जयशंकर-पेनी वोंग द्विपक्षीय बैठक: ECTA से AICA, यूरेनियम और क्रिटिकल मिनरल्स पर आगे बढ़े भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 26 मई 2026 को नई दिल्ली में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग के साथ अलग से द्विपक्षीय वार्ता की। इस बैठक में व्यापार समझौते, रक्षा सहयोग, यूरेनियम आपूर्ति और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
व्यापार और निवेश: ECTA से AICA की ओर
जयशंकर ने बैठक के बाद कहा, 'जहाँ व्यापार और निवेश की बात है, हम ECTA से आगे बढ़कर AICA पर बातचीत कर रहे हैं।' उन्होंने बताया कि ऊर्जा व्यापार पहले से सक्रिय है और दोनों देश इसे यूरेनियम आपूर्ति तक विस्तारित करना चाहते हैं। जयशंकर ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत के परमाणु क्षेत्र में हुए सुधारों के कारण परमाणु ऊर्जा उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है, जिससे यूरेनियम की माँग और बढ़ेगी।
क्रिटिकल मिनरल्स और तकनीकी सहयोग
दोनों देशों की टीमें क्रिटिकल मिनरल्स पर अलग से बातचीत कर रही हैं। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर, EV बैटरी और रक्षा तकनीक के लिए ज़रूरी खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को लेकर प्रतिस्पर्धा तेज़ हो रही है। ऑस्ट्रेलिया इन खनिजों का एक प्रमुख वैश्विक स्रोत है, और भारत के लिए यह साझेदारी रणनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है।
रक्षा और समुद्री सहयोग
जयशंकर ने बताया कि दोनों देशों के बीच रक्षा आदान-प्रदान और संयुक्त अभ्यास फिर से नियमित हो रहे हैं। उन्होंने कहा, 'समुद्री सहयोग इसका केंद्र रहा है।' इसमें समुद्री निगरानी, डोमेन अवेयरनेस, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, समुद्री केबल, प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और आपदा राहत गतिविधियाँ शामिल हैं। उन्होंने स्पेस सहयोग पर भी प्रारंभिक बातचीत होने का उल्लेख किया।
क्वाड बैठक: इंडो-पैसिफिक पर साझा दृष्टिकोण
जयशंकर ने क्वाड बैठक को '2026 की पहली बैठक' बताया और कहा कि 2025 में दो बार क्वाड मंत्रियों की मुलाकात हो चुकी है। उन्होंने कहा, 'विचारों का आदान-प्रदान काफी उपयोगी रहा।' क्वाड के चारों देशों — भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया — ने इंडो-पैसिफिक में सुरक्षित और निर्बाध समुद्री व्यापार सुनिश्चित करने तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन पर ज़ोर दिया। गौरतलब है कि चारों देश बाज़ार-आधारित लोकतंत्र हैं और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उनकी भौगोलिक उपस्थिति इस साझेदारी को विशेष महत्व देती है।
आगे की राह
दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों की गति को सकारात्मक बताया। जयशंकर ने कहा कि नवंबर में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की मुलाकात हुई थी और जनवरी में ऑस्ट्रेलियाई स्पीकर भारत आए थे, जो संसदीय और कार्यकारी स्तर पर सक्रिय जुड़ाव का संकेत है। उन्होंने यह भी कहा कि शाम की बातचीत में क्षेत्रीय पड़ोस, वैश्विक हालात और उन त्रिपक्षीय समूहों पर भी चर्चा होगी जिनका दोनों देश हिस्सा हैं।