखांकित किया और इस समझौते को उसी साझेदारी का ठोस प्रमाण बताया।

पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन

रुबियो ने भारत द्वारा 'पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन' पर हस्ताक्षर करने का भी उल्लेख किया। यह अमेरिका के नेतृत्व में गठित एक बहुपक्षीय समूह है, जिसका लक्ष्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों के लिए सुरक्षित एवं विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला तैयार करना है। भारत की इस घोषणापत्र पर भागीदारी उसकी वैश्विक तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला में बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।

आगे की राह

यह समझौता भारत की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता और विविध साझेदारियों के माध्यम से आपूर्ति सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहता है। विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम भारत को वैश्विक खनिज आपूर्ति श्रृंखला पुनर्गठन में एक केंद्रीय भागीदार के रूप में स्थापित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में होगी — भारत के पास दुर्लभ मृदा प्रसंस्करण की क्षमता अभी भी सीमित है और चीन की तुलना में यह अंतर पाटने में वर्षों लग सकते हैं। 'पैक्स सिलिका' जैसे बहुपक्षीय ढाँचों में शामिल होना भारत की रणनीतिक दिशा को स्पष्ट करता है, परंतु यह भी देखना होगा कि क्या इससे घरेलू खनन और प्रसंस्करण में वास्तविक निवेश आता है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पुनर्गठन की इस दौड़ में भारत की भागीदारी अवसर भी है और दायित्व भी।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-अमेरिका महत्वपूर्ण खनिज समझौता क्या है?
यह 26 मई 2025 को क्वाड बैठक के दौरान हस्ताक्षरित एक रणनीतिक फ्रेमवर्क है, जिसका उद्देश्य सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन, सोलर पैनल और रक्षा उपकरणों के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ मृदा तत्वों की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करना है। इसमें खनन से लेकर रीसाइक्लिंग तक पूरी सप्लाई चेन में सहयोग शामिल है।
यह समझौता चीन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
चीन इन महत्वपूर्ण खनिजों के खनन और प्रसंस्करण पर वैश्विक स्तर पर प्रभुत्व रखता है, जिससे उसे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित करने की क्षमता मिलती है। भारत-अमेरिका का यह फ्रेमवर्क उसी एकाधिकार को कम करने और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत विकसित करने की दिशा में उठाया गया कदम है।
पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन क्या है और भारत ने इस पर हस्ताक्षर क्यों किए?
पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन अमेरिका के नेतृत्व में बना एक बहुपक्षीय समूह है, जिसका लक्ष्य AI, सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद सप्लाई चेन तैयार करना है। भारत ने इस पर हस्ताक्षर कर वैश्विक तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला में अपनी सक्रिय भूमिका को रेखांकित किया है।
इस फ्रेमवर्क में क्या-क्या शामिल है?
इस फ्रेमवर्क में खनन, प्रोसेसिंग, रीसाइक्लिंग और इससे जुड़े निवेश — यानी पूरी आपूर्ति श्रृंखला में द्विपक्षीय सहयोग शामिल है। विदेश मंत्री जयशंकर के अनुसार, इसे क्वाड और समान विचारधारा वाले देशों के बड़े समूह के स्तर पर भी आगे बढ़ाया जाएगा।
इस समझौते की शुरुआत कब और कहाँ हुई थी?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के अनुसार, इस समझौते की नींव 4 फरवरी 2025 को वॉशिंगटन डीसी में आयोजित 'क्रिटिकल मिनरल्स फोरम' में रखी गई थी, जिसमें भारत ने भागीदारी की थी।
राष्ट्र प्रेस
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