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प्रेग्नेंसी ग्लो क्यों आता है चेहरे पर? हार्मोन से लेकर रक्त प्रवाह तक, जानें सभी कारण

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प्रेग्नेंसी ग्लो क्यों आता है चेहरे पर? हार्मोन से लेकर रक्त प्रवाह तक, जानें सभी कारण

सारांश

प्रेग्नेंसी ग्लो महज़ एक मिथक नहीं — यह हार्मोन, बढ़े हुए रक्त प्रवाह और प्राकृतिक तेल के संयोजन का वैज्ञानिक परिणाम है। चौथे महीने के बाद यह चमक सबसे अधिक दिखती है, लेकिन हर महिला का अनुभव अलग होता है — कुछ के लिए यह निखार लाती है, कुछ के लिए मुंहासे।

मुख्य बातें

प्रेग्नेंसी ग्लो शरीर में होने वाले प्राकृतिक हार्मोनल और शारीरिक बदलावों का परिणाम है।
यह चमक प्रायः गर्भावस्था के चौथे महीने के बाद अधिक स्पष्ट होती है।
शरीर में रक्त की मात्रा बढ़ने से चेहरे की नसों तक अधिक रक्त पहुँचता है, जिससे गालों पर लालिमा और चमक आती है।
त्वचा में प्राकृतिक तेल (सीबम) का उत्पादन बढ़ता है — जो कुछ महिलाओं में मुंहासे भी पैदा कर सकता है।
ताज़े फल, हरी सब्ज़ियाँ, प्रोटीन और पर्याप्त पानी का सेवन त्वचा की चमक को और बेहतर बनाता है।
हर महिला का शरीर अलग होता है — प्रेग्नेंसी ग्लो सभी को समान रूप से नहीं दिखता।

गर्भावस्था के नौ महीनों के दौरान महिला के शरीर में अनेक शारीरिक और हार्मोनल परिवर्तन होते हैं, जिनका प्रभाव केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता — बल्कि चेहरे और त्वचा पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। इसी को आमतौर पर 'प्रेग्नेंसी ग्लो' कहा जाता है। चिकित्सकों के अनुसार, यह चमक शरीर में होने वाले प्राकृतिक बदलावों का स्वाभाविक परिणाम है, हालाँकि हर महिला का अनुभव भिन्न हो सकता है।

प्रेग्नेंसी ग्लो क्या होता है

डॉक्टरों के अनुसार, प्रेग्नेंसी ग्लो वह स्थिति है जब गर्भावस्था के दौरान महिला का चेहरा पहले की तुलना में अधिक साफ, चमकदार और तरोताज़ा दिखने लगता है। कई महिलाओं के गाल हल्के गुलाबी नज़र आते हैं और त्वचा में एक विशेष प्रकार की आभा दिखती है। यह बदलाव प्रायः गर्भावस्था के चौथे महीने के बाद अधिक स्पष्ट होता है। शुरुआती महीनों में मतली, थकान और कमज़ोरी हावी रहती है, परंतु जैसे-जैसे शरीर इन परिवर्तनों के अनुकूल होता है, कई महिलाओं के चेहरे पर यह प्राकृतिक निखार उभरने लगता है।

हार्मोनल बदलाव की भूमिका

इस चमक का सबसे प्रमुख कारण शरीर में होने वाले हार्मोनल परिवर्तन हैं। गर्भावस्था के दौरान कुछ हार्मोन सामान्य से अधिक मात्रा में बनने लगते हैं, जिनका सीधा प्रभाव त्वचा पर पड़ता है। इन हार्मोनों के कारण त्वचा में रक्त संचार बेहतर होता है, जिससे चेहरा बिना किसी क्रीम या मेकअप के भी निखरा हुआ प्रतीत होता है। यह ऐसे समय में आता है जब शरीर स्वयं को गर्भ में पल रहे शिशु की ज़रूरतों के अनुरूप ढाल रहा होता है।

रक्त की मात्रा में वृद्धि का असर

चिकित्सकों के अनुसार, गर्भावस्था में माँ और शिशु दोनों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए शरीर में रक्त की मात्रा उल्लेखनीय रूप से बढ़ जाती है। जब यह रक्त तेज़ गति से पूरे शरीर में प्रवाहित होता है, तो चेहरे की सूक्ष्म नसों तक भी अधिक रक्त पहुँचता है। इससे गालों पर हल्की लालिमा आती है और चेहरा चमकदार दिखाई देता है — यही बदलाव लोगों को प्रेग्नेंसी ग्लो के रूप में नज़र आता है। इसके अतिरिक्त, जैसे-जैसे शिशु का विकास होता है, त्वचा फैलती है और शरीर की गर्माहट भी बढ़ती है, जिससे चेहरे पर हल्की लालिमा और चमक और अधिक स्पष्ट हो जाती है।

