दिल्ली: रोहिणी में 4 घंटे में फर्जी लूट का भंडाफोड़, ₹5 लाख हड़पने की साजिश रचने वाला चालक गुरनाम सिंह गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस ने 10 जुलाई 2026 को रोहिणी में महज चार घंटे के भीतर एक कथित लूट की वारदात को फर्जी साबित करते हुए शिकायतकर्ता को ही आरोपी के रूप में गिरफ्तार कर लिया। आरोपी गुरनाम सिंह उर्फ हैप्पी (42) ने अपने मालिक के ₹5 लाख हड़पने की नीयत से बंदूक की नोक पर लूट की झूठी कहानी गढ़ी थी — और वह नकदी उसी की गाड़ी के बोनट में छिपी मिली।
मामले का घटनाक्रम
10 जुलाई को के.एन.के. मार्ग थाने में पीसीआर कॉल के ज़रिए सूचना आई कि रोहिणी सेक्टर-26 स्थित द्वारकाधीश अपार्टमेंट के पास थार एसयूवी में सवार तीन बदमाशों ने एक व्यक्ति से बंदूक की नोक पर ₹5 लाख लूट लिए। शिकायत में बताया गया कि गुरनाम सिंह कश्मीरी गेट स्थित एक स्पेयर पार्ट्स वर्कशॉप में चालक और हेल्पर के रूप में काम करता है, और मालिक के निर्देश पर वह यह नकदी रोहिणी सेक्टर-14 पहुँचाने निकला था।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर जाँच शुरू की। के.एन.के. मार्ग थाना प्रभारी इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार के नेतृत्व में विशेष जाँच टीम गठित की गई।
तकनीकी साक्ष्यों ने खोली पोल
पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज की मदद से गुरनाम सिंह की पूरी आवाजाही की पड़ताल की। जाँच में सामने आया कि उसकी गाड़ी का किसी भी थार एसयूवी ने पीछा नहीं किया था और न ही उसे किसी स्थान पर रोका गया था — जो उसकी कहानी को सीधे झुठलाता था।
इसके बाद पुलिस ने वाहन की गहन तलाशी ली। गाड़ी के बोनट में बैटरी के पास कपड़े के एक बैग में छिपाए गए पूरे ₹5 लाख बरामद हुए। वर्कशॉप के प्रतिनिधियों ने मौके पर ही बरामद नकदी की पहचान की पुष्टि कर दी।
आरोपी का कबूलनामा
पुलिस के अनुसार, सबूत सामने आने पर गुरनाम सिंह ने स्वीकार किया कि उसने ही नकदी छिपाकर फर्जी लूट की कहानी बनाई थी। उसने माना कि पैसों को हड़पने के इरादे से उसने झूठी पीसीआर कॉल की थी। पूछताछ में उसने बताया कि आर्थिक तंगी के कारण उसने यह साजिश रची। गुरनाम सिंह पिछले 10 वर्षों से उसी वर्कशॉप में चालक के रूप में काम कर रहा था।
गिरफ्तारी और धाराएँ
कबूलनामे के बाद पुलिस ने गुरनाम सिंह को गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ बीएनएस की मूल धाराओं के अलावा झूठी सूचना देने और आपराधिक न्यासभंग (क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट) से संबंधित धाराएँ भी जोड़ी गई हैं। मामले की आगे की जाँच जारी है।
आगे क्या
यह मामला इस बात की मिसाल है कि किस तरह नियोक्ता पर भरोसा करने वाला कर्मचारी ही उसके खिलाफ साजिश रच सकता है। पुलिस अब यह भी जाँच कर रही है कि क्या गुरनाम सिंह का किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क था जो इस योजना में शामिल हो सकता है। न्यायालय में चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामले की कानूनी कार्यवाही आगे बढ़ेगी।