12 जुलाई 2026
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शिलांग में 13-14 जुलाई को नेक्स्टजेन गवर्नेंस सम्मेलन, 300 से अधिक प्रतिनिधि करेंगे भागीदारी

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शिलांग में 13-14 जुलाई को नेक्स्टजेन गवर्नेंस सम्मेलन, 300 से अधिक प्रतिनिधि करेंगे भागीदारी

सारांश

शिलांग में 13-14 जुलाई को होने वाला नेक्स्टजेन गवर्नेंस सम्मेलन महज एक सरकारी आयोजन नहीं — यह पूर्वोत्तर भारत को राष्ट्रीय प्रशासनिक सुधार चर्चा के केंद्र में लाने की कोशिश है। 300 से अधिक प्रतिनिधि, पुरस्कार-विजेता ई-गवर्नेंस मॉडल और डीएआरपीजी की अगुवाई — यह डिजिटल इंडिया एजेंडे की अगली कड़ी है।

मुख्य बातें

डीएआरपीजी और मेघालय सरकार संयुक्त रूप से 13-14 जुलाई 2026 को शिलांग में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करेंगे।
सम्मेलन का विषय 'नेक्स्टजेन एडमिनिस्ट्रेटिव एंड ई-गॉव रिफॉर्म' है।
उद्घाटन सत्र में केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ.
जितेंद्र सिंह और मुख्यमंत्री कॉनराड के.
संगमा संबोधित करेंगे।
300 से अधिक प्रतिनिधि — वरिष्ठ अधिकारी, जिला कलेक्टर, विशेषज्ञ और शैक्षणिक प्रतिनिधि — भाग लेंगे।
2023-24 के प्रधानमंत्री पुरस्कार विजेता पहलों और ई-गवर्नेंस 2026 के राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता परियोजनाओं की प्रस्तुतियाँ होंगी।
साइबर सुरक्षा, डिजिटल बैंकिंग, ग्रामीण विकास और शहरी गवर्नेंस सहित कई विषयों पर चर्चा होगी।

प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) तथा मेघालय सरकार के संयुक्त तत्वावधान में 13 और 14 जुलाई 2026 को शिलांग में 'नेक्स्टजेन एडमिनिस्ट्रेटिव एंड ई-गॉव रिफॉर्म' विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इस सम्मेलन में देशभर से नीति निर्माता, प्रशासक, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ और शासन-प्रशासन के पेशेवर एक मंच पर एकत्रित होंगे।

उद्घाटन सत्र: प्रमुख वक्ता

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह — जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री हैं — और मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा संयुक्त रूप से संबोधित करेंगे। इसके अतिरिक्त, डीएआरपीजी, पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग (डीपीपीडब्ल्यू) तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (एमडीएनईआर) की सचिव निवेदिता शुक्ला वर्मा और मेघालय के मुख्य सचिव डॉ. शकील पी. अहमद भी उद्घाटन सत्र में अपने विचार रखेंगे।

प्रतिनिधित्व और भागीदारी

इस राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों, जिला कलेक्टरों, नीति निर्माताओं, विषय विशेषज्ञों, शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों और लोक प्रशासन क्षेत्र के पेशेवरों सहित 300 से अधिक प्रतिनिधियों के भाग लेने की उम्मीद है। यह सम्मेलन लोक प्रशासन और डिजिटल गवर्नेंस के भविष्य पर विचार-विमर्श के लिए एक राष्ट्रीय मंच के रूप में काम करेगा, साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच नवाचारी विचारों और श्रेष्ठ प्रशासनिक प्रथाओं के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करेगा।

मुख्य सत्र और प्रस्तुतियाँ

दो दिवसीय कार्यक्रम में प्रतिनिधि 2023 और 2024 के प्रधानमंत्री पुरस्कार-विजेता पहलों, ई-गवर्नेंस के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार-विजेता परियोजनाओं, मेघालय सरकार की श्रेष्ठ शासन-प्रथाओं और पूर्वोत्तर क्षेत्र से डीएआरपीजी-समर्थित राज्य सहयोगी पहलों (एससीआई) पर प्रस्तुतियाँ देखेंगे। इन प्रस्तुतियों में समग्र जिला विकास, डिजिटल गवर्नेंस, साइबर सुरक्षा, सार्वजनिक सेवा वितरण, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, बैंकिंग, उपभोक्ता संरक्षण, शहरी गवर्नेंस, ग्रामीण विकास और तकनीक-आधारित प्रशासन जैसे विविध विषय शामिल होंगे।

सम्मेलन का आरंभ एक विशेष सत्र से होगा, जिसमें मेघालय के गवर्नेंस नवाचारों और नागरिक-केंद्रित सुधारों को प्रदर्शित किया जाएगा — जिनका उद्देश्य सेवा वितरण को सुदृढ़ करना और प्रशासनिक दक्षता में सुधार लाना है। एक अन्य सत्र में प्रधानमंत्री पुरस्कार विजेता पहलों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिसमें समग्र विकास, शिक्षा, ग्रामीण आजीविका और आकांक्षी जिला कार्यक्रम के सफल जिला-स्तरीय मॉडल प्रस्तुत किए जाएंगे।

