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गर्भावस्था में हीट स्ट्रेस: मां और शिशु दोनों के लिए गंभीर खतरा, जानें बचाव के उपाय

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गर्भावस्था में हीट स्ट्रेस: मां और शिशु दोनों के लिए गंभीर खतरा, जानें बचाव के उपाय

सारांश

गर्मी के मौसम में गर्भवती महिलाओं के लिए हीट स्ट्रेस दोहरा खतरा बन जाता है — मां और अजन्मे शिशु दोनों पर असर। हार्मोनल बदलाव और बढ़े रक्त संचार से जोखिम और बढ़ता है। MP आयुष विभाग व स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दोपहर की धूप से बचने और हाइड्रेशन बनाए रखने की सलाह दी है।

मुख्य बातें

हीट स्ट्रेस तब होता है जब शरीर अत्यधिक गर्मी को बाहर निकालने में असमर्थ हो जाता है — यह हीट स्ट्रोक तक बढ़ सकता है।
गर्भावस्था में हार्मोनल बदलाव, बढ़ा वजन और अतिरिक्त रक्त संचार हीट स्ट्रेस का खतरा कई गुना बढ़ा देते हैं।
गंभीर मामलों में मां के साथ-साथ गर्भस्थ शिशु की सेहत पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
मध्य प्रदेश सरकार के आयुष विभाग ने दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे तक धूप में न निकलने की सलाह दी है।
दिनभर पानी, ORS, छाछ और नींबू पानी पीना और सूती-ढीले कपड़े पहनना जरूरी है।
चक्कर, तेज सिरदर्द, उल्टी या अत्यधिक थकान पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

गर्भावस्था के दौरान हीट स्ट्रेस (गर्मी का तनाव) मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम उत्पन्न कर सकता है। 28 मई को स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेताया कि शरीर में अत्यधिक गर्मी जमा होने की यह स्थिति प्रेग्नेंसी में विशेष रूप से खतरनाक होती है, क्योंकि हार्मोनल बदलाव और बढ़े हुए रक्त संचार के कारण गर्भवती महिलाओं का शरीर सामान्य से अधिक गर्मी महसूस करता है। मध्य प्रदेश सरकार के आयुष विभाग सहित विशेषज्ञों ने गर्मी के मौसम में गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष सावधानियों की सलाह जारी की है।

हीट स्ट्रेस क्या है और यह कैसे होता है

हीट स्ट्रेस तब उत्पन्न होता है जब शरीर की आंतरिक गर्मी इतनी बढ़ जाती है कि वह उसे बाहर निकालने में असमर्थ हो जाता है। यह गर्मी मांसपेशियों की सक्रियता या बाहरी गर्म वातावरण — जैसे तेज धूप, गर्म कमरा या औद्योगिक परिसर — से उत्पन्न हो सकती है। जब शरीर का तापमान नियंत्रित रखने की प्रक्रिया बाधित होती है, तो हीट स्ट्रेस की शुरुआत होती है। यदि समय पर ध्यान न दिया जाए तो यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है।

लक्षण और गंभीरता के स्तर

हीट स्ट्रेस के शुरुआती संकेतों में त्वचा पर हीट रैश (चकत्ते) और मांसपेशियों में ऐंठन शामिल हैं। स्थिति बिगड़ने पर हीट एग्जॉस्टशन होता है, जो अंततः हीट स्ट्रोक में बदल सकता है। हीट स्ट्रोक मस्तिष्क और अन्य महत्वपूर्ण अंगों को क्षति पहुंचा सकता है और प्राणघातक भी साबित हो सकता है।

गर्भावस्था में खतरा क्यों अधिक होता है

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलाव, बढ़ा हुआ वजन और अतिरिक्त रक्त संचार मिलकर हीट स्ट्रेस का जोखिम कई गुना बढ़ा देते हैं। इससे मां को थकान, चक्कर, सिरदर्द और उल्टी जैसी तकलीफें हो सकती हैं। गंभीर मामलों में गर्भ में पल रहे शिशु की सेहत पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

बचाव के उपाय: विशेषज्ञों की सलाह

मध्य प्रदेश सरकार का आयुष विभाग और स्वास्थ्य विशेषज्ञ गर्भवती महिलाओं को निम्नलिखित सावधानियां अपनाने की सलाह देते हैं:

दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी, ओआरएस, छाछ और नींबू पानी पिएं — डिहाइड्रेशन से बचना सर्वोपरि है। हल्के, ढीले और सूती कपड़े पहनें जो पसीना सोख सकें। दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच तेज धूप में बाहर निकलने से बचें। नियमित रूप से आराम करें और ठंडी, हवादार जगह पर रहें। घर के अंदर पंखे या कूलर का उपयोग करें।

डॉक्टर से कब संपर्क करें

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि चक्कर, तेज सिरदर्द, उल्टी या अत्यधिक थकान जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए और ठंडी जगह पर आराम करना चाहिए। गर्भावस्था में छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर बड़े खतरे से बचा जा सकता है — यह समय पर सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष प्रोटोकॉल और सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर 'कूलिंग जोन' की व्यवस्था अभी भी व्यापक रूप से अनुपस्थित है। जलवायु परिवर्तन के कारण भारत में गर्मी की लहरें लंबी और तीव्र होती जा रही हैं, जिससे यह सार्वजनिक स्वास्थ्य चेतावनी मौसमी नहीं, बल्कि संरचनात्मक जरूरत बन गई है। मध्य प्रदेश का आयुष विभाग सलाह जारी कर रहा है, परंतु जमीनी स्तर पर आशा कार्यकर्ताओं और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक यह जानकारी कितनी पहुंच रही है — यह सवाल अनुत्तरित है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गर्भावस्था में हीट स्ट्रेस क्या होता है?
हीट स्ट्रेस वह स्थिति है जब शरीर में जमा गर्मी को बाहर निकालने की प्रक्रिया बाधित हो जाती है। गर्भावस्था में हार्मोनल बदलाव और बढ़े हुए रक्त संचार के कारण यह खतरा सामान्य महिलाओं की तुलना में अधिक होता है, और यह मां के साथ-साथ गर्भस्थ शिशु को भी प्रभावित कर सकता है।
हीट स्ट्रेस के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
शुरुआती लक्षणों में त्वचा पर हीट रैश (चकत्ते) और मांसपेशियों में ऐंठन शामिल हैं। स्थिति बिगड़ने पर हीट एग्जॉस्टशन और फिर हीट स्ट्रोक हो सकता है, जो मस्तिष्क व अन्य अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है।
गर्भवती महिलाएं हीट स्ट्रेस से कैसे बचें?
दिनभर पर्याप्त पानी, ORS, छाछ और नींबू पानी पीएं। दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे तक धूप में न निकलें, हल्के-ढीले सूती कपड़े पहनें और ठंडी-हवादार जगह पर आराम करें।
गर्भावस्था में हीट स्ट्रेस से शिशु को क्या खतरा है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, गंभीर हीट स्ट्रेस की स्थिति में गर्भस्थ शिशु की सेहत पर भी बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए मां का तापमान नियंत्रित रखना शिशु की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है।
डॉक्टर से तुरंत कब संपर्क करना चाहिए?
यदि चक्कर, तेज सिरदर्द, उल्टी या अत्यधिक थकान जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सक से मिलें और ठंडी जगह पर आराम करें। इन संकेतों को नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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