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अमित शाह 4 जून को शिलांग में एनईसी की 73वीं बैठक की करेंगे अध्यक्षता, पूर्वोत्तर के सभी 8 राज्य होंगे शामिल

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अमित शाह 4 जून को शिलांग में एनईसी की 73वीं बैठक की करेंगे अध्यक्षता, पूर्वोत्तर के सभी 8 राज्य होंगे शामिल

सारांश

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 4 जून को शिलांग में एनईसी के 73वें पूर्ण सत्र की अध्यक्षता करेंगे। पूर्वोत्तर के आठों राज्यों के राज्यपाल और मुख्यमंत्री एक मंच पर होंगे — एजेंडे में कनेक्टिविटी, बुनियादी ढाँचा और सतत विकास की प्रमुख पहलें हैं।

मुख्य बातें

गृह मंत्री अमित शाह 4 जून 2025 को शिलांग में एनईसी के 73वें पूर्ण सत्र की अध्यक्षता करेंगे।
डीओएनईआर मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (एनईसी उपाध्यक्ष) भी बैठक में उपस्थित रहेंगे।
पूर्वोत्तर के सभी 8 राज्यों के राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों के भाग लेने की उम्मीद है।
मिजोरम के राज्यपाल जनरल (डॉ.) विजय कुमार सिंह ने आइजोल में राज्य की तैयारियों की समीक्षा की।
बैठक में एनईएसआईडीएस और पीएम-डेविन सहित प्रमुख बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा होगी।
पिछला ( 72वाँ ) एनईसी पूर्ण सत्र दिसंबर 2024 में अगरतला, त्रिपुरा में हुआ था।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 4 जून 2025 को मेघालय की राजधानी शिलांग में नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल (एनईसी) के 73वें पूर्ण सत्र की अध्यक्षता करेंगे। एनईसी के अध्यक्ष के रूप में शाह इस बैठक का नेतृत्व करेंगे, जिसमें पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों के राज्यपाल और मुख्यमंत्री भाग लेंगे।

बैठक में कौन-कौन होगा शामिल

पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (डीओएनईआर) और संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, जो एनईसी के उपाध्यक्ष हैं, भी इस बैठक में उपस्थित रहेंगे। एनईसी के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों के राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों के इस 55 साल पुरानी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में भाग लेने की उम्मीद है।

एनईसी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट करते हुए कहा, 'यह महत्वपूर्ण बैठक पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास, कनेक्टिविटी और सतत विकास के लिए प्रमुख पहलों पर विचार-विमर्श करने के लिए नेताओं और हितधारकों को एक साथ लाएगी।'

मिजोरम ने की तैयारियों की समीक्षा

पूर्ण सत्र से पहले मिजोरम के राज्यपाल जनरल (डॉ.) विजय कुमार सिंह (सेवानिवृत्त) ने सोमवार को आइजोल स्थित लोक भवन के सम्मेलन कक्ष में राज्य की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक के दौरान राज्यपाल ने पूर्वोत्तर राज्यों के विकास के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता पर बल दिया और आगामी सत्र में मिजोरम की विकास संबंधी प्राथमिकताओं पर उचित ध्यान दिए जाने की आवश्यकता रेखांकित की।

योजना एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन विभाग के सचिव डेविड लालथंतलुआंगा ने दिसंबर 2024 में त्रिपुरा के अगरतला में आयोजित 72वें एनईसी पूर्ण सत्र के निर्णयों पर की गई अनुवर्ती कार्रवाइयों पर विस्तृत प्रस्तुति दी।

किन परियोजनाओं पर होगी चर्चा

बैठक में एनईसी द्वारा वित्त पोषित परियोजनाओं, एनईएसआईडीएस (सड़कें), एनईएसआईडीएस (ओटीआरआई) और पीएम-डेविन परियोजनाओं की प्रगति पर विचार-विमर्श होने की उम्मीद है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य राज्य में बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करना और सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देना है।