ई-गवर्नेंस 2026 पुरस्कार विजेता परियोजनाएँ

प्रतिभागियों को ई-गवर्नेंस 2026 के राष्ट्रीय पुरस्कार-विजेता परियोजनाओं से भी अवगत कराया जाएगा। ये परियोजनाएँ शहरी गवर्नेंस, स्वास्थ्य सेवा, डिजिटल बैंकिंग, तीर्थयात्रा प्रबंधन, पंचायती राज, उपभोक्ता संरक्षण और साइबर सुरक्षा में उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग को प्रदर्शित करेंगी। अपेक्षा है कि ये परियोजनाएँ पूरे देश में व्यापक पैमाने पर अपनाए जाने योग्य गवर्नेंस मॉडल के रूप में उभरेंगी।

आगे की दिशा

यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब केंद्र सरकार डिजिटल इंडिया और सुशासन के एजेंडे को नई गति देने पर बल दे रही है। गौरतलब है कि पूर्वोत्तर भारत में इस स्तर का प्रशासनिक सुधार सम्मेलन आयोजित करना स्वयं में एक महत्वपूर्ण संकेत है — यह क्षेत्र के राज्यों को राष्ट्रीय गवर्नेंस चर्चा की मुख्यधारा में लाने का प्रयास है। सम्मेलन से निकलने वाली सिफारिशें और श्रेष्ठ प्रथाएँ भविष्य की नीति-निर्माण प्रक्रिया में सहायक हो सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो इस क्षेत्र की दीर्घकालिक उपेक्षा की भरपाई की दिशा में एक कदम है। हालाँकि, 'नेक्स्टजेन' जैसे शब्द तब तक केवल नामकरण हैं जब तक सम्मेलन से निकली सिफारिशों का ठोस क्रियान्वयन न हो। ई-गवर्नेंस पुरस्कार विजेता परियोजनाओं का प्रदर्शन उपयोगी है, लेकिन असली प्रश्न यह है कि इन मॉडलों को राज्यों में अपनाने की समयसीमा और जवाबदेही तंत्र क्या होगा — जो सम्मेलन के एजेंडे में अभी तक स्पष्ट नहीं है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिलांग में 13-14 जुलाई को होने वाला नेक्स्टजेन गवर्नेंस सम्मेलन क्या है?
यह डीएआरपीजी और मेघालय सरकार द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन है, जिसका विषय 'नेक्स्टजेन एडमिनिस्ट्रेटिव एंड ई-गॉव रिफॉर्म' है। इसका उद्देश्य लोक प्रशासन और डिजिटल गवर्नेंस के भविष्य पर राष्ट्रीय स्तर पर विचार-विमर्श करना और श्रेष्ठ प्रथाओं का आदान-प्रदान करना है।
इस सम्मेलन में कौन-कौन से प्रमुख नेता और अधिकारी भाग लेंगे?
उद्घाटन सत्र को केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा संबोधित करेंगे। इसके अलावा डीएआरपीजी सचिव निवेदिता शुक्ला वर्मा और मेघालय के मुख्य सचिव डॉ. शकील पी. अहमद भी उद्घाटन सत्र में बोलेंगे।
इस सम्मेलन में कितने और किस तरह के प्रतिनिधि भाग लेंगे?
सम्मेलन में 300 से अधिक प्रतिनिधियों के भाग लेने की उम्मीद है। इनमें केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, जिला कलेक्टर, नीति निर्माता, विषय विशेषज्ञ और शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
सम्मेलन में किन विषयों पर चर्चा होगी?
सम्मेलन में समग्र जिला विकास, डिजिटल गवर्नेंस, साइबर सुरक्षा, सार्वजनिक सेवा वितरण, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, डिजिटल बैंकिंग, तीर्थयात्रा प्रबंधन, उपभोक्ता संरक्षण, शहरी एवं ग्रामीण गवर्नेंस और तकनीक-आधारित प्रशासन जैसे विषयों पर चर्चा होगी। 2023-24 के प्रधानमंत्री पुरस्कार विजेता पहलों और ई-गवर्नेंस 2026 पुरस्कार विजेता परियोजनाओं की प्रस्तुतियाँ भी होंगी।
यह सम्मेलन पूर्वोत्तर भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
शिलांग में इस सम्मेलन का आयोजन पूर्वोत्तर क्षेत्र को राष्ट्रीय प्रशासनिक सुधार विमर्श की मुख्यधारा में लाने का प्रयास है। मेघालय की श्रेष्ठ गवर्नेंस प्रथाओं और पूर्वोत्तर से डीएआरपीजी-समर्थित राज्य सहयोगी पहलों को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा, जो इस क्षेत्र के गवर्नेंस मॉडलों को देशव्यापी मान्यता दिलाने का अवसर है।
राष्ट्र प्रेस
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