प्राकृतिक तेल और मुंहासों की संभावना

गर्भावस्था के दौरान त्वचा में प्राकृतिक तेल (सीबम) का उत्पादन भी बढ़ जाता है, जिससे चेहरा मुलायम और चमकदार दिख सकता है। हालाँकि, जिन महिलाओं की त्वचा पहले से तैलीय होती है, उन्हें इस अवधि में मुंहासों की समस्या भी हो सकती है। चिकित्सकों का कहना है कि यह भी गर्भावस्था का एक सामान्य बदलाव है और इसका अर्थ यह नहीं कि त्वचा अस्वस्थ है। गौरतलब है कि हर महिला का शरीर अलग होता है, इसलिए हर किसी का अनुभव भिन्न हो सकता है।

सही पोषण और त्वचा पर प्रभाव

गर्भावस्था के दौरान संतुलित आहार का असर त्वचा पर स्पष्ट रूप से दिखता है। यदि गर्भवती महिला नियमित रूप से ताज़े फल, हरी सब्ज़ियाँ, दाल, दूध, दही, अंडा और अन्य प्रोटीन युक्त भोजन लेती है तथा पर्याप्त मात्रा में पानी पीती है, तो इसका लाभ सीधे त्वचा को मिलता है। शरीर को आवश्यक विटामिन और पोषक तत्व मिलने से त्वचा अधिक स्वस्थ और चमकदार दिख सकती है। आगे चलकर, प्रसव के बाद हार्मोन स्तर सामान्य होने पर यह चमक धीरे-धीरे कम हो सकती है — इसलिए गर्भावस्था के दौरान त्वचा की उचित देखभाल और पोषण पर ध्यान देना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके पीछे की जैविक प्रक्रिया को शायद ही कभी ठीक से समझाया जाता है। मुख्यधारा की कवरेज जो अनदेखा करती है वह यह है कि यही हार्मोनल उछाल कुछ महिलाओं के लिए मुंहासे और तैलीय त्वचा भी लाता है — यानी 'ग्लो' सबके लिए एकसमान नहीं होता। गर्भावस्था में पोषण और मानसिक स्वास्थ्य का त्वचा पर प्रभाव उतना ही महत्वपूर्ण है जितना हार्मोन, और इस पहलू पर जागरूकता बढ़ाना ज़रूरी है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रेग्नेंसी ग्लो क्या होता है और यह क्यों आता है?
प्रेग्नेंसी ग्लो वह स्थिति है जब गर्भावस्था के दौरान महिला का चेहरा अधिक साफ, चमकदार और तरोताज़ा दिखने लगता है। यह मुख्यतः हार्मोनल बदलावों, शरीर में रक्त की बढ़ी हुई मात्रा और त्वचा में प्राकृतिक तेल के अधिक उत्पादन के कारण होता है।
प्रेग्नेंसी ग्लो कब से दिखना शुरू होता है?
चिकित्सकों के अनुसार, यह चमक आमतौर पर गर्भावस्था के चौथे महीने के बाद अधिक स्पष्ट होती है। शुरुआती महीनों में मतली और थकान के कारण यह कम दिखती है।
क्या सभी गर्भवती महिलाओं को प्रेग्नेंसी ग्लो होता है?
नहीं, यह ज़रूरी नहीं है। हर महिला का शरीर अलग होता है और हार्मोनल प्रतिक्रिया भिन्न हो सकती है। कुछ महिलाओं को चमक मिलती है, जबकि कुछ को मुंहासे या तैलीय त्वचा जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।
गर्भावस्था में मुंहासे क्यों होते हैं?
गर्भावस्था के दौरान त्वचा में प्राकृतिक तेल (सीबम) का उत्पादन बढ़ जाता है। जिन महिलाओं की त्वचा पहले से तैलीय होती है, उनके लिए यह अतिरिक्त तेल मुंहासों का कारण बन सकता है। यह गर्भावस्था का सामान्य बदलाव है।
प्रेग्नेंसी में त्वचा की चमक बनाए रखने के लिए क्या खाएँ?
ताज़े फल, हरी सब्ज़ियाँ, दाल, दूध, दही, अंडा और प्रोटीन युक्त भोजन के साथ पर्याप्त पानी पीना त्वचा के लिए फायदेमंद है। शरीर को आवश्यक विटामिन और पोषक तत्व मिलने से त्वचा अधिक स्वस्थ और चमकदार दिख सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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