अधिकारियों ने मिजोरम के अवसंरचना विकास, समग्र कल्याण और आर्थिक प्रगति पर केंद्रित प्रमुख मुद्दों और प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया। समीक्षा बैठक में सामान्य प्रशासन विभाग के प्रधान सचिव सुधीर कुमार और सभी प्रमुख विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

एनईसी की भूमिका और महत्व

गौरतलब है कि एनईसी की स्थापना 1971 में हुई थी और यह पूर्वोत्तर भारत के लिए एक प्रमुख क्षेत्रीय नियोजन एवं समन्वय निकाय है। यह परिषद असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा — इन आठ राज्यों की विकास योजनाओं को एकीकृत दिशा देती है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब केंद्र सरकार पूर्वोत्तर में कनेक्टिविटी और बुनियादी ढाँचे में बड़े निवेश पर ज़ोर दे रही है।

73वाँ पूर्ण सत्र पूर्वोत्तर की विकास प्राथमिकताओं को नई दिशा देने का अवसर होगा — और इसके नतीजे आने वाले महीनों में क्षेत्र की योजनाओं की रूपरेखा तय करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन गृह मंत्री की सक्रिय अध्यक्षता यह संकेत देती है कि केंद्र पूर्वोत्तर को महज प्रशासनिक एजेंडे से आगे राजनीतिक प्राथमिकता के रूप में देख रहा है। असली सवाल यह है कि 73वाँ सत्र पिछले सत्रों की तुलना में कितना अलग परिणाम देता है — खासकर तब जब 72वें सत्र की कई अनुशंसाओं पर अनुवर्ती कार्रवाई अभी जारी है। कनेक्टिविटी और बुनियादी ढाँचे की घोषणाएँ इस क्षेत्र में नई नहीं हैं, परंतु क्रियान्वयन की गति और जवाबदेही तंत्र ही इस बैठक की वास्तविक सफलता का पैमाना होगा।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनईसी की 4 जून की बैठक में क्या होगा?
4 जून 2025 को शिलांग में एनईसी का 73वाँ पूर्ण सत्र आयोजित होगा, जिसमें पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास, कनेक्टिविटी और सतत विकास पर विचार-विमर्श होगा। इसमें पूर्वोत्तर के आठों राज्यों के राज्यपाल और मुख्यमंत्री भाग लेंगे।
नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल (एनईसी) क्या है?
एनईसी 1971 में स्थापित एक क्षेत्रीय नियोजन एवं समन्वय निकाय है, जो पूर्वोत्तर भारत के आठ राज्यों — असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा — की विकास योजनाओं को दिशा देता है। केंद्रीय गृह मंत्री इसके अध्यक्ष और डीओएनईआर मंत्री उपाध्यक्ष होते हैं।
मिजोरम ने इस बैठक की तैयारी कैसे की?
मिजोरम के राज्यपाल जनरल (डॉ.) विजय कुमार सिंह ने आइजोल के लोक भवन में समीक्षा बैठक की, जिसमें 72वें सत्र के निर्णयों पर अनुवर्ती कार्रवाई और एनईसी व डीओएनईआर परियोजनाओं की स्थिति पर प्रस्तुति दी गई। राज्यपाल ने मिजोरम की विकास प्राथमिकताओं को प्रभावी ढंग से रखने पर जोर दिया।
इस बैठक में किन परियोजनाओं पर चर्चा होगी?
बैठक में एनईसी-वित्त पोषित परियोजनाओं, एनईएसआईडीएस (सड़कें), एनईएसआईडीएस (ओटीआरआई) और पीएम-डेविन परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा होगी। ये परियोजनाएँ पूर्वोत्तर में बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने और सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देने के उद्देश्य से चलाई जा रही हैं।
पिछला एनईसी पूर्ण सत्र कब और कहाँ हुआ था?
72वाँ एनईसी पूर्ण सत्र दिसंबर 2024 में त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में आयोजित हुआ था। उस सत्र के निर्णयों और पहलों पर की गई अनुवर्ती कार्रवाई की समीक्षा 73वें सत्र के एजेंडे का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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