20 जुलाई 2026
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अमित शाह आज शिलांग में करेंगे पूर्वोत्तर परिषद के 73वें पूर्ण सत्र की अध्यक्षता, आठों राज्यों के CM शामिल

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अमित शाह आज शिलांग में करेंगे पूर्वोत्तर परिषद के 73वें पूर्ण सत्र की अध्यक्षता, आठों राज्यों के CM शामिल

सारांश

शिलांग में 73वाँ पूर्वोत्तर परिषद पूर्ण सत्र सिर्फ़ रस्म नहीं — यह केंद्र की पूर्वोत्तर रणनीति का बड़ा शक्ति-प्रदर्शन है। अमित शाह की अध्यक्षता, सिंधिया की मौजूदगी और आठों राज्यों के CM-राज्यपालों की उपस्थिति बताती है कि कनेक्टिविटी, सीमा-ढाँचा और PM-DevINE जैसी परियोजनाएँ इस बार एजेंडे के केंद्र में रहेंगी।

मुख्य बातें

गृह मंत्री अमित शाह 4 जून को शिलांग में 73वें NEC पूर्ण सत्र की अध्यक्षता करेंगे।
DoNER मंत्री और NEC उपाध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया भी बैठक में शामिल होंगे।
पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों के राज्यपाल और मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति अपेक्षित।
पिछला 72वाँ सत्र दिसंबर 2024 में अगरतला, त्रिपुरा में आयोजित हुआ था।
एजेंडे में NESIDS , PM-DevINE सहित बुनियादी ढाँचा और कनेक्टिविटी परियोजनाएँ केंद्र में।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार, 4 जून को मेघालय की राजधानी शिलांग में पूर्वोत्तर परिषद (NEC) के 73वें पूर्ण सत्र की अध्यक्षता करेंगे, जिसमें पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों के राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों के शामिल होने की संभावना है। यह बैठक क्षेत्र की 55 साल पुरानी शीर्ष क्षेत्रीय संस्था के तत्वावधान में विकास, कनेक्टिविटी और सतत प्रगति की रणनीतियों पर केंद्रित होगी।

मुख्य घटनाक्रम

पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (DoNER) और संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, जो NEC के उपाध्यक्ष भी हैं, इस उच्चस्तरीय बैठक में भाग लेंगे। NEC के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, बैठक में आठों पूर्वोत्तर राज्यों के राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति अपेक्षित है, जो इसे हाल के वर्षों के सबसे प्रतिनिधिक क्षेत्रीय मंथन में से एक बनाता है।

एजेंडे पर क्या

NEC ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर पोस्ट में कहा, ‘यह महत्वपूर्ण बैठक नेताओं और हितधारकों को एक मंच पर लाएगी, ताकि पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास, कनेक्टिविटी और सतत विकास के लिए प्रमुख पहलों पर विचार-विमर्श किया जा सके।’ बैठक में बुनियादी ढाँचा, सीमावर्ती कनेक्टिविटी और सामाजिक-आर्थिक विकास के मुद्दों पर निर्णायक चर्चा की संभावना है।

राज्यों की तैयारियाँ

पूर्ण सत्र से पहले मिजोरम के राज्यपाल जनरल (डॉ.) विजय कुमार सिंह (सेवानिवृत्त) ने सोमवार को आइजोल के लोक भवन कॉन्फ्रेंस रूम में राज्य की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों के विकास के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता पर बल देते हुए सभी विभागों को निर्देश दिए कि राज्य की प्राथमिकताओं, प्रस्तावों और विकासात्मक आवश्यकताओं को NEC के समक्ष प्रभावी ढंग से रखा जाए।

योजना एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन विभाग के सचिव डेविड लालथांतलुआंगा ने दिसंबर 2024 में अगरतला, त्रिपुरा में आयोजित 72वें NEC पूर्ण सत्र में लिए गए मिजोरम-संबंधी निर्णयों पर की गई अनुवर्ती कार्रवाइयों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने NEC-वित्तपोषित परियोजनाओं, NESIDS (सड़कें), NESIDS (OTRI) और PM-DevINE के अंतर्गत चल रहे प्रोजेक्ट्स की स्थिति पर भी जानकारी साझा की।

क्यों अहम है यह सत्र

यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब केंद्र सरकार पूर्वोत्तर में रेल, सड़क और सीमावर्ती ढाँचे पर निवेश तेज कर रही है, और क्षेत्र में जातीय हिंसा तथा सीमा-संबंधी तनावों ने नीतिगत ध्यान बढ़ाया है। गौरतलब है कि NEC, जिसकी स्थापना 1971 में हुई थी, पूरे क्षेत्र में अंतर-राज्यीय समन्वय और संसाधन आवंटन की रीढ़ रही है।

आगे क्या

सत्र के बाद मिजोरम सहित अन्य राज्यों की बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं पर नए निर्णयों की घोषणा की उम्मीद है। समीक्षा बैठक में सामान्य प्रशासन विभाग के प्रधान सचिव सुधीर कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर इस बार का संदर्भ अलग है — मणिपुर की जातीय हिंसा, मिजोरम-म्यांमार सीमा का तनाव और चीन-सीमा ढाँचा क्षेत्र की राजनीति को नए सिरे से परिभाषित कर रहे हैं। असली प्रश्न यह है कि क्या NEC केवल परियोजना-समन्वय निकाय बना रहेगा, या जातीय-राजनीतिक संवाद का मंच भी बनेगा। PM-DevINE और NESIDS जैसी योजनाओं का प्रभाव अब तक असमान रहा है; पारदर्शी प्रगति-रिपोर्टिंग के बिना घोषणाओं की भरमार ज़मीनी असर तक नहीं पहुँचेगी।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

73वाँ पूर्वोत्तर परिषद पूर्ण सत्र कब और कहाँ हो रहा है?
73वाँ NEC पूर्ण सत्र गुरुवार, 4 जून को मेघालय की राजधानी शिलांग में आयोजित हो रहा है। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे।
बैठक में कौन-कौन शामिल हो रहे हैं?
DoNER मंत्री और NEC उपाध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ-साथ पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों के राज्यपाल और मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति अपेक्षित है। NEC के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार यह हाल के वर्षों की सबसे व्यापक प्रतिनिधिक बैठक होगी।
पूर्वोत्तर परिषद (NEC) क्या है और इसकी भूमिका क्या है?
पूर्वोत्तर परिषद 1971 में स्थापित एक 55 साल पुरानी क्षेत्रीय संस्था है, जो पूर्वोत्तर के आठ राज्यों के विकास की योजना और समन्वय करती है। यह बुनियादी ढाँचे, कनेक्टिविटी और सतत विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है।
पिछला NEC पूर्ण सत्र कब और कहाँ हुआ था?
72वाँ NEC पूर्ण सत्र दिसंबर 2024 में त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में आयोजित किया गया था। उस सत्र में लिए गए निर्णयों पर अनुवर्ती कार्रवाई की समीक्षा 73वें सत्र में होगी।
बैठक के एजेंडे पर कौन-सी प्रमुख परियोजनाएँ हैं?
बैठक में NEC-वित्तपोषित परियोजनाओं, NESIDS (सड़कें), NESIDS (OTRI) और PM-DevINE सहित बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा होगी। इनका लक्ष्य पूर्वोत्तर में सामाजिक-आर्थिक विकास और कनेक्टिविटी मज़बूत करना है।
राष्ट्र प्रेस